Major cyber fraud busted in Noida: नोएडा। गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने साइबर अपराध के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगों को बेचने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। थाना फेस-3 (सेंट्रल नोएडा) पुलिस ने इस मामले में 6 पुरुष और 1 महिला सहित कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजब सिंह, प्रदीप, गुलाब सिंह लोधी, कौशल, सचिन, जिनेंद्र सिंह और प्रियंका के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ट्रेडिंग-निवेश के नाम पर देशभर में की जा रही साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराता था। जांच में सामने आया है कि इन खातों के विरुद्ध देशभर के अलग-अलग राज्यों से अब तक 74 साइबर शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जो इस नेटवर्क की व्यापकता को दर्शाता है।
गोपनीय सूचना पर हुई कार्रवाई
सेंट्रल नोएडा की एडीसीपी स्वतंत्र सिंह के अनुसार, थाना फेस-3 पुलिस को बीट पुलिसिंग और गोपनीय सूचना के आधार पर इस गिरोह की गतिविधियों की जानकारी मिली थी। इसी सूचना के आधार पर 29 जुलाई 2026 को पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए पूरे गिरोह को दबोच लिया। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 7 मोबाइल फोन, एक चेक बुक, एक स्टैंप और चार लेटरहेड बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाने में किया जाता था।
OTP चुराने के लिए होता था खास एप्लिकेशन का इस्तेमाल
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे सबसे पहले फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद इन खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों की सिम अपने पास रखते थे और व्हाट्सएप व टेलीग्राम के जरिए साइबर अपराधियों से सीधा संपर्क बनाते थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि आरोपी अपने मोबाइल फोन में “Ding SMS APK” नाम की एक एप्लिकेशन इंस्टॉल करते थे, जिसकी मदद से बैंक खातों से जुड़े ओटीपी और अन्य गोपनीय संदेश सीधे उनके फोन पर पहुंच जाते थे। इन्हीं ओटीपी के सहारे साइबर अपराधी खातों में जमा ठगी की रकम आसानी से निकाल लेते थे। ठगी की रकम निकल जाने के बाद कुछ ही दिनों में ये बैंक खाते बंद कर दिए जाते थे, ताकि पुलिस जांच से बचा जा सके।
कमीशन के बदले बांटते थे मुनाफा
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ट्रेडिंग और निवेश योजनाओं के नाम पर देशभर के लोगों से ठगी गई रकम इन्हीं म्यूल खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। इसके एवज में साइबर अपराधी गिरोह को मोटा कमीशन देते थे, जिसे गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम करता था, जिसमें हर सदस्य की अलग-अलग भूमिका तय थी।
बीएनएस और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना फेस-3 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेजों के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
लगातार बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले
गौतमबुद्धनगर पुलिस पिछले कुछ महीनों से लगातार म्यूल अकाउंट और फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए हो रही साइबर ठगी के खिलाफ अभियान चला रही है। हाल के महीनों में साइबर क्राइम थाना और अन्य थानों की पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट व फर्जी निवेश योजनाओं से जुड़े कई मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें करोड़ों रुपये की ठगी की रकम म्यूल खातों के जरिए इधर-उधर की गई थी। पुलिस लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे अनजान नंबरों से आने वाली धमकी भरी कॉल, फर्जी ट्रेडिंग ग्रुप या अत्यधिक मुनाफे के लालच में आकर किसी भी प्रकार का निवेश न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी थाने में दें।

