भारत-जापान: मोदी-ताकाइची वार्ता के बाद एआई, धातु और ऊर्जा क्षेत्र में अहम समझौतों पर हस्ताक्षर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच गुरुवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने कृत्रिम मेधा (एआई), धातु, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक साझा रोडमैप तैयार करने पर भी सहमति जताई। तीन दिवसीय भारत यात्रा पर आईं ताकाइची इस दौरे में दोनों देशों के बीच 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रही हैं। बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जापान की उच्च तकनीक और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमताओं का मेल वैश्विक एआई विकास को नई गति और मज़बूती देगा। हैदराबाद हाउस में हुई साझा प्रेस वार्ता में जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची ने कहा कि अशांत वैश्विक परिदृश्य के बीच आपसी सहयोग वाला रिश्ता बनाना पहले से कहीं अधिक ज़रूरी हो गया है, और दोनों देश एक-दूसरे की ताक़तों का लाभ उठाकर मिलकर समृद्धि की राह पर आगे बढ़ेंगे।

रक्षा क्षेत्र में पहली संयुक्त परियोजना

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि क्वाड समूह के सदस्य देशों में शामिल भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में अपनी पहली संयुक्त विकास परियोजना पर भी समझौता किया है। गौरतलब है कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी इस समूह के सदस्य हैं, जिसे व्यापक रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के मक़सद से बना गठजोड़ माना जाता है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों नेताओं के बीच व्यापार-निवेश, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा, नई तकनीकों, रक्षा और जन-जन संपर्क सहित सभी अहम मुद्दों पर व्यापक बातचीत हुई, और इसी क्रम में आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा-लचीलापन और एआई पर तीन “ऐतिहासिक” दस्तावेज़ों को अंगीकार किया गया।

बायोगैस पहल और निवेश की रफ़्तार

मोदी ने भारत-जापान बायोगैस पहल का भी उल्लेख किया, जिसके तहत देश में 1,000 बायोगैस व जैविक खाद संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। यह यात्रा पिछले साल मोदी के टोक्यो दौरे के बाद हो रही है, जब जापान ने अगले एक दशक में भारत में अपने निवेश को दोगुने से भी अधिक बढ़ाकर 61 अरब डॉलर से ऊपर ले जाने का वादा किया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि अप्रैल-दिसंबर 2025 के बीच जापानी निवेश 3.2 अरब डॉलर रहा। जापान लंबे समय से भारत के सबसे बड़े निवेशकों में शामिल रहा है और मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का समर्थन करता रहा है। हाल ही में जापानी कंपनियों ने येस बैंक में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए 1.6 अरब डॉलर का सौदा भी किया है। ताकाइची अपने साथ एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल लेकर आई हैं और गुरुवार को ही एक व्यापारिक सम्मेलन को भी संबोधित करने वाली हैं।

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