Noida News: शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान हासिल करना या डिग्री लेकर एक अदद नौकरी पाना नहीं, बल्कि समाज और देश को बदलने की क्षमता विकसित करना है। इसी बड़े बदलाव और अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखते हुए नोएडा के सेक्टर 128 स्थित जेपी विशटाउन (JP Wish Town) में ‘प्रोमेथियस स्कूल’ (Prometheus School) की स्थापना की गई है।
इस स्कूल के फाउंडर और जाने-माने शिक्षाविद् मुकेश शर्मा से ‘जय हिंद जनाब’ के वरिष्ठ संवाददाता मोहम्मद इमरान ने खास बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने स्कूल की स्थापना के पीछे की प्रेरणा, इसकी अनूठी शिक्षण शैली और यह स्कूल दूसरे पारंपरिक स्कूलों से कैसे अलग है, इस पर विस्तार से चर्चा की।


स्थापना की कहानी: एक बड़े सपने की शुरुआत
मुकेश शर्मा ने बताया कि प्रोमेथियस स्कूल की स्थापना के पीछे उनका एक बड़ा सपना था—एक ऐसा शिक्षण संस्थान बनाना जो वैश्विक स्तर का हो, जहां बच्चे सिर्फ रट्टा मारकर पास न हों, बल्कि उनके भीतर की रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता (Leadership) को बाहर लाया जा सके। जेपी विशटाउन के शांत और आधुनिक परिसर में स्थित यह स्कूल आज दिल्ली-एनसीआर के सबसे प्रमुख आईबी (International Baccalaureate) स्कूलों में गिना जाता है, जो बच्चों के समग्र विकास (Holistic Development) पर केंद्रित है।
‘नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें बच्चे’
साक्षात्कार के दौरान फाउंडर मुकेश शर्मा ने देश की अर्थव्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण विज़न साझा किया। उन्होंने कहा:
“अभी तक हमारे समाज में यह परंपरा रही है कि बच्चे स्कूल में अच्छे नंबर लाएं, ग्रेजुएशन करें और फिर एक अच्छी नौकरी ढूंढ लें। लेकिन अब ज़माना बदल रहा है। मेरा सपना है कि इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि ‘नौकरी देने वाले’ (Entrepreneurs) बनें।”
उन्होंने आगे जोड़ा कि यदि देश के युवा नौकरी देने वाले बनेंगे, तो इससे न केवल उनका खुद का विकास होगा, बल्कि देश में बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा होंगे, जो भारत की अर्थव्यवस्था को काफी तेज़ी से आगे बढ़ाएगा। स्कूल में बच्चों को शुरुआत से ही बिजनेस माइंडसेट और उद्योगपति बनने की दिशा में अग्रसर किया जाता है।
दूसरे स्कूलों से क्यों अलग है ‘प्रोमेथियस स्कूल’?
आमतौर पर पैरेंट्स के मन में यह सवाल होता है कि वे अपने बच्चे को इसी स्कूल में क्यों भेजें? इस पर मुकेश शर्मा ने स्कूल के माहौल और उसकी खासियतों को सामने रखा:
- सवालों का स्वागत, डांट की जगह शाबाशी: पारंपरिक स्कूलों में अक्सर देखा जाता है कि बच्चे द्वारा बार-बार सवाल पूछने पर टीचर्स उन्हें डांटकर बैठा देते हैं। लेकिन प्रोमेथियस स्कूल में इसके बिल्कुल उलट माहौल है। यहाँ बच्चे के मन में आने वाले हर सवाल का टीचर्स विस्तार से जवाब देते हैं। बार-बार सवाल पूछने पर बच्चे को डांटने के बजाय उसकी पीठ थपथपाई जाती है ताकि उसका हौसला बढ़े।
- जिज्ञासा को बढ़ावा: स्कूल का मुख्य उद्देश्य यह है कि बच्चा अपने मन में कोई भी सवाल न रखे। वह अपने टीचर्स और आस-पास के लोगों से लगातार संवाद करे। जब बच्चा सवाल पूछेगा, तभी वह जीवन में हर समस्या का समाधान तलाशने के काबिल बनेगा और कामयाबी हासिल करेगा।
- ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल लर्निंग: स्कूल अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट क्लासरूम, स्पोर्ट्स फैसिलिटीज और रिसर्च लैब्स से लैस है, जो बच्चों को वैश्विक नागरिक (Global Citizens) बनने में मदद करता है।
नोएडा का प्रोमेथियस स्कूल सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि भविष्य के लीडर्स, इनोवेटर्स और एंटरप्रेन्योर्स तैयार करने की एक नर्सरी बन रहा है। मुकेश शर्मा का यह विज़न कि शिक्षा को सीधे देश की आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाए, आज के समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है। यही वजह है कि यह स्कूल आज पैरेंट्स की पहली पसंद बनता जा रहा है।

