CJP issues ultimatum to the government : 24 घंटे में शिक्षा मंत्री प्रधान इस्तीफा दें, वरना देशभर में तेज होगा आंदोलन
नई दिल्ली। परीक्षा पेपर लीक विवाद को लेकर पिछले करीब दो महीने से जंतर मंतर पर डटे युवाओं के आंदोलन ने अब सरकार के सामने सीधी चुनौती रख दी है। छात्रों और युवाओं के नेतृत्व वाले संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने साफ कर दिया है कि अगर 24 घंटे के भीतर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तो देशभर में विरोध प्रदर्शन और तेज़ किए जाएंगे। संगठन का कहना है कि सरकार की ओर से जवाब देने के लिए एक दिन की मोहलत मांगी गई है, लेकिन आंदोलन फिलहाल पूरी तरह जारी रहेगा।
जंतर मंतर पर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत शुरू
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की 26 दिन तक चली भूख हड़ताल खत्म होने के कुछ ही घंटों बाद, शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों और CJP के दो प्रमुख नेताओं के बीच बातचीत हुई। इस मुलाकात को इस टकराव को सुलझाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, हालांकि CJP प्रवक्ता सौरव दास ने दोहराया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, देशव्यापी आंदोलन नहीं रोका जाएगा। दास ने मीडिया से कहा कि संगठन उम्मीद करता है कि सरकार खुले मन से बातचीत के लिए आगे आए और लंबे समय से सड़कों पर उतरे लोगों की बात सुने। सूत्रों के मुताबिक एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री ने गुरुवार को कहा था कि सरकार किसी भी लंबी बातचीत के लिए तैयार है और इसमें ‘रुतबे’ को आड़े नहीं आने देगी। इसी क्रम में सरकार की तरफ से जवाब के लिए कुछ समय मांगा गया है, जिसे CJP ने फिलहाल स्वीकार तो किया है, पर आंदोलन वापस नहीं लिया है।
CJP की तीन प्रमुख मांगें
आंदोलन की अगुवाई कर रहे दबाव समूह CJP ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन तब तक शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेंगे जब तक ये तीन मांगें पूरी नहीं होतीं:
1. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
2. आंदोलन में शामिल छात्रों-युवाओं पर कोई आपराधिक मामला दर्ज न किया जाए, इसकी सरकार गारंटी दे।
3. पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को करीब 90 लाख रुपये (लगभग 1,05,000 डॉलर) मुआवज़ा दिया जाए।
दो महीने पहले व्यंग्य के तौर पर शुरू हुआ आंदोलन, अब बना सबसे बड़ी चुनौती
गौरतलब है कि CJP आंदोलन की शुरुआत करीब दो महीने पहले महज़ ऑनलाइन व्यंग्य और कुछ सौ युवाओं की भागीदारी से हुई थी। मई महीने में एक राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक होने और उसके रद्द होने के बाद, जिससे करीब 20 लाख छात्र प्रभावित हुए, यह आंदोलन तेज़ी से देशभर में फैल गया और लाखों लोगों का ऑनलाइन समर्थन जुटा लिया। संगठन के संस्थापक अभिजीत डिपके का कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री जवाबदेही नहीं लेते, आंदोलन जारी रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद से इसे उनकी सरकार के सामने अब तक की सबसे बड़ी सार्वजनिक चुनौती बताया जा रहा है। विपक्षी दलों ने भी CJP की मांगों का समर्थन करते हुए संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामा किया है और कार्यवाही बाधित की है।
सरकार का प्रस्ताव, आंदोलनकारियों ने किया खारिज
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार रात एक सोशल मीडिया संदेश में कहा था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल शुक्रवार को बैठक कर परीक्षा पेपर लीक के दोषियों को सज़ा देने से जुड़े कानून में संशोधन के मसौदे पर चर्चा करेगा, ताकि इसे जल्द से जल्द संसद से पारित कराया जा सके। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्ताव को नाकाफी बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि सिर्फ सज़ा का प्रावधान बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि पेपर लीक रोकने के लिए पूरी परीक्षा प्रणाली में सुधार ज़रूरी है।
पुलिस कार्रवाई, मेट्रो बंद और इंटरनेट सेवाएं ठप
बीते हफ्ते दिल्ली और अन्य शहरों — मुंबई, बेंगलुरु और पटना — में आंदोलन को लेकर गुस्सा साफ देखा गया। सोमवार को जब हज़ारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च कर रहे थे, तब पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लिया, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। बुधवार रात दिल्ली के प्रदर्शन स्थल पर 10 हज़ार से ज़्यादा लोगों के जुटने पर भी झड़प की खबरें सामने आईं। आंदोलन को काबू में करने के मकसद से दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने इस हफ्ते तीसरी बार बड़े पैमाने पर स्टेशन बंद किए, शुक्रवार सुबह से करीब 17 मेट्रो स्टेशन अगले आदेश तक बंद रखे गए हैं। इसके अलावा मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी बाधित की गई हैं, जिससे आम लोगों को भी भारी असुविधा हो रही है।
विपक्ष का समर्थन, संसद में हंगामा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी सांसदों ने भी आंदोलन के समर्थन में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और गिरफ्तारी दी। इससे पहले हुए प्रदर्शनों में राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे थे और पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ जवाबदेही मांगी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराज़गी
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में भी इस आंदोलन से जुड़ा एक मामला पहुंचा, जिसमें NEET सुधार और पुलिस ज़्यादती के आरोपों पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली पीठ ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए वकील से कहा कि अदालत का समय बर्बाद न किया जाए।
आगे क्या?
फिलहाल स्थिति यह है कि सरकार और CJP नेताओं के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हो चुका है, लेकिन आंदोलन अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। CJP ने साफ कहा है कि सरकार को जवाब देने के लिए 24 घंटे का वक्त दिया गया है — अगर इस दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं आता, तो जंतर मंतर सहित देशभर में विरोध प्रदर्शन और तेज़ किए जाएंगे। आने वाले घंटे यह तय करेंगे कि यह टकराव बातचीत से सुलझेगा या आंदोलन नया और उग्र मोड़ लेगा।

