केंद्र सरकार ने सीबीएफसी का पुनर्गठन, प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी समेत 18 नए सदस्य नियुक्त

नई दिल्ली। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बुधवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) का तत्काल प्रभाव से पुनर्गठन कर दिया है। सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 की धारा 3(1) तथा सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024 के नियम 3 के अंतर्गत जारी अधिसूचना के अनुसार 18 सदस्यों का नया पैनल गठित किया गया है। इनकी नियुक्ति तीन वर्ष या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, के लिए की गई है।

नए बोर्ड में फिल्म, टेलीविजन, संगीत और थिएटर की प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। इनमें अभिनेत्री प्रीति जिंटा, अभिनेता सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी, रूपाली गांगुली, पल्लवी जोशी, मनोज जोशी, प्रोसेनजित चटर्जी और निशिगंधा वाड प्रमुख हैं। फिल्म निर्माता-निर्देशक प्रियदर्शन, अभिषेक जैन और नीला माधव पांडा, ग्रैमी विजेता संगीतकार रिकी केज, गायक हंसराज हंस, निर्माता सुप्रिया यार्लगाड्डा, लेखक-कवि यतींद्र मिश्रा, थिएटर व्यक्तित्व वामन केंद्र तथा विनोद अनुपम और रमेश पतंगे भी सदस्य बनाए गए हैं।

पूर्ण सूची (सही नामों के साथ)

  1. विनोद अनुपम
  2. मनोज जोशी
  3. अभिषेक जैन
  4. रिकी केज
  5. प्रियदर्शन
  6. सुनील शेट्टी
  7. हंसराज हंस
  8. सुप्रिया यार्लगाड्डा
  9. यतींद्र मिश्रा
  10. रूपाली गांगुली
  11. प्रीति जिंटा
  12. नीला माधव पांडा
  13. पंकज त्रिपाठी
  14. प्रोसेनजित चटर्जी
  15. पल्लवी जोशी
  16. निशिगंधा वाड
  17. वामन केंद्र
  18. रमेश पतंगे

नए पैनल में पांच महिला सदस्य हैं। कुछ रिपोर्टों में चेयरपर्सन के रूप में शशि शेखर वेंपति का उल्लेख है, जबकि आधिकारिक अधिसूचना में मुख्य रूप से सदस्यों की सूची दी गई है।

कानूनी पहलू स्पष्ट

सीबीएफसी का गठन और पुनर्गठन सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 की धारा 3 के अंतर्गत होता है। धारा 3(1) केंद्र सरकार को बोर्ड के गठन का अधिकार देती है। 2024 में अधिसूचित सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियमों के नियम 3 के अनुसार सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल निर्धारित होते हैं। बोर्ड का कार्यकाल सामान्यतः तीन वर्ष का होता है। पिछला औपचारिक पुनर्गठन 2017 में हुआ था और कई सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो चुका था, इसलिए यह पुनर्गठन लंबित था।

कानूनी रूप से बोर्ड की शक्तियां, कर्तव्य और फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया अपरिवर्तित रहती हैं। सीबीएफसी फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणपत्र जारी करता है और उसके सदस्यों को फिल्मों की जांच, कट्स सुझाने तथा विभिन्न प्रमाणपत्र (यू, यू/ए, ए, एस) देने का अधिकार होता है। नया गठन केवल सदस्यों के स्तर पर परिवर्तन लाता है; वैधानिक ढांचा वही रहता है। यह कदम फिल्म प्रमाणन को लेकर समय-समय पर उठने वाले विवादों के बीच आया है। बोर्ड के कार्य में पारदर्शिता और उद्योग प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में इसे सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

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