महर्षि आश्रम ट्रस्ट की बेशकीमती जमीन से जुड़े कथित भू-घोटाले में नोएडा प्राधिकरण ने अब सख्त कार्रवाई करते हुए सेक्टर-110 में बने हजारों फ्लैट्स और मकानों को अवैध घोषित कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के शिकंजा कसने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्राधिकरण की यह कार्रवाई सामने आई है, जिसमें बिना मानचित्र स्वीकृति के बने निर्माणों पर ब्रेक लगाने की तैयारी चल रही है। इस घोटाले की जड़ें गहरी बताई जा रही हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, स्पिरिचुअल रिजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SRMF) ट्रस्ट की जमीन पर फर्जी दस्तावेजों, बनावटी रेजोल्यूशन और फेक सीलों के जरिए अवैध बिक्री की गई। आरोप है कि ट्रस्ट की करीब 40 बीघा जमीन को औने-पौने दामों पर बेचा गया, जबकि सर्किल रेट के हिसाब से इसकी कीमत 33 करोड़ रुपये से ज्यादा थी। वास्तविक सौदे की कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है, जिससे सरकार को स्टांप ड्यूटी और राजस्व का भारी नुकसान हुआ।
ED और SIT की जांच में बड़े खुलासे
ED ने मई 2026 में इस मामले में छापेमारी की थी और G. Ram Chandra Mohan तथा Akash Malviya समेत अन्य आरोपियों पर PMLA के तहत केस दर्ज किया। इन पर फर्जी अथॉरिटी लेटर्स और दस्तावेजों के जरिए ट्रस्ट की संपत्ति बेचने का आरोप है। नोएडा के गेजा इलाके में 3.36 हेक्टेयर जमीन को मात्र 16 करोड़ रुपये में बेचे जाने का मामला सामने आया, जबकि बाजार मूल्य कहीं ज्यादा था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मल्टी-स्टेट घोटाले पर गंभीरता दिखाते हुए SIT गठित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पेंडिंग मुकदमों के बावजूद फर्जी तरीके से जमीन बेची जा रही है, जो ट्रस्ट के उद्देश्य के खिलाफ है। SIT की जांच में प्राधिकरण अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ रही है। सूत्रो की रिपोर्ट के मुताबिक, सेक्टर-110 में 26,000 अवैध फ्लैट और मकान खड़े कर दिए गए। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों पर रिश्वत लेकर बिना नक्शा स्वीकृत किए निर्माण की अनुमति देने का आरोप है। ED अब आधा दर्जन PCS अधिकारियों समेत दर्जन भर अधिकारियों की आर्थिक कुंडली खंगाल रही है। प्राधिकरण से खसरा नंबरों (700-715 आदि) पर निर्माण अनुमति संबंधी जानकारी मांगी गई है, लेकिन जवाब अब तक नहीं मिला।
अवैध कॉलोनियों का धंधा
जमीन पर 8-10 मंजिला विला और फ्लैट बनाए गए। कालोनाइजर ट्रस्ट से सस्ती दर पर जमीन खरीदकर बाजार में 60-70 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से बेच रहे थे। 30% क्षेत्र रास्तों और सुविधाओं में जाता था, फिर भी भारी मुनाफा कमाया जा रहा था। प्राधिकरण की कथित मिलीभगत से निर्माण रुक नहीं पाया। कई जगह प्लॉटिंग अभी भी जारी है। नोएडा प्राधिकरण ने अब इन अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए हैं और डेवलपर्स को नोटिस थमा दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सख्ती बरती जा रही है और पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी।
प्रभावित खरीदारों की मुश्किलें
इस घोटाले में हजारों आम खरीदारों का पैसा फंस गया है। कई लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई लगाकर फ्लैट बुक किए, लेकिन अब वे अवैध घोषित हो गए हैं। रेरा, रजिस्ट्री स्टेटस और लीगल डॉक्यूमेंट्स की जांच न करने की सलाह दी जा रही है। यह मामला नोएडा-ग्रेटर नोएडा के अन्य बड़े भूमि घोटालों (जैसे मोती गोयल) की कड़ी लग रहा है। ED, SIT और प्राधिकरण की जांच जारी है। आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। ट्रस्ट की जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। महर्षि महेश योगी से जुड़े इस आश्रम की संपत्ति को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी है। आमजन को सलाह है कि ऐसी संदिग्ध परियोजनाओं में निवेश से पहले पूरी जांच कराएं।
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