US-Iran tensions: वाशिंगटन/रियाद, ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) की सुविधाओं पर किए गए ड्रोन हमलों ने अमेरिकी खुफिया समुदाय को हिला दिया है। रॉयटर्स की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों की सटीकता और प्रभावशीलता ने अमेरिकी विश्लेषकों को रूस की संभावित भूमिका की जांच करने पर मजबूर कर दिया है। चार अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से पता चला है कि मार्च 2026 में कम से कम दो सीआईए साइटों को निशाना बनाया गया – एक सऊदी अरब के रियाद में अमेरिकी दूतावास स्थित सीआईए स्टेशन और दूसरा पूर्वी इराक में। कुछ स्रोतों ने अतिरिक्त साइटों के हमलों की भी पुष्टि की, हालांकि विस्तृत जानकारी गोपनीय रखी गई है। इन हमलों में कोई मौत या घायल नहीं हुआ, लेकिन रूसी-संवर्धित शाहेद ड्रोन के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है।
रूस की संभावित सहायता: टारगेटिंग और तकनीक
अमेरिकी विश्लेषक रूस द्वारा प्रदान की गई टारगेटिंग जानकारी या उन्नत ड्रोन प्रौद्योगिकी की जांच कर रहे हैं। एक पश्चिमी खुफिया एजेंसी के आंतरिक मेमो में रूस की संभावित भूमिका का जिक्र है। दो पश्चिमी अधिकारियों ने बताया कि रियाद हमले में दो रूसी-संवर्धित शाहेद ड्रोन इस्तेमाल किए गए – एक ने दूतावास की बाहरी दीवार में छेद किया और दूसरे ने उसमें प्रवेश कर विस्फोट किया। रूस ने ईरान को शाहेद-136 ड्रोन की सटीकता बढ़ाने के लिए कोमेता-एम सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम प्रदान किया है, जो ईरानी सिस्टम से कहीं बेहतर और जाम-प्रतिरोधी माना जाता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने मार्च में इसकी रिपोर्ट दी थी, जिसे क्रेमलिन ने “फेक न्यूज” करार दिया था।
पृष्ठभूमि:
यह घटनाक्रम फरवरी-मार्च 2026 के दौरान अमेरिका-इजराइल अभियान के बाद ईरान के जवाबी हमलों का हिस्सा है। वॉशिंगटन पोस्ट, न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों, युद्धपोतों और विमानों की लोकेशन संबंधी इंटेलिजेंस साझा की थी। इससे ईरानी हमले पहले से अधिक सटीक बने। जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और ओमान में अमेरिकी ठिकानों पर हमले इसी सहयोग का नतीजा माने जा रहे हैं। सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने मार्च में कांग्रेस सुनवाई में पुष्टि की कि ईरान रूस और चीन से इंटेलिजेंस सहायता मांग रहा है। रूस ने इन आरोपों से इनकार किया है, लेकिन अमेरिकी अधिकारी इसे दोनों देशों के रणनीतिक साझेदारी का विस्तार मानते हैं।
विशेषज्ञों की राय
पूर्व सीआईए स्टेशन चीफ डेनियल हॉफमैन ने कहा, “मॉस्को और तेहरान दोनों अमेरिकी प्रभाव को कम करने में रुचि रखते हैं।” विश्लेषकों का मानना है कि सीआईए जैसी संवेदनशील साइटों को निशाना बनाना रूस की बढ़ती आक्रामकता को दर्शाता है। अमेरिकी प्रशासन ने टिप्पणी से इनकार कर दिया है, जबकि ईरान, रूस और सऊदी अरब ने अनुरोध पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
क्षेत्रीय प्रभाव और आगे की चुनौतियां
ये हमले खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रहे हैं। अमेरिका ईरान युद्ध को समाप्त करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन रूस-ईरान साझेदारी इसे जटिल बना रही है। ड्रोन हमलों की बढ़ती सटीकता अमेरिकी खुफिया और सैन्य ठिकानों के लिए नई चुनौती पेश कर रही है। स्थिति तेजी से बदल रही है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अभी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं, लेकिन जांच जारी है।

