नोएडा की सियासत में ‘पोस्टर वॉर’: पंकज सिंह की हैट्रिक पर सस्पेंस, पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज गुप्ता ने टिकट के लिए ठोकी ताल

नोएडा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर नोएडा की राजनीति में अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। नोएडा विधानसभा सीट, जिसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सुरक्षित किला माना जाता है, वहां से वर्तमान विधायक और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह क्या लगातार तीसरी बार प्रत्याशी बनेंगे या पार्टी किसी नए चेहरे पर दांव खेलेगी—इसको लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय स्तर पर चर्चाएं छिड़ गई हैं।  इस बीच नोएडा बीजेपी के पूर्व महानगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने आगामी चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है, जिससे शहर का सियासी पारा एकाएक चढ़ गया है।

शहर भर में लगे होर्डिंग्स बने चर्चा का केंद्र

मनोज गुप्ता की ओर से नोएडा शहर के विभिन्न प्रमुख चौराहों और व्यस्त इलाकों में बड़े-बड़े होर्डिंग्स और पोस्टर लगाए गए हैं। इन होर्डिंग्स ने पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता का ध्यान अपनी ओर इसलिए खींचा, क्योंकि इनमें भाजपा के शीर्ष राष्ट्रीय व प्रांतीय नेताओं समेत स्थानीय पदाधिकारियों की तस्वीरें तो मौजूद हैं, लेकिन वर्तमान स्थानीय विधायक पंकज सिंह का फोटो गायब है। पार्टी के भीतर इस कदम को एक सीधे संदेश और ‘टिकट पर दावेदारी’ के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि मनोज गुप्ता का यह शक्ति प्रदर्शन नोएडा सीट पर अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है।

गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान के संकेत

सूत्रों के अनुसार, इस टिकट की होड़ के पीछे पुरानी सांगठनिक खींचतान भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है।  तीसरी बार अध्यक्ष न बन पाने की टीस: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मनोज गुप्ता जब नोएडा भाजपा के महानगर अध्यक्ष थे, तब वे लगातार तीसरी बार इस पद पर बने रहना चाहते थे। हालांकि, पार्टी ने उस समय बदलाव किया और गुप्ता का दोबारा चयन नहीं हो सका।  विधायक पर आरोप की चर्चा: सूत्रों का दावा है कि मनोज गुप्ता और उनके समर्थक इस बात से नाराज चल रहे थे कि अध्यक्ष पद न मिलने में पीछे से स्थानीय विधायक पंकज सिंह की भूमिका रही है। इसी वजह से दोनों गुटों के बीच भीतर ही भीतर दूरियां बढ़ती चली गईं, जो अब पोस्टर और होर्डिंग्स के जरिए सार्वजनिक रूप से सामने आ रही हैं।

क्या बदला जाएगा प्रत्याशी या मिलेगी हैट्रिक का मौका?

पंकज सिंह ने वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में बड़े अंतर से जीत दर्ज कर नोएडा सीट पर पार्टी का दबदबा कायम रखा है। हालांकि, लगातार दो कार्यकाल पूरे होने के बाद अब स्थानीय स्तर पर नए समीकरण बनने लगे हैं:

1. वैश्य और स्थानीय समीकरण: मनोज गुप्ता वैश्य समुदाय से आते हैं, जो नोएडा शहर के व्यापारी वर्ग और मतदाता आधार में एक प्रमुख स्थान रखता है।

2. स्थानीय बनाम ‘वीआईपी’ चेहरा: पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं में इस बात की भी सुगबुगाहट रहती है कि स्थानीय सांगठनिक चेहरों को भी प्रतिनिधित्व का मौका मिलना चाहिए।

3. पार्टी की रणनीति: भाजपा अक्सर अपने आंतरिक सर्वे और एंटी-इंकमबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को भांपते हुए टिकट वितरण में फेरबदल करती आई है। हालांकि, हाईकमान द्वारा पंकज सिंह जैसे कद्दावर नेता का टिकट काटना इतना आसान फैसला नहीं होगा।

कार्यकर्ताओं में असमंजस, आलाकमान की नजर

शहर में अचानक शुरू हुई इस ‘पोस्टर राजनीति’ से भाजपा कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति है। एक तरफ जहां पंकज सिंह का मजबूत जनाधार और पार्टी में उनका बड़ा कद है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नेताओं का खुलकर सामने आना और दावेदारी ठोकना यह संकेत देता है कि इस बार नोएडा सीट पर पार्टी के अंदर का मुकाबला आसान नहीं होने वाला है। फिलहाल सबकी नजरें पार्टी आलाकमान के रुख पर टिकी हैं।

 

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