Social media suspended: नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026: भारत की आजादी के लगभग 79 वर्ष बाद भी, विशाल जनसंख्या, कृषि संसाधनों और युवा शक्ति के बावजूद देश तकनीकी क्षेत्र में अति पिछड़ापन महसूस कर रहा है। किसान आंदोलनों और युवा विरोध प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करने वाले अकाउंट्स को सस्पेंड किया जा रहा है, FIR दर्ज हो रही हैं, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं में हुई तरक्की आम नागरिकों तक नहीं पहुंच पा रही। व्हाट्सएप अकाउंट्स के ब्लॉक होने की घटनाएं बढ़ रही हैं, और स्वदेशी AI ऐप्स की अनुपस्थिति सवाल उठा रही है।
हाल ही में बेरोजगारी, NEET जैसी शिक्षा समस्याओं और युवा मुद्दों पर “Cockroach Janta Party” (CJP) जैसे आंदोलनों के दौरान कई यूजर्स ने व्हाट्सएप अकाउंट सस्पेंड या रिव्यू का सामना किया। CJP के प्रवक्ता का अकाउंट अस्थायी रूप से ब्लॉक हुआ, जिसे बाद में बहाल किया गया। मेटा ने इसे ऑटोमेटेड एरर बताया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे चयनात्मक दमन करार दिया। किसान आंदोलनों (खासकर 2020-24 के बड़े प्रदर्शनों) के दौरान भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार के आदेश पर पोस्ट्स और अकाउंट्स ब्लॉक किए गए थे। X (पूर्व ट्विटर) ने सैकड़ों अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगाए, जिनमें किसान संगठनों और पत्रकारों के हैंडल शामिल थे। आलोचक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र: तरक्की आम आदमी से दूर
भारत में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में निजी क्षेत्र की उल्लेखनीय प्रगति हुई है। डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स जैसे eSanjeevani दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंच बढ़ा रहे हैं, और बाजार 2030 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। फिर भी, ग्रामीण-शहरी विभाजन, डॉक्टरों की कमी, बीमा कवरेज की कमी और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय अपर्याप्त होने से आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण इलाज नहीं मिल पा रहा। गैर-संचारी रोगों का बढ़ता बोझ और क्षेत्रीय असमानताएं चुनौती बनी हुई हैं। सरकार PMJAY जैसी योजनाओं के जरिए पहुंच बढ़ाने का दावा करती है, लेकिन आलोचक कहते हैं कि शहरी और संपन्न वर्ग ही मुख्य लाभार्थी हैं।
तकनीकी पिछड़ापन और स्वदेशी AI की कमी
भारत में AI के क्षेत्र में सरकार IndiaAI Mission के तहत सक्रिय है। हाल ही में 20 स्वदेशी sovereign AI मॉडल्स (12 LLMs और 8 SLMs) को समर्थन देने की घोषणा हुई है। Sarvam AI जैसे स्टार्टअप्स और multilingual, healthcare, agriculture फोकस्ड मॉडल्स पर काम चल रहा है। AIKosh में हजारों डेटासेट्स उपलब्ध हैं और GPU इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जा रहा है। फिर भी, आम नागरिकों के लिए कोई प्रमुख स्वदेशी AI ऐप या प्लेटफॉर्म मुख्यधारा में नहीं है। पड़ोसी देशों की तुलना में ऐप डेवलपमेंट और तकनीकी आत्मनिर्भरता में भारत पिछड़ा माना जा रहा है। आलोचक आरोप लगाते हैं कि सरकार विरोधी आवाजों को दबाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जबकि नवाचार को बढ़ावा कम मिल रहा है।
पृष्ठभूमि और विश्लेषण
विशाल जनसंख्या (1.4 अरब से ज्यादा) और संसाधनों के बावजूद भारत डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल नहीं कर सका है। आर्थिक वृद्धि और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की सराहना हो रही है, लेकिन सेंसरशिप, FIRs और प्लेटफॉर्म ब्लॉकिंग की घटनाएं लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी AI, स्वास्थ्य पहुंच और डिजिटल स्वतंत्रता को मजबूत किए बिना Viksit Bharat 2047 का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण रहेगा। सरकार इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का दावा करती है, लेकिन मैदान पर आम आदमी की स्थिति में सुधार की मांग तेज हो रही है। यह रिपोर्ट उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों और हालिया घटनाओं पर आधारित है। स्थिति तेजी से बदल रही है, और सभी पक्षों के दावों की जांच जरूरी है।

