अयोध्या। अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और गबन के मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, छह दिनों की इस शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसके बाद SIT ने इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच करने के लिए राज्य सरकार से अतिरिक्त समय की मांग की है।
ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्र समेत 14 दोषी: सूत्र
जांच की समयावधि बढ़ाने के आग्रह से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई ऐसे रसूखदार लोग दोषी पाए गए हैं, जिन पर मंदिर की अहम जिम्मेदारियां थीं। सूत्रों का दावा है कि SIT ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव और व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित कुल 14 लोगों को इस गबन का दोषी माना है।
150 लोगों के बयान दर्ज, बयानों में अंतर मिलने पर घिरे ट्रस्टी
राज्य सरकार द्वारा गठित इस विशेष जांच दल ने पिछले सोमवार से अपनी तफ्तीश शुरू की थी। SIT ने सबसे पहले महासचिव चंपत राय और व्यवस्थापक गोपाल राव से मंदिर की व्यवस्थाओं और कैश फ्लो की जानकारी ली। इसके बाद नकदी की गणना की गई और मंदिर व्यवस्था से जुड़े लगभग 150 लोगों के लिखित व मौखिक बयान दर्ज किए गए। इसी बीच, गुरुवार को जब ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र चेन्नई से लौटे, तो SIT ने उनके और मुख्य आरोपी रामशंकर यादव टिन्नू के बयानों का मिलान किया। दोनों के बयानों में भारी असमानता और विरोधाभास पाए जाने के बाद, SIT ने लगातार तीन दिनों तक दोनों को आमने-सामने बिठाकर कड़ी पूछताछ की।
इन संदिग्धों के भी दर्ज हुए लिखित बयान
SIT की जांच के दायरे में ट्रस्ट और बैंक से जुड़े कई अन्य लोग भी आए हैं। संदिग्ध पाए जाने पर अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी और सुभाष श्रीवास्तव सहित सभी 14 आरोपियों के लिखित बयान दर्ज कर लिए गए हैं।
दानपात्रों की चाभियां बरामद, सेवादारों को पहले से थी भनक
छह दिनों की सघन जांच में मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि दानपात्रों की मुख्य चाभियां आरोपी रामशंकर यादव टिन्नू के पास ही रहती थीं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मंदिर के कई सेवादारों को इस गबन और हेराफेरी की जानकारी पहले से थी, लेकिन इसे दबाए रखा गया। शनिवार को अपनी प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया पूरी कर SIT के सदस्य लखनऊ लौट चुके हैं। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने यह रिपोर्ट पेश की जाएगी, जिसके बाद माना जा रहा है कि दोषियों के खिलाफ बड़ी और दंडात्मक कार्रवाई का आदेश जारी हो सकता है।

