भारतीय खेल जगत के लिए शुक्रवार का दिन एक गहरे सदमे का दिन बनकर आया। देश के महानतम पिस्टल निशानेबाज, द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता और ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के गुरु जसपाल राणा का मात्र 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने नई दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में अंतिम सांस ली। पूर्व भारतीय शूटर और जाने-माने कोच जसपाल राणा, दिल संबंधी जटिलताओं से जूझने के बाद नई दिल्ली में चल बसे। इस दुखद खबर के साथ ही भारतीय निशानेबाजी का एक गौरवशाली युग समाप्त हो गया।
मैच के बीच छोड़ी पिस्टल, जमीन पर बैठ गईं मनु
देहरादून में चल रहे राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में 25 मीटर एयर पिस्टल प्रतिस्पर्धा के दौरान जब शुक्रवार की सुबह डबल ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर को अपने प्रिय गुरु के निधन की सूचना मिली, तो वह सब कुछ भूल बैठीं। उनके हाथ से पिस्टल छूट गई, वह भावविह्वल होकर वहीं जमीन पर बैठ गईं और मैच अधूरा छोड़ दिया। मनु भाकर ने देहरादून में जहाँ जसपाल राणा का पार्थिव शरीर लाया गया था, वहाँ उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह उस व्यक्ति को खोने के दर्द को सहन नहीं कर पा रही हैं, जिसने उनके खेल करियर के सबसे अहम पड़ावों में उनका साथ दिया था।
पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित करते समय मनु भाकर खुद को संभाल नहीं पाईं और फूट-फूटकर रो पड़ीं। उनके रोने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और पूरे देश की आँखें नम हो गईं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और खेल जगत की कई हस्तियाँ भी इस अवसर पर श्रद्धांजलि देने पहुँचीं।
“मेरी जीत का एक हिस्सा हमेशा उनका रहेगा” — मनु भाकर
मनु भाकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने गुरु के साथ की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा “अपूरणीय क्षति।” उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा: “मुझे अभी भी इस पर विश्वास नहीं हो रहा है। पॉडियम पर मेरा हर पदक, हर सफलता और हर पल हमेशा मुझे उनकी याद दिलाएगा। मेरी जीतों का एक हिस्सा हमेशा उनका रहेगा, क्योंकि उन्होंने मेरे करियर के सबसे कठिन दौर में भी मुझ पर विश्वास करना कभी नहीं छोड़ा।”
फ्लाइट में बिगड़ी तबीयत, फिर नहीं संभले
जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से भारतीय दल के साथ स्वदेश लौटते समय जसपाल राणा की तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उनका हृदय संबंधी उपचार हुआ और उनके दिल में स्टेंट डाला गया था। वे कुछ सुधरते भी दिख रहे थे और उन्हें सामान्य कक्ष में स्थानांतरित कर दिया गया था तथा छुट्टी मिलने की भी उम्मीद थी, लेकिन अचानक एक और हृदयाघात पड़ने से उनका निधन हो गया। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने पुष्टि की कि राणा ने 1 जून को दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती होने के बाद गुरुवार रात को अंतिम सांस ली।
वाराणसी की मणिकर्णिका पर होगी अंत यात्रा
दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का अंतिम संस्कार शनिवार को दोपहर में मोक्षनगरी वाराणसी की पवित्र मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा और उनके पार्थिव शरीर को हवाई मार्ग से वाराणसी लाया जाएगा। वहाँ उनके असंख्य प्रशंसक और खेल जगत के दिग्गज उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए जुटेंगे।
एक खिलाड़ी, एक गुरु — एक युग
जसपाल राणा ने 1994 के हिरोशिमा एशियाई खेलों में मात्र 18 वर्ष की आयु में स्वर्ण पदक जीता था। 2006 के दोहा एशियाई खेलों में उन्होंने तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीते। 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में उन्होंने 590 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। उनके नाम पर राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई प्रतियोगिताओं में पदकों का अंबार लगा था।
खिलाड़ी से कोच की भूमिका में भी उनका कद कम नहीं हुआ। 2012 में राष्ट्रीय कोचिंग व्यवस्था से जुड़ने के बाद उन्होंने जूनियर पिस्टल कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभाली और अगले एक दशक में सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी तैयार किए। फरवरी 2025 में एनआरएआई ने उन्हें 25 मीटर पिस्टल विंग का मुख्य हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। उनके मार्गदर्शन में मनु भाकर ने 2024 पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीतकर इतिहास रचा और वह स्वतंत्र भारत की पहली खिलाड़ी बनीं जिन्होंने एक ही ओलंपिक में दो पदक हासिल किए।
राष्ट्रपति से लेकर अभिनव बिंद्रा तक — शोक की लहर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया। बीजिंग ओलंपिक में भारत को शूटिंग का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक दिलाने वाले अभिनव बिंद्रा ने भी जसपाल राणा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। भारतीय ओलंपिक पदक विजेता गागन नारंग ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर 1994 के एशियाई खेलों में जसपाल राणा की उपलब्धियों को याद किया। राणा के परिवार में उनकी पत्नी रीना राणा, बेटी देवांशी, बेटे युवराज, पिता नारायण सिंह राणा और दो भाई-बहन हैं। जसपाल राणा केवल एक निशानेबाज या कोच नहीं थे वे भारतीय खेल की अदम्य भावना के प्रतीक थे। उनका जाना एक शून्य छोड़ गया है जो शायद कभी नहीं भरेगा। मनु भाकर के आँसू और उनके शब्द “मेरी जीतों का एक हिस्सा हमेशा उनका रहेगा” शायद उस महान गुरु के लिए सबसे सच्ची श्रद्धांजलि है।

