The plight of Noida and Greater Noida: अवैध होर्डिंग्स और टूटी सड़कों से परेशान जनता, सांसद-विधायक की चुप्पी पर जनता नाराज, क्या बदलेगी तकदीर?

The plight of Noida and Greater Noida: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अवैध पोस्टर, होर्डिंग और बैनर पोल-खंबों पर बेरोकटोक लगाए जा रहे हैं। आंधी-तूफान में ये उखड़कर राहगीरों, दोपहिया सवारों और वाहनों पर गिर जाते हैं। कई बार गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं और बड़े हादसे टले। सड़कें खड्डों में तब्दील हो चुकी हैं, जाम रोजमर्रा की समस्या है। नोएडा स्काईवॉक 2023 से निर्माणाधीन है और चार मूर्ति (गौर चौक) अंडरपास का काम भी बार-बार खिसकता रहा है। सांसद डॉ. महेश शर्मा और नोएडा विधायक पंकज सिंह (रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे) पर आरोप है कि वे प्राधिकरण के सीईओ को सख्त निर्देश नहीं देते और ठोस कार्रवाई नहीं करवाते। जनता पूछ रही है—क्या अगले चुनाव में इनकी तकदीर बदलेगी?

अवैध होर्डिंग-पोस्टर: जानलेवा साबित हो रहे

ग्रेटर नोएडा और नोएडा में बिजली के खंभे, बस स्टॉप, दिशा सूचक बोर्ड, दीवारें और चौराहे अवैध विज्ञापनों से पट गए हैं। रेंटल-पीजी, कोचिंग, कैब सर्विस और राजनीतिक पोस्टर मनमाने ढंग से चिपकाए जाते हैं। आंधी-बारिश में ये कमजोर एंगल पर लगे होर्डिंग गिर पड़ते हैं।जून 2026 में ग्रेटर नोएडा में तेज आंधी के दौरान कई विज्ञापन बोर्ड गिरे। टेकजोन में एक बड़े होर्डिंग के गिरने से ट्रैफिक थम गया। गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं, लेकिन बड़ा हादसा टल गया। निवासी और आरडब्ल्यूए बार-बार शिकायत कर रहे हैं। बीटा-1 के आरडब्ल्यूए महासचिव हरिंदर भाटी कहते हैं कि ये न सिर्फ शहर की खूबसूरती बिगाड़ते हैं बल्कि सुरक्षा के लिए खतरा हैं। अल्फा-1 के आलोक सिंह ने ‘फोटो खींचो, जुर्माना लगाओ’ अभियान चलाने की मांग की है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (GNIDA) ने जुलाई 2026 में कुछ कार्रवाई की और चार प्रतिष्ठानों पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया। लेकिन समस्या जड़ से नहीं हट रही। मुंबई के घाटकोपर होर्डिंग हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण ने स्ट्रक्चरल ऑडिट के निर्देश दिए थे, फिर भी हालात जस के तस हैं।

सड़कें खड्डों में तब्दील, जाम से निजात नहीं

नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सड़कें बारिश के बाद और बदतर हो जाती हैं। गड्ढे, उखड़ी सड़कें और रोड़ी फैली रहती है। मास्टर प्लान रोड, सेक्टर 122, सेक्टर 150, बीटा-1, गामा-1 और कई आंतरिक सड़कें खराब हालत में हैं। हजारों करोड़ खर्च होने के बावजूद गुणवत्ता पर सवाल उठते रहते हैं। गौर चौक (चार मूर्ति) हो या परी चौक, जाम रोज की कहानी है। अवैध पार्किंग, ऑटो-ई-रिक्शा स्टैंड और अधूरे सर्विस रोड समस्या बढ़ाते हैं। ट्रैफिक पुलिस ने हाल ही में गौर चौक क्षेत्र का सर्वे कर हॉटस्पॉट चिह्नित किए हैं। निवासी यू-टर्न और अवैध स्टैंड हटाने की मांग कर रहे हैं।

स्काईवॉक और अंडरपास: सालों से इंतजार

सेक्टर 51 और 52 मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाला एसी स्काईवॉक जून 2023 से निर्माणाधीन है। करीब 45 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट की दसवीं डेडलाइन 16 अगस्त 2026 भी निकल गई। अब 25 अगस्त तक खोलने का लक्ष्य है। ट्रायल रन शुरू हो चुका है, लेकिन तकनीकी काम बाकी हैं। चार मूर्ति/गौर चौक अंडरपास का काम भी देरी से चल रहा है। 2024 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा नहीं किया जा सका। मई 2026 में 70 प्रतिशत काम पूरा होने और अगस्त में खोलने के दावे किए गए थे, लेकिन निर्माण आगे खिसकता रहा। जाम की समस्या बनी हुई है।

सांसद-विधायक की भूमिका पर सवाल

सांसद डॉ. महेश शर्मा सड़क सुरक्षा बैठकें करते हैं, ब्लैक स्पॉट सुधार के निर्देश देते हैं और विकास कार्यों का शिलान्यास करते हैं। विधायक पंकज सिंह भी कई सड़क और नाली परियोजनाओं का लोकार्पण करते रहे हैं। हाल ही में दोनों ने सलारपुर में करोड़ों के कामों का शिलान्यास किया। फिर भी निवासी शिकायत करते हैं कि अवैध होर्डिंग हटाने, सड़क मरम्मत और अधूरे प्रोजेक्ट पूरा करने पर पर्याप्त दबाव नहीं बनाया जाता। सेक्टर 105 के निवासियों ने विधायक को सड़क, नाली और पार्क की खराब स्थिति की शिकायत भेजी थी। आरडब्ल्यूए और आम लोग कहते हैं कि चुनावी समय में नेता दिखते हैं, बाकी समय समस्याएं नजरअंदाज की जाती हैं।

जनता की राय: क्या बदलेगी तकदीर?

अखबारों और सोशल मीडिया में निवासी गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। कई लोग कहते हैं कि अवैध निर्माण और लापरवाही से जान-माल का खतरा बढ़ रहा है। आरडब्ल्यूए नेता और स्थानीय कार्यकर्ता प्राधिकरण और जनप्रतिनिधियों से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कुछ का कहना है कि विकास के दावे तो होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। आगामी चुनाव में नोएडा और दादरी के मतदाता इन मुद्दों को कितना तवज्जो देंगे, यह आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल शहर की सड़कें, सुरक्षा और अधूरे प्रोजेक्ट जनता के गुस्से का सबब बने हुए हैं। प्राधिकरण और जनप्रतिनिधियों को अब ठोस और सतत कार्रवाई की जरूरत है, वरना आक्रोश और बढ़ेगा।

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