मुंबई-बेंगलुरु को भूल जाइए, सूरत बन रहा है भारत का नया खर्च हब

अब तक भारत की उपभोग (कंजम्पशन) कहानी मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता जैसे बड़े महानगरों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन अब देश का नया उपभोग नक्शा बन रहा है, और इसके केंद्र में है गुजरात का शहर सूरत। एक नई रिपोर्ट ‘द मैनी अर्बन इंडियाज’ के मुताबिक, सूरत भले ही देश के टॉप उपभोग बाजारों में सातवें नंबर पर हो, लेकिन देश के छह सबसे बड़े महानगरों (बिग सिक्स) के बाहर यह सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। सूरत की आबादी बिग सिक्स शहरों के लगभग बराबर है और यहां युवाओं की तादाद भी काफी ज्यादा है।

अहमदाबाद-पुणे से आगे निकला सूरत

रिपोर्ट के अनुसार सूरत का उपभोग बाजार करीब 34 अरब डॉलर का है, जो अहमदाबाद और पुणे (28 अरब डॉलर) से भी बड़ा है। खास बात यह है कि सूरत में औसत घरेलू खर्च बेंगलुरु से भी ज्यादा है। देश के टॉप 100 शहरों में से 15 शहर ऐसे हैं जिनका उपभोग बाजार कम से कम 10 अरब डॉलर का है, और ये मिलकर कुल उपभोग का करीब दो-तिहाई हिस्सा बनाते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि मुंबई या बेंगलुरु पीछे छूट रहे हैं — बिग सिक्स शहर अब भी 100 शहरों के कुल 844 अरब डॉलर के सालाना उपभोग में 46% हिस्सेदारी रखते हैं। लेकिन सूरत यह जरूर दिखाता है कि अब भारत के बड़े उपभोग अवसर सिर्फ पारंपरिक महानगरों तक सीमित नहीं रहे। चंडीगढ़ और तिरुवनंतपुरम में भी घरेलू खर्च की दर देश में सबसे ज्यादा है, जिसकी वजह वहां की ऊंची बचत दर और कम कर्ज है।

“बूमटाउन” श्रेणी में शामिल है सूरत

देश के टॉप 100 शहर भारत की सिर्फ पांचवें हिस्से आबादी को समेटे हैं, लेकिन राष्ट्रीय उपभोग में इनकी हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई यानी 74.5 लाख करोड़ रुपए (844 अरब डॉलर) है। इन शहरों में घरेलू खर्च सालाना 10.4% की दर से बढ़ रहा है, जबकि पूरे देश में यह दर 8.5% है। रिपोर्ट में सूरत को “बूमटाउन” यानी तेजी से बढ़ते शहरों की श्रेणी में रखा गया है, जिसमें पुणे, अहमदाबाद, लखनऊ, कोयंबटूर, जयपुर, इंदौर और वडोदरा जैसे शहर भी शामिल हैं। ये शहर बड़ी आबादी और ज्यादा प्रति-घर खर्च के दम पर उपभोग बाजार का अगला बड़ा केंद्र बनते जा रहे हैं। सूरत, चंडीगढ़, तिरुवनंतपुरम और वडोदरा में प्रति-घर खर्च बिग सिक्स शहरों से भी ज्यादा है।

कपड़ा और हीरा कारोबार से बढ़ी सूरत की आमदनी

रिपोर्ट के मुताबिक सूरत में मध्यम और उच्च आय वर्ग के परिवारों की संख्या न सिर्फ देश में सबसे ज्यादा है, बल्कि यह सबसे तेजी से भी बढ़ रही है। इसकी बड़ी वजह है शहर का टेक्सटाइल उद्योग, हीरा व्यापार और यहां आकर बसे प्रवासी परिवारों की आर्थिक प्रगति। सूरत का औसत घरेलू आय हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता से भी अधिक है। बेंगलुरु और चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा औसत घरेलू आय (करीब 28 लाख रुपए सालाना) है, वहीं पुणे, तिरुवनंतपुरम और सूरत तीन बिग सिक्स शहरों से इस मामले में आगे हैं। देश में मध्यम आय वर्ग (सालाना 6 से 36 लाख रुपए कमाने वाले) परिवारों की हिस्सेदारी बीते एक दशक में 29% से बढ़कर 53% हो गई है, और 2030-31 तक यह 60% तक पहुंच सकती है। वहीं 36 लाख रुपए से ज्यादा कमाने वाले उच्च आय वर्ग परिवारों की हिस्सेदारी 3% से बढ़कर 12% हो गई है।

खर्च के तरीके भी बदले

टॉप 100 शहरों में अब खाने-पीने पर होने वाला खर्च कुल खर्च का 31% रह गया है, जो एक दशक पहले करीब 38% था। अब शहरी परिवार अपने खर्च का करीब दो-तिहाई हिस्सा सेवाओं पर खर्च करते हैं, जिसमें घर, आवागमन और शिक्षा की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। सूरत समेत सभी बूमटाउन शहरों ने 2025-26 में कुल 20.1 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। औसत घरेलू खर्च 12.2 लाख रुपए रहा, जो बीते दशक में सालाना 10.5% की दर से बढ़ा है। इसमें से 31.1% खाने-पीने पर, 25.8% घर और बिजली-पानी पर, 19.2% आवागमन पर और 6.8% शिक्षा पर खर्च होता है। दिलचस्प बात यह है कि सूरत का करीब 62% खर्च वीकेंड यानी शनिवार-रविवार को होता है। सूरत का वीकेंड स्पेंडिंग मल्टीप्लायर 2.44 गुना है, जो जयपुर (2.76 गुना) के बाद देश में दूसरा सबसे ज्यादा है।

कार-बाइक से लेकर वॉशिंग मशीन तक, बढ़ रही खरीदारी

बूमटाउन शहरों में कार मालिकाना हक 32% तक पहुंच गया है, जो लगभग बिग सिक्स शहरों के बराबर है। बाइक मालिकाना हक 72% है, जो बिग सिक्स के 50% से काफी ज्यादा है। वॉशिंग मशीन (40%) और माइक्रोवेव (31%) रखने वालों की संख्या भी बिग सिक्स (क्रमशः 30% और 27%) से ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक 12-14 लाख रुपए सालाना कमाने वाले परिवार कार खरीदने की ज्यादा संभावना रखते हैं, जबकि 14 लाख रुपए की आय पार करने के बाद वॉशिंग मशीन खरीदने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।

खर्च के साथ-साथ बचत में भी आगे सूरत

सूरत सिर्फ खर्च करने में ही नहीं, बचत करने में भी आगे है। सूरत और वडोदरा में करीब 92% परिवार आपात स्थिति के लिए बचत करते हैं, जो देश में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है। बूमटाउन परिवार औसतन सालाना 4.5 लाख रुपए की बचत करते हैं, और इनका कर्ज-आय अनुपात 15.4% है, जो बिग सिक्स के 18.5% से कम है।

भारत के अगले उपभोग उछाल की झलक है सूरत

रिपोर्ट के मुताबिक भारत के टॉप 100 शहरों में से 65% से ज्यादा शहर बड़े आर्थिक गलियारों पर स्थित हैं। मुंबई, पुणे, सूरत, वडोदरा और अहमदाबाद से बना पश्चिमी गलियारा प्रति-व्यक्ति आय, औद्योगिक आधार और टिकाऊ उपभोक्ता सामान की खपत के मामले में देश में सबसे आगे है। बिग सिक्स शहर अब भी उपभोग का सबसे बड़ा केंद्र बने हुए हैं, लेकिन सूरत, अहमदाबाद और पुणे ने अपने दम पर करीब 30 अरब डॉलर के उपभोग बाजार खड़े कर लिए हैं। सूरत की सबसे बड़ी खासियत यही है — यह बिग सिक्स के बाहर देश का सबसे बड़ा उपभोग बाजार है, यहां का औसत घरेलू खर्च बेंगलुरु से भी ज्यादा है, और यहां मध्यम व उच्च आय वर्ग के परिवारों की संख्या देश में सबसे तेजी से बढ़ रही है।

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