उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर परिवार और व्यक्तिगत हमलों का मुद्दा गरमाया हुआ है। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई गई अभद्र, भ्रामक और आपत्तिजनक टिप्पणियों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। आजमगढ़ में जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने स्पष्ट कहा कि बेटी-बेटी होती है, उसका सम्मान होना चाहिए और ऐसे अपमानजनक हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने तत्काल पुलिस को FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
सीएम योगी ने कहा, “मैं पिछले दिनों देख रहा था कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री के खिलाफ कुछ लोगों ने गलत टिप्पणियां की थीं। जैसे ही मेरे संज्ञान में आया, मैंने तत्काल पुलिस से कहा कि इसमें FIR दर्ज कराओ। बेटी का सम्मान होना चाहिए। हम तो उस संस्कार में पले हैं जहां कहा जाता है कि गांव की बेटी सबकी बेटी।” उन्होंने अखिलेश यादव को नसीहत भी दी कि दूसरों को उपदेश देने से पहले अपने चेले-चपाटों को समझाएं कि अपनी भाषा पर संयम रखें।
क्या है पूरा मामला?
अदिति यादव (लगभग 23 वर्षीय) के खिलाफ सोशल मीडिया पर फर्जी और मॉर्फ्ड पोस्ट वायरल किए गए, जिसमें दावा किया गया कि वे लंदन में पढ़ाई के दौरान सात करोड़ रुपये लेकर एक मुस्लिम दोस्त (नाइजीरियन) के साथ भाग गई हैं। इन पोस्ट्स में उनकी तस्वीरों का दुरुपयोग भी किया गया। सपा कार्यकर्ताओं ने इसे राजनीतिक साजिश और चरित्र हनन बताया। लखनऊ के हजरतगंज थाने, कानपुर साइबर क्राइम थाने और अन्य जगहों पर शिकायतें दर्ज कराई गईं। कानपुर पुलिस ने तीन आरोपियों—भारत पटेल, नागेश्वर सिंह बघेल और विनोद कुमार यादव के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोपों में महिला की गरिमा भंग करना, फर्जी दस्तावेज तैयार करना और आईटी एक्ट की धाराएं शामिल हैं। सपा ने इन हमलों के पीछे भाजपा की ‘ट्रोल आर्मी’ या टूलकिट को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी कार्यकर्ताओं में आक्रोश है और उन्होंने इसे राजनीति का सबसे निचला स्तर बताया। अखिलेश यादव ने भी परिवार को टारगेट करने की निंदा की। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने भी मामले का संज्ञान लिया और कहा कि अदिति यादव भी देश की बेटी हैं; शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी।
योगी सरकार का संदेश
सीएम योगी के बयान से साफ है कि यूपी सरकार परिवारों, खासकर महिलाओं और बेटियों के सम्मान को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि कोई भेदभाव नहीं किया गया और ऐसे मामलों में तुरंत एक्शन लिया जाता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष अक्सर योगी सरकार पर सांप्रदायिकता और असहिष्णुता के आरोप लगाता है, लेकिन यहां सीएम ने विपक्षी नेता की बेटी के मामले में भी तटस्थ और सख्त रवैया अपनाया। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत हमले बढ़ रहे हैं, जो लोकतंत्र और सभ्य बहस के लिए खतरा हैं। अदिति यादव लखनऊ में परिवार के साथ रहती हैं और उनकी पढ़ाई-लिखाई को लेकर भी अफवाहें फैलाई गईं, जो पूरी तरह बेबुनियाद साबित हुई हैं। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता परिवार तक न पहुंचे। सीएम योगी का संदेश साफ है—संस्कार, संयम और सम्मान जरूरी है। पुलिस जांच जारी है और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद है। सपा-भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है, लेकिन बेटियों के सम्मान का मुद्दा सभी दलों को एकजुट होना चाहिए।

