जनपद गौतमबुद्ध नगर में स्विमिंग पूलों की सुरक्षा को लेकर जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने कड़ा रुख अपनाया है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाली नोएडा और ग्रेटर नोएडा की 20 से अधिक प्रमुख सोसायटियों तथा प्रतिष्ठित स्कूलों की स्विमिंग पूल संचालन एनओसी (NOC) रोक दी गई है। इनमें लाइफगार्ड्स की कमी, फायर एनओसी का अभाव, सीसीटीवी कैमरों की अनुपस्थिति और अन्य जरूरी दस्तावेजों की कमी पाई गई है।जिला खेल विभाग के प्रभारी अधिकारी डॉ. परवेज अली के अनुसार, पिछले एक माह में करीब 20 सोसायटियों और स्कूलों ने स्विमिंग पूल संचालन के लिए आवेदन किया था। सूक्ष्म जांच में अधिकांश फाइलें अधूरी और पुराने ढर्रे की पाई गईं। सबसे बड़ी लापरवाही पुरुष व महिला लाइफगार्ड्स की तैनाती न करने की मिली। कई जगहों पर बिना वैध एनओसी के ही पूल चलाए जा रहे थे, जिससे जान-माल का खतरा बढ़ गया था।
कौन-कौन सी संस्थाएं शामिल?
कार्रवाई की जद में आई प्रमुख सोसायटियों में नोएडा की सेठी मैक्स, लोटस बुलेवार्ड, आदित्य अर्बन कासा, पारस टिएरा (सेक्टर-137), होम्स-121, विड सोर ग्रीन, अंतरिक्ष गोल्फ व्यू, अंतरिक्ष ग्रीन, लोटस पांचे, पार्श्वनाथ रेजीडेंसी और ग्रह प्रवेश शामिल हैं। ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की साया जिओन, ओमेक्स ट्विन टावर, गौड़ सिटी-1 (चौथा एवेन्यू), अरिहंत आर्डन, लोटस जिंग, एटीएस हैप्पी ट्रेल्स, कृष्ण सरकारी आवास समिति और पावर ऑफिसर्स सरकारी आवास समिति भी सूची में हैं। स्कूलों में सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल, हिल वुड एकेडमी और डीपीएस (केपी-5) जैसी संस्थाओं की फाइलें भी खामियों के कारण लंबित हैं।
विभाग की चेतावनी और आगे की कार्रवाई
डीएम मेधा रूपम के निर्देशन में खेल विभाग ने सभी प्रभावित संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दस्तावेज तुरंत पूरा करने का निर्देश दिया है। अगर मानक पूरे नहीं किए गए तो पूलों को सील करने की सख्त कार्रवाई की जाएगी। डॉ. परवेज अली ने स्पष्ट किया कि बिना सुरक्षा मानकों के स्विमिंग पूल संचालन पूरी तरह अवैध है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में 300 से अधिक स्विमिंग पूल और 50 से अधिक जिमों को वैध एनओसी दी जा चुकी है, लेकिन लापरवाही बरतने वालों पर कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।
पृष्ठभूमि
यह कार्रवाई हाल के वर्षों में स्विमिंग पूल दुर्घटनाओं और सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर की गई है। पहले भी प्रशासन ने बिना पंजीकरण और एनओसी वाले पूलों व अकादमियों पर नजर रखने और कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। महिला और पुरुष दोनों लाइफगार्ड्स की अनिवार्यता जैसे नए नियम भी लागू किए गए हैं, जो इस बार की जांच का आधार बने। डीएम मेधा रूपम, जो अपनी सख्त और जन-हितैषी कार्रवाइयों के लिए जानी जाती हैं, ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। स्थानीय निवासियों ने इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि गर्मियों के मौसम में बच्चों और परिवारों द्वारा स्विमिंग पूलों का इस्तेमाल बढ़ जाता है। प्रभावित सोसायटियों और स्कूलों को 7-10 दिनों के अंदर कमियां दूर करने का समय दिया गया है। विभाग आगे भी नियमित जांच अभियान चलाएगा। यह खबर नागरिकों के लिए एक चेतावनी भी है कि वे केवल वैध एनओसी वाले पूलों का ही इस्तेमाल करें और सुरक्षा मानकों पर ध्यान दें। प्रशासन का फोकस जन सुरक्षा को मजबूत करने पर है।
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