टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स पर बड़ा साइबर हमला, हैकरों ने एपल और टेस्ला के गोपनीय दस्तावेज़ डार्क वेब पर लीक करने का दावा किया

भारत की प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स एक बड़े साइबर हमले की चपेट में आ गई है। कंपनी ने सोमवार को पुष्टि की कि उसे हाल ही में अपने सिस्टम में एक “साइबर सुरक्षा घटना” का पता चला था। यह खुलासा तब हुआ जब साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने रॉयटर्स को बताया कि “World Leaks” नाम के एक रैनसमवेयर गिरोह ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की दो सबसे बड़ी ग्राहक कंपनियों — एपल और टेस्ला — से जुड़े कथित कंपोनेंट डिज़ाइन और स्पेसिफिकेशन दस्तावेज़ डार्क वेब पर सार्वजनिक कर दिए हैं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने रॉयटर्स को दिए एक बयान में कहा, “कुछ हफ्ते पहले, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपने कुछ सिस्टम पर एक साइबर सुरक्षा घटना की पहचान की थी। हमारे प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल तुरंत लागू किए गए, और इस घटना का हमारे कारोबार के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा है, जो पूरी तरह अप्रभावित है।” हालांकि सूत्रों के अनुसार एपल इस उल्लंघन की जांच कर रही है और इसका “पूरा विश्लेषण चल रहा है”, साथ ही टाटा को इस घटना से जुड़ी एक फिरौती की मांग भी मिली है। एपल ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।

2 लाख से ज़्यादा फाइलें, 630 जीबी डेटा लीक

सुरक्षा शोधकर्ताओं के अनुसार, World Leaks की वेबसाइट का दावा है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का डेटा 2 लाख से अधिक फाइलों का है, जिनकी कुल साइज़ 630 गीगाबाइट से ज़्यादा है। साइबरन्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा सटीक रूप से 2,04,341 फाइलों का है, और यह डेटा 12 जून को ही डार्क वेब लीक साइट पर डाला जा चुका था। लीक हुई सामग्री में सिर्फ इंजीनियरिंग दस्तावेज़ ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के पासपोर्ट स्कैन, क्रिप्टोग्राफिक सर्टिफिकेट और की-फाइलें, साल-दर-साल के इवेंट लॉग, फैक्ट्री लाइसेंस और बिजली बिल जैसे संवेदनशील रिकॉर्ड भी शामिल हैं। इसके अलावा “War Room” नाम के फोल्डर और IATF ऑडिट दस्तावेज़, मेंटेनेंस इंजीनियर रिपोर्ट तथा दर्जनों स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर स्प्रेडशीट भी इस डेटा में पाई गई हैं। 

एपल और टेस्ला से जुड़े दस्तावेज़

रिपोर्टों के मुताबिक, लीक फाइलों में एक 52 पेज का दस्तावेज़ शामिल है जिसमें एपल के स्वामित्व चिह्न हैं और जो कथित तौर पर आईफोन सर्किट बोर्ड कंपोनेंट्स के गुणवत्ता निरीक्षण मानकों का विवरण देता है। साथ ही “Hosur” शब्द से जुड़ी 33 फाइलें और फोल्डर भी मिले — यह तमिलनाडु में स्थित टाटा के मुख्य आईफोन असेंबली प्लांट का स्थान है। गौरतलब है कि टाटा फिलहाल भारत में एपल के आईफोन उत्पादन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा संभालती है, बाकी हिस्सा फॉक्सकॉन के पास है।टेस्ला से जुड़े दस्तावेज़ों के बारे में, World Leaks डेटाबेस में एक फोल्डर “NV36 Chargeport Controller – North America” नाम से मिला, जो कथित तौर पर टेस्ला की मॉडल Y एसयूवी के अपग्रेडेड वर्ज़न में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स से जुड़ा है। इसके अलावा 2023 का एक टेस्ला दस्तावेज़ जिसे “ट्रेड सीक्रेट” बताया गया है, उसमें कंपनी के प्रोजेक्ट हाईलैंड से जुड़े कुछ डिज़ाइन दिखाए गए — यह टेस्ला के री-डिज़ाइन्ड मॉडल 3 सेडान का सार्वजनिक रूप से जाना-पहचाना इंटरनल कोडनेम है। टेस्ला ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

साइबर सुरक्षा शोधकर्ता राजहरिया ने फाइलों की एक स्क्रीन-रिकॉर्डिंग भी साझा की, जिसमें “Apple” शब्द खोजने पर 181 फाइलें और फोल्डर मिले, जबकि “Tesla” खोजने पर मई 2025 की एक असेंबली डॉक्यूमेंट समेत कई मैन्युफैक्चरिंग स्पेसिफिकेशन फाइलें सामने आईं। इसके अलावा कुछ फाइलों के फुटर में लिखा था कि वे एपल और टेस्ला की गोपनीय व मालिकाना जानकारी हैं।

कौन है World Leaks?

World Leaks, जिसने 2026 में सबसे बड़ा हमला जनवरी में नाइकी पर किया था, की शुरुआत 2025 की शुरुआत में हुई थी और इसे बदनाम Hunters International रैनसमवेयर गिरोह का ही नया रूप माना जाता है। यह गिरोह आमतौर पर सिस्टम को एन्क्रिप्ट करने के बजाय डेटा चुराकर पैसे न मिलने पर उसे सार्वजनिक करने की धमकी देने की रणनीति अपनाता है — जिसे “डबल एक्सटॉर्शन” कहा जाता है।

टाटा के लिए यह पहला हमला नहीं

यह घटना टाटा समूह के लिए नई नहीं है। पिछले साल टाटा की ब्रिटिश सहायक कंपनी जगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर हमले के कारण छह हफ्ते तक उत्पादन ठप रहा था। इसके अलावा टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स पहले से ही अपने एक आईफोन पार्ट्स प्लांट के पास खेतों में संदूषण के आरोपों को लेकर जांच का सामना कर रही है। विश्लेषकों के मुताबिक, यह घटना दिखाती है कि वैश्विक कंपनियां कितनी तेज़ी से बढ़ते और जटिल होते साइबर व रैनसम हमलों के प्रति संवेदनशील हैं। भारत में टाटा एपल के सबसे महत्वपूर्ण विनिर्माण साझेदारों में से एक बनकर उभर रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनाने की मुहिम की एक अहम कड़ी है। ऐसे में यह साइबर हमला भारत की “चाइना-प्लस-वन” रणनीति के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने अभी तक इस मामले पर रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया है। मामले की आधिकारिक जांच जारी है, और अभी यह स्पष्ट नहीं है कि लीक हुए दस्तावेज़ कितने प्रमाणिक हैं।

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