‘Dada’ biopic: राजकुमार राव दूसरों की जिंदगी जीकर चमक रहे हैं, ‘दादा’ में सौरव गांगुली का किरदार आठवीं बार असली जीवन को स्क्रीन पर उतारेंगे

‘Dada’ biopic: बॉलीवुड में बायोपिक फिल्मों का ट्रेंड पिछले एक दशक से जोरों पर है और इस सूची में राजकुमार राव का नाम अब ‘गो-टू’ एक्टर बन चुका है। विक्रमादित्य मोटवाने की फिल्म दादा – द सौरव गांगुली स्टोरी में पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली का रोल निभाते हुए राजकुमार राव आठवीं बार किसी असली शख्सियत की जिंदगी को पर्दे पर जीने जा रहे हैं। फिल्म का पहला लुक हाल ही में गांगुली के जन्मदिन (8 जुलाई) पर जारी किया गया, जिसमें राजकुमार राव लॉर्ड्स बालकनी पर शर्टलेस पोज में नजर आए—गांगुली के आइकॉनिक नेटवेस्ट ट्रॉफी जश्न का वो पल जो भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल गया। फिल्म 14 मई 2027 को थिएटरों में रिलीज होने वाली है, जो ईद के वीकेंड पर आएगी। प्रोड्यूसर्स लव रंजन और अंकुर गर्ग (लव फिल्म्स) के बैनर तले बनी इस फिल्म में तन्या मानिकतला भी मुख्य भूमिका में हैं। सौरव गांगुली ने खुद इस पोस्टर को अपना “बेस्ट बर्थडे गिफ्ट” बताया और राजकुमार राव की तारीफ की।

राजकुमार राव की बायोपिक जर्नी: 2012 से अब तक

राजकुमार राव की बायोपिक फिल्मों की शुरुआत 2012 में चित्तागोंग से हुई, जहां उन्होंने लोकनाथ बाल का रोल निभाया 1930 के चित्तागोंग आर्मरी रेड में सूर्य सेन के साथी स्वतंत्रता सेनानी। उसी साल हंसल मेहता की शाहिद में शाहिद आजमी का किरदार उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिला गया। मात्र 27 साल की उम्र में उन्होंने इस ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट और वकील की जिंदगी को इतनी गहराई से उतारा कि दर्शक भूल गए कि वे एक्टर देख रहे हैं।

इसके बाद उनके बायोपिक रोल्स की लिस्ट काफी प्रभावशाली है:

अलीगढ़ (2015): पत्रकार दीपू सेबेस्टियन (मुख्य किरदार नहीं, लेकिन फिल्म का जान).
बोस: डेड/अलाइव (2017): नेताजी सुभाष चंद्र बोस (वेब सीरीज).
ओमेर्टा (2018): अहमद उमर सईद शेख—एक चुनौतीपूर्ण नेगेटिव रोल जिसमें उन्होंने आतंकवादी की ठंडी और डरावनी व्यक्तित्व को बखूबी उतारा।
श्रीकांत (2024): विजुअली इम्पेयर्ड उद्योगपति श्रीकांत बोल्ला—शरीर की भाषा और एक्सप्रेशन्स में मास्टरक्लास परफॉर्मेंस।
अभी अगली फिल्म प्रहार – द उज्जवल निकम स्टोरी 7 अगस्त 2026 को रिलीज होने वाली है, जिसमें वे स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर उज्जवल निकम का रोल निभा रहे हैं (1993 मुंबई ब्लास्ट, कसाब ट्रायल आदि केस)। दादा उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक साबित हो सकती है, क्योंकि सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स उनके लुक को लेकर मिक्स्ड रिएक्शन्स दे रहे हैं, हालांकि गांगुली खुद खुश हैं।

क्यों सफल होते हैं राजकुमार राव के बायोपिक रोल्स?

राजकुमार राव की ताकत उनके अंडरस्टेटेड एक्टिंग स्टाइल में है। वे शारीरिक समानता से ज्यादा किरदार की भावनाओं, संघर्ष और essence को कैप्चर करते हैं। चाहे शाहिद आजमी की resilience हो या श्रीकांत बोल्ला की मेहनत—वे रिसर्च पर जोर देते हैं और स्क्रीन पर किरदार को जिंदा कर देते हैं। दादा में भारतीय क्रिकेट की ‘अग्रेसिव’ और ‘फियरलेस’ संस्कृति को बदलने वाले गांगुली की लीडरशिप, कोलकाता के प्रिंस की कहानी और टीम इंडिया को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का सफर दिखाया जाएगा। फिल्म के डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवाने (उड़ता पंजाब, ट्रैप) जाने जाते हैं गहन कहानियों के लिए। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह फिल्म खास होने वाली है, क्योंकि गांगुली ने न सिर्फ मैच जिताए बल्कि भारतीय क्रिकेट की मेंटैलिटी बदली—फिक्सिंग के दौर में टीम को नई पहचान दी। राजकुमार राव जैसे अभिनेता बायोपिक्स को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को दर्पण दिखाने का माध्यम बनाते हैं। दादा का इंतजार अब बढ़ गया है—क्या राजकुमार राव ‘दादा’ की स्पिरिट को हिट कर पाएंगे? समय बताएगा, लेकिन ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो उम्मीदें ऊंची हैं।

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