राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना अब अपने 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है। आंदोलन को अब तक की सबसे बड़ी ताकत तब मिली जब लद्दाख के जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक 28 जून को इसमें शामिल होकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। शुक्रवार को उनकी भूख हड़ताल का छठा दिन था, और इस दौरान उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा है।
आंदोलन की शुरुआत और मांगें
CJP का यह प्रदर्शन 20 जून से जंतर-मंतर पर चल रहा है। संगठन की स्थापना पिछले साल मई में उस विवादित टिप्पणी के बाद हुई थी, जिसमें बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से किए जाने का आरोप लगाया गया था। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके, जो पहले अमेरिका में रह रहे थे, 6 जून को भारत लौटे और जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया। आंदोलन की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बार-बार हो रहे पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की खामियों और इसके चलते कई छात्रों की आत्महत्या के लिए सरकार जवाबदेह नहीं ठहराई जा रही।
वांगचुक की भूख हड़ताल और बिगड़ता स्वास्थ्य
सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल शुरू करने से पहले महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट का दौरा किया था। उन्होंने कहा था कि वे यह उपवास खुशी से नहीं, बल्कि मजबूरी में कर रहे हैं, और जरूरत पड़ने पर जान गंवाने को भी तैयार हैं। पार्टी की ओर से साझा किए गए मेडिकल अपडेट के मुताबिक, हड़ताल शुरू होने के बाद से उनका करीब दो किलोग्राम वजन घट चुका है, जबकि उनका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लगातार गिर रहा है। डॉक्टरों की एक टीम मौके पर उनकी सेहत की नियमित निगरानी कर रही है। वांगचुक ने बताया है कि वे केवल नमक और पानी पर हैं। अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वांगचुक की तबीयत को लेकर कुछ भी अनहोनी होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।
छात्रों की तबीयत भी बिगड़ी
वांगचुक अकेले भूख हड़ताल पर नहीं हैं। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) से जुड़े छह छात्र भी अलग मंच से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं। इनमें जेएनयूएसयू के एक पदाधिकारी का ब्लड शुगर स्तर खतरनाक रूप से नीचे जाने की खबर है, वहीं एक अन्य छात्र की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। आइसा ने डॉक्टरों के हवाले से चेतावनी दी है कि उपवास जारी रहने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
समर्थन और राजनीतिक हलचल
आंदोलन को छात्र संगठनों के अलावा किसान संगठनों और कई खाप पंचायतों का भी समर्थन मिल रहा है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष तथा सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अंजलि भारद्वाज ने धरना स्थल पहुंचकर एकजुटता जताई। संगठन ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी ‘प्रधान गो बैक’ अभियान भी शुरू किया है।
सुरक्षा व्यवस्था और आरोप-प्रत्यारोप
धरना स्थल पर दिल्ली पुलिस की भारी तैनाती है — प्रदर्शनकारियों की संख्या के लगभग बराबर पुलिसकर्मी मौजूद रहते हैं। जंतर-मंतर में प्रवेश से पहले सुरक्षा जांच अनिवार्य है, बैग स्कैन कर उन पर पहचान के लिए गुलाबी स्टीकर चस्पा किया जाता है। CJP ने आरोप लगाया है कि पुलिस कई समर्थकों और संगठन के कोर सदस्यों को धरना स्थल तक पहुंचने से रोक रही है, हालांकि दिल्ली पुलिस या प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हाल के दिनों में पुलिस पर छात्रों से मारपीट के आरोप भी लगे हैं।
धरना स्थल का माहौल
जंतर-मंतर पर मंच के सामने युवा हाथों में तिरंगा और डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें लिए दिखते हैं। कई युवा देशभक्ति गीतों पर नारेबाजी और प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कुछ बुजुर्ग शांति से बैठकर समर्थन दे रहे हैं। स्वयंसेवकों ने अस्थायी प्याऊ लगाकर लोगों को पानी उपलब्ध कराया है। दीपके बीच-बीच में मंच पर आकर कार्यकर्ताओं से आगे की रणनीति पर चर्चा करते हैं, जबकि वांगचुक लगातार मंच पर डटे हुए हैं। फिलहाल सरकार की ओर से मांगों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, जबकि आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, धरना जारी रहेगा।

