नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता हो गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है, जिसमें “सभी मोर्चों पर — लेबनान समेत — सैन्य अभियानों की तत्काल और स्थायी समाप्ति” शामिल है। इस डील पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून, शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होंगे।
ट्रंप का एलान — ‘तेल बहने दो!’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर लिखा: “ईरान के इस्लामी गणराज्य के साथ डील पूरी हो गई है। मैं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना किसी शुल्क के खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तत्काल हटाने का पूरा अधिकार देता हूं। दुनिया के जहाज, अपने इंजन चालू करो। तेल बहने दो!”
होर्मुज संकट की पृष्ठभूमि
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिये दुनिया का करीब 25% समुद्री तेल व्यापार और 20% LNG (लिक्विफाइड नैचुरल गैस) गुजरता था। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने जलडमरूमध्य में चेतावनियां जारी कीं, व्यापारिक जहाजों पर हमले किए और समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाईं। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई थी।
तेल बाजार में तत्काल असर
डील की घोषणा के बाद अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत 4.5% से ज्यादा गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई — जो मार्च के पहले हफ्ते के बाद सबसे कम है। ब्रेंट क्रूड में भी करीब 4% की गिरावट आई।
भारत को क्या फायदा?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है और खाड़ी देशों से भारी मात्रा में तेल मंगाता है। होर्मुज के फिर से खुलने से —
- तेल आपूर्ति सामान्य होगी, जिससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा
- माल ढुलाई (Freight) का खर्च घटेगा, जो संकट के दौरान कई गुना बढ़ गया था
- पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद बढ़ेगी
- महंगाई पर लगाम लगने में मदद मिलेगी, क्योंकि परिवहन लागत का असर हर वस्तु की कीमत पर पड़ता है
एशियाई शेयर बाजारों में भी इस डील की खबर से तेजी देखी गई — जापान का निक्केई 225 रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा और हांगकांग व दक्षिण कोरिया के बाजारों में भी उछाल आया।
आगे क्या?
डील के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों की अतिरिक्त बातचीत शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, ईरान ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि जलडमरूमध्य बिना किसी शर्त के हमेशा के लिए खुला रहेगा — यह एक अहम विवादास्पद बिंदु बना हुआ है।

