pellet gun vs non-lethal weapon: क्राउड-कंट्रोल के लिए बनाए गए ज़्यादातर “लेस-लेथल” हथियार जैसे स्पंज राउंड या रबर बुलेट इस तरह डिज़ाइन किए जाते हैं कि वो त्वचा को भेदें नहीं, बल्कि सिर्फ धक्का देकर या झटका देकर दूरी बनाए रखें। इनका मकसद ब्लंट-फोर्स इम्पैक्ट देना होता है, स्किन पेनिट्रेशन नहीं।
दूसरी तरफ पैलेट गन (आमतौर पर पंप-एक्शन शॉटगन से दागे गए छर्रे) पूरी तरह अलग कैटेगरी का हथियार है। इसमें एक कारतूस से सैकड़ों छोटे-छोटे धातु के छर्रे (pellets) एक साथ, बहुत तेज़ रफ्तार से, बिखरे हुए पैटर्न में निकलते हैं। नतीजा:
पेनिट्रेशन का डिज़ाइन: छर्रे स्किन और मसल टिशू में घुसने के लिए बने होते हैं, सिर्फ धक्का देने के लिए नहीं।
अनप्रेडिक्टेबल स्प्रेड: शॉटगन कारतूस से निकलते ही छर्रे फैलने लगते हैं, इसलिए नज़दीकी रेंज पर घातक चोट और शरीर के ऊपरी हिस्से — चेहरे, आंख, गर्दन — में लगने का खतरा कहीं ज़्यादा होता है।
मल्टीपल इम्पैक्ट पॉइंट्स: एक ही राउंड शरीर के कई हिस्सों में एक साथ चोट पहुंचा सकता है, जबकि सिंगल स्पंज राउंड सिर्फ एक जगह इम्पैक्ट देता है।
यही वजह है कि 2016 के कश्मीर आंदोलन के बाद पैलेट गन के इस्तेमाल पर देशभर में विवाद खड़ा हुआ था। उस समय की आलोचना के बाद केंद्र सरकार ने 26 जुलाई 2016 को एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी, जिसने पैलेट गन के विकल्प तलाशने और ऑपरेशनल गाइडलाइंस बनाने की सिफारिशें दी थीं जिनके मुताबिक सुरक्षाबलों को पहले वॉटर कैनन, टियर गैस और लाठीचार्ज जैसे विकल्प आज़माने होते हैं, पैलेट गन सिर्फ आखिरी विकल्प के तौर पर।
दिल्ली में क्या हुआ: CJP मार्च और पैलेट गन के आरोप
20 जुलाई को Cockroach Janta Party (CJP) के “Chalo Sansad” मार्च के दौरान दिल्ली में हालात हिंसक हो गए थे। इस मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसमें 80 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी घायल होकर RML अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और एम्स में भर्ती कराए गए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में एक प्रदर्शनकारी, 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी, के चेहरे और शरीर पर छर्रे जैसे घाव नज़र आए। एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों ने मंसूरी के चेहरे और ऊपरी शरीर में कई पैलेट पाए जाने के बाद उनकी सर्जरी की। मंसूरी ने खुद बताया कि भगदड़ के दौरान पुलिस और RAF की मौजूदगी में उन्हें चोटें आईं।
हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन इस्तेमाल किए जाने के दावे पूरी तरह झूठे और भ्रामक हैं, और गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।पुलिस ने साफ कहा कि उसके पास पैलेट गन हैं ही नहीं और प्रदर्शन के दौरान इनका इस्तेमाल नहीं हुआ। मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है। जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की लगातार फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कर एक तरह का डर का माहौल बनाया, जो निजता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का हनन है — इस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार भी किया गया। इसके अलावा, क्रैकडाउन के दौरान दिल्ली पुलिस के कुछ जवान सादे कपड़ों में भी देखे गए।
नोट: पैलेट गन के इस्तेमाल के दावे और पुलिस का खंडन — दोनों पक्ष अभी सार्वजनिक तौर पर आमने-सामने हैं, और स्वतंत्र फोरेंसिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
स्टेटवाइज अपडेट: NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में प्रदर्शन
दिल्ली से शुरू हुआ यह आंदोलन अब कई राज्यों तक फैल चुका है:
- गुजरात: अहमदाबाद, सूरत, जूनागढ़ और भावनगर में प्रदर्शन हुए, जहां बिना अनुमति जमा होने पर पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया।
- महाराष्ट्र: मुंबई में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन देखे गए।
- बिहार: राज्यपाल भवन तक मार्च रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, वॉटर कैनन और लाठियों का इस्तेमाल किया।
- तमिलनाडु, गोवा, राजस्थान: इन राज्यों में भी प्रदर्शन फैले, जिसके चलते पुलिस कार्रवाई, मेट्रो बंद और अदालती हस्तक्षेप जैसी स्थितियां बनीं।
- हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश: सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने नामची में समर्थन प्रदर्शन किया, वहीं हिमाचल और अरुणाचल में भी एकजुटता मार्च हुए।
- अन्य शहर: आंदोलन मुंबई, लखनऊ, बेगूसराय, भोपाल और लुधियाना तक पहुंच चुका है, जबकि मॉडल रिया अहिर की पुलिस वैन रोकते हुए तस्वीर इस प्रदर्शन की सबसे चर्चित तस्वीरों में से एक बन गई है।
- बेंगलुरु और पटना: यह प्रदर्शन दिल्ली से निकलकर मुंबई, बेंगलुरु और पटना तक फैल चुका है।
प्रधानमंत्री का बयान और CJP की मांग
दबाव बढ़ता देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार इंस्टाग्राम-स्टाइल वीडियो के ज़रिए छात्रों को संबोधित करते हुए पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का वादा किया। वहीं CJP ने साफ कर दिया है कि वह जंतर-मंतर के पास किसी न्यूट्रल स्थान पर ही सरकार से बातचीत करेगी, मंत्रियों के आवास पर नहीं, और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई नई FIR या दंडात्मक कार्रवाई न होने की गारंटी भी मांगी है।
राहुल गांधी का बयान: धर्मेंद्र प्रधान पर अड़ा कांग्रेस
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने घायल छात्रों से मुलाकात के बाद तीन “गैर-समझौता योग्य” मांगें दोहराईं:
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट से हटाया जाए सिर्फ मंत्रालय बदलना स्वीकार्य नहीं है।
- छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के ज़िम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उन्हें जवाबदेह ठहराया जाए और सज़ा दी जाए।
- प्रधानमंत्री मोदी छात्रों से माफी मांगें उनके मुताबिक छात्र सुझाव नहीं, न्याय मांग रहे हैं।
राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान को देश की शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार का “प्रतीक” बताया और कहा कि सिर्फ ट्रांसफर पर कोई बातचीत नहीं हो सकती “धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त किया जाना ही होगा।” इससे एक दिन पहले संसद में उन्होंने आरोप लगाया था कि सदन में उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया, और जब तक प्रधान इस्तीफा नहीं देते और पीएम मोदी माफी नहीं मांगते, तब तक कोई चर्चा नहीं होगी। दूसरी ओर, सरकार के भीतर से मिल रहे संकेतों के मुताबिक एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि प्रधान के कैबिनेट में बने रहने की संभावना है, क्योंकि सरकार के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि पेपर लीक के लिए उन्हें ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

