न्यू नोएडा की नींव रखने की तैयारी — 80 गांवों की जमीन का GIS मैपिंग शुरू, दादरी से खुर्जा तक बसेगा नया शहर

नोएडा। दादरी से खुर्जा के बीच बसने वाले देश के सबसे महत्वाकांक्षी शहरी प्रोजेक्ट — दादरी-नोएडा-गाजियाबाद इन्वेस्टमेंट रीजन यानी न्यू नोएडा — की जमीनी तैयारी अब तेज हो गई है। नोएडा प्राधिकरण ने इस प्रस्तावित क्षेत्र के 80 गांवों का विस्तृत जीआईएस (Geographic Information System) आधारित डाटा जुटाने का काम शुरू कर दिया है। इसके लिए बुलंदशहर प्राधिकरण, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से जरूरी तकनीकी जानकारी मांगी गई है।

क्या है न्यू नोएडा — जानिए इस महाप्रोजेक्ट की पूरी कहानी

न्यू नोएडा उत्तर प्रदेश सरकार का एक दूरदर्शी औद्योगिक और शहरी विकास प्रोजेक्ट है। दादरी से खुर्जा के बीच करीब 80 गांवों की जमीन पर यह नया शहर विकसित किया जाना है। इसका उद्देश्य है —

  • नोएडा और ग्रेटर नोएडा पर बढ़ते दबाव को कम करना
  • नए औद्योगिक और आवासीय क्षेत्र विकसित करना
  • निवेशकों को आकर्षित कर रोजगार के नए अवसर पैदा करना
  • दिल्ली-NCR क्षेत्र में नियोजित शहरी विस्तार सुनिश्चित करना

यह प्रोजेक्ट गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर जिले की सीमाओं को जोड़ते हुए एक नए आधुनिक शहर की शक्ल लेगा।

GIS तकनीक से होगा सर्वे — प्रकृति और बुनियादी ढांचे का होगा डिजिटल नक्शा

नोएडा प्राधिकरण ने जो डाटा मांगा है वह अत्याधुनिक जीआईएस तकनीक पर आधारित होगा। इसमें शामिल होंगे —

प्राकृतिक संरचनाएं —

  • नदियां और नहरें
  • तालाब और जल निकाय
  • सिंचाई के स्रोत

आधारभूत संरचनाएं —

  • आंतरिक और मुख्य सड़कें
  • राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग
  • यातायात नेटवर्क की मौजूदा स्थिति

इस सारे डाटा के विश्लेषण के बाद पूरे क्षेत्र का एक विस्तृत और डिजिटल GIS मास्टर मैप तैयार किया जाएगा।

GIS मैप से तय होगा — कहां बनेगा क्या

यह GIS मैप न्यू नोएडा के विकास की दिशा और दशा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा। इसके आधार पर निम्न निर्णय लिए जाएंगे

आवासीय क्षेत्र — किन गांवों की जमीन पर रिहायशी कॉलोनियां और अपार्टमेंट बनाए जाएंगे

औद्योगिक क्षेत्र — कहां फैक्ट्रियां, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक हब स्थापित किए जाएंगे

संस्थागत क्षेत्र — स्कूल, अस्पताल, विश्वविद्यालय और सरकारी दफ्तरों के लिए जगह का निर्धारण

जल निकायों का संरक्षण — तालाब, नहर और नदियों को कैसे सुरक्षित रखा जाए और उन्हें शहरी ढांचे में कैसे शामिल किया जाए

सड़क नेटवर्क — नए शहर को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और बुलंदशहर से जोड़ने वाली सड़कों और फ्लाईओवर की प्लानिंग

बुलंदशहर प्राधिकरण की भूमिका होगी अहम

चूंकि न्यू नोएडा का बड़ा हिस्सा बुलंदशहर जिले की सीमा में पड़ता है, इसलिए बुलंदशहर विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन से तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है। दोनों प्राधिकरणों के बीच समन्वय इस प्रोजेक्ट की सफलता की कुंजी होगी। जिला प्रशासन से राजस्व रिकॉर्ड, भूमि उपयोग की स्थिति और ग्राम सभा की जमीन का ब्योरा भी मांगा गया है।

किसानों की जमीन — सबसे बड़ी चुनौती

न्यू नोएडा की राह में सबसे बड़ी बाधा 80 गांवों के किसानों की जमीन का अधिग्रहण है। पहले से ही नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। अब न्यू नोएडा के लिए भी किसान संगठन सतर्क हो गए हैं। मांग है कि

  • उचित मुआवजा — बाजार भाव से अधिक दर पर जमीन का मूल्य मिले
  • रोजगार की गारंटी — प्रभावित परिवारों को नए शहर में नौकरी मिले
  • पुनर्वास नीति — विस्थापित होने वाले परिवारों के लिए स्पष्ट पुनर्वास योजना बने

आगे की राह — कब तक तैयार होगा न्यू नोएडा

GIS डाटा संग्रह के बाद विश्लेषण और मैपिंग में कई महीने लगेंगे। उसके बाद मास्टर प्लान तैयार होगा, जनसुनवाई होगी और फिर अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सब कुछ सुचारु रूप से चला तो अगले दो से तीन साल में न्यू नोएडा की बुनियादी आधारभूत संरचना का काम शुरू हो सकता है।

सपनों का शहर या जमीनी हकीकत?

न्यू नोएडा की परिकल्पना भव्य है और जरूरत भी है। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसानों के हितों की रक्षा कितनी होती है, पर्यावरण का संरक्षण किस हद तक सुनिश्चित होता है और भ्रष्टाचार मुक्त नियोजन कितना संभव हो पाता है। GIS मैपिंग एक सकारात्मक और वैज्ञानिक शुरुआत है — अब देखना यह है कि यह सपना जमीन पर कब और कैसे उतरता है।

 

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