Cyber crime: ग्रेटर नोएडा वेस्ट में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड बैंककर्मी को IGL गैस का ऐप डाउनलोड करने का झांसा देकर 16 लाख रुपये ठग लिए हैं। ठगों ने WhatsApp पर अनजान नंबर से IGL गैस से जुड़ा फर्जी लिंक भेजा। लिंक खोलते ही APK फाइल डाउनलोड हो गई, जिसके जरिए ठगों ने पीड़ित के मोबाइल का पूरा एक्सेस हासिल कर बैंक खाते से छह बार में रकम ट्रांसफर कर ली।
पीड़ित पिंटू, जो ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासी और रिटायर्ड बैंककर्मी हैं, को 17 जुलाई को दोपहर करीब 3 बजे WhatsApp पर अनजान नंबर से मैसेज मिला। मैसेज में IGL गैस से संबंधित लिंक दिया गया था। पिंटू ने लिंक पर क्लिक कर आगे की प्रक्रिया पूरी की। उन्हें लगा कि वे असली IGL ऐप डाउनलोड कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में उनके मोबाइल में एक मैलिशियस APK फाइल इंस्टॉल हो गई।
इस APK के जरिए ठगों ने नाम, आधार नंबर, पैन कार्ड, डेबिट कार्ड और अन्य संवेदनशील जानकारियां हासिल कर लीं। मोबाइल का एक्सेस मिलते ही ठगों ने बैंक खाते से छह अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 16 लाख रुपये निकाल लिए। शाम करीब 5 बजे बैंक से ट्रांजेक्शन के SMS आने पर पिंटू को ठगी का पता चला। उन्होंने तुरंत बैंक शाखा और साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। बुधवार को साइबर क्राइम थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
डीसीपी साइबर सुरक्षा शैव्या गोयल ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर हुई है। जांच तेज कर दी गई है। साइबर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि अनजान नंबर से आए किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। खासकर APK फाइल बिल्कुल न डाउनलोड करें और उसमें बैंक या निजी जानकारी कभी न भरें। ठग APK फाइल के माध्यम से मोबाइल का पूरा नियंत्रण हासिल कर बैंक खातों से रकम निकाल रहे हैं। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराएं।

