AC Skywalk Noida: नोएडा। सेक्टर-51 (एक्वा लाइन) और सेक्टर-52 (ब्लू लाइन) मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित वातानुकूलित (एसी) स्काईवॉक का उद्घाटन 16 अगस्त 2026 की तय समयसीमा पर नहीं हो सका। नोएडा प्राधिकरण ने पहले इसी तारीख से इसे जनता के लिए खोलने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अंतिम चरण के अधूरे काम और तकनीकी कारणों से यह डेडलाइन एक बार फिर टल गई। प्राधिकरण के मुताबिक अब 25 अगस्त तक इसे खोलने की तैयारी है, और फिलहाल ट्रायल रन के दौरान तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा इंतजामों और ट्रैवलेटर (चलती हुई वॉकवे) की जांच चल रही है।
बार-बार टली समयसीमा, बढ़ती लागत
यह परियोजना जून 2023 में शुरू हुई थी, जब दावा किया गया था कि सात महीनों में काम पूरा हो जाएगा। लेकिन काम लगातार पिछड़ता रहा। फरवरी 2026 तक भी स्काईवॉक जनता के लिए नहीं खुल सका था, और इस बीच परियोजना की लागत शुरुआती करीब 26 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 से 42 करोड़ रुपये के बीच पहुंच गई। देरी की एक बड़ी वजह यह रही कि निर्माण के बीच में दिल्ली मेट्रो का एक पिलर स्काईवॉक के रास्ते में आ गया, जिससे ढांचे का एक हिस्सा प्रभावित हुआ। लंबी चर्चा के बाद पिलर को काटने के बजाय उसके दोनों ओर से करीब छह-छह मीटर का वैकल्पिक रास्ता निकालने का फैसला लिया गया।
पुराना ढांचा हटाकर नए पिलर, स्थानीय नागरिकों ने उठाए सवाल
स्थानीय स्तर पर सतर्क नागरिकों की निगरानी में सामने आई जानकारी के अनुसार, दोषपूर्ण संरचना के कारण स्काईवॉक के कुछ पुराने हिस्से को गिराकर नए पिलर और बुनियादी सपोर्ट का काम फिर से किया जा रहा है। नागरिकों ने आरोप लगाया है कि मौके पर हो रही वेल्डिंग तय ISO मानकों के अनुरूप नहीं है, इस्तेमाल हो रहे फास्टनर हाई-टेंसाइल और फॉस्फेट-कोटेड श्रेणी के नहीं हैं, और लगाया जा रहा स्टील प्रमाणित टिस्को (टाटा स्टील) ब्रांड का नहीं है। गौरतलब है कि नोएडा प्राधिकरण ने खुद भी हाल में गुणवत्ता जांच को लेकर सक्रियता दिखाई है। 6 अगस्त 2026 को प्राधिकरण के महाप्रबंधक (सिविल) एस.पी. सिंह ने वर्क सर्किल-3 के अंतर्गत आने वाले निर्माण स्थलों का औचक निरीक्षण किया था, जिसमें सेक्टर 51-52 फुटओवर ब्रिज (स्काईवॉक) की साइट भी शामिल थी। इस निरीक्षण में स्काईवॉक के निर्माण कार्य में सेल (SAIL) ब्रांड के स्टील के इस्तेमाल की पुष्टि हुई थी, जो नागरिकों द्वारा उठाए जा रहे टिस्को-संबंधी सवाल से अलग रुख दिखाता है।
जागरूक नागरिकों की भूमिका की सराहना
इलाके के एक वरिष्ठ नागरिक की सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है, जो 70 वर्ष से अधिक उम्र में भी रोजाना मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की बारीकी से निगरानी करते हैं और अनियमितताओं को बिंदुवार दर्ज कर सामने लाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सतर्कता उस स्तर की है जो अक्सर प्राधिकरण के संबंधित सर्किल के नियमित स्टाफ की निगरानी में भी नहीं दिखती। नागरिकों ने सुझाव दिया है कि इस तरह की सभी शिकायतों और बिंदुओं को औपचारिक रूप से IGRS (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पोर्टल पर दर्ज कराया जाना चाहिए, ताकि अनियमितताओं पर समयबद्ध और जवाबदेह कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
आगे की राह
प्राधिकरण अंतिम चरण के काम में किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचने और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कह रहा है, क्योंकि स्काईवॉक शुरू होते ही यहां यात्रियों की आवाजाही तेजी से बढ़ने की आशंका है। रोजाना हजारों यात्री जो फिलहाल सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशनों के बीच सड़क मार्ग से पैदल आवाजाही करते हैं, उन्हें स्काईवॉक चालू होने पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि निर्माण सामग्री और गुणवत्ता मानकों को लेकर उठे सवालों के मद्देनजर विशेषज्ञ स्तर पर स्वतंत्र संरचनात्मक ऑडिट और पारदर्शी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग जोर पकड़ सकती है। निर्माण सामग्री और वेल्डिंग गुणवत्ता से जुड़े कुछ आरोप स्थानीय नागरिकों के स्तर पर की गई मौके की निगरानी पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि के लिए नोएडा प्राधिकरण की ओर से स्वतंत्र तकनीकी जांच रिपोर्ट का इंतजार रहेगा।
यह भी पढ़ें: Uttarakhand Election: पंखुड़ी पाठक को कांग्रेस ने दी नई जिम्मेदारी

