सरकार ने पेट्रोल पंपों पर बल्क ईंधन खरीद पर लगाई रोक, डीजल बिक्री 200 लीटर प्रतिदिन सीमित

मध्य पूर्व में चल रहे संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल की रिटेल बिक्री को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को जारी आदेश में औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं को रिटेल पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगा दी है। साथ ही डीजल की रिटेल बिक्री को प्रति ग्राहक या प्रति वाहन प्रतिदिन 200 लीटर तक सीमित कर दिया गया है। यह व्यवस्था शुरू में 90 दिनों के लिए लागू रहेगी।  सरकार का कहना है कि यह कदम स्थानीय स्तर पर ईंधन की कमी को रोकने, समान वितरण सुनिश्चित करने, डायवर्शन और होर्डिंग को रोकने तथा आम उपभोक्ताओं को उचित दाम पर निर्बाध ईंधन उपलब्ध कराने के लिए उठाया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि ग्राहक खरीदे गए डीजल को पुनर्विक्रय नहीं कर सकेंगे। ईंधन केवल वाहन के टैंक या पेट्रोलियम एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) द्वारा अनुमोदित कंटेनरों में ही दिया जाएगा।

कीमतों के अंतर ने बढ़ाई समस्या

रिटेल पंपों पर डीजल की कीमत दिल्ली में करीब ₹95.20 प्रति लीटर है, जबकि बल्क/औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए यह ₹134.50 प्रति लीटर तक पहुंच जाती है—यानी लगभग ₹39-40 प्रति लीटर का अंतर। इसी मूल्य अंतर के कारण ट्रकिंग कंपनियां, टेलीकॉम टावर संचालक और अन्य बड़े उपभोक्ता रिटेल पंपों की ओर रुख कर गए, जिससे कुछ क्षेत्रों में डीजल की बिक्री में 20-30 प्रतिशत की असामान्य वृद्धि दर्ज की गई। इससे राज्य संचालित तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) को प्रति लीटर डीजल पर करीब ₹36.50 और पेट्रोल पर ₹9 का घाटा हो रहा था।  तीनों प्रमुख राज्य-owned तेल कंपनियां देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में करीब 90 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखती हैं। बल्क खरीदारों के रिटेल पंपों पर निर्भर होने से आम उपभोक्ताओं को पंपों पर लंबी कतारों और स्थानीय कमी का सामना करना पड़ रहा था।

मध्य पूर्व संकट का असर

सरकार के आदेश में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का जिक्र करते हुए कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला, शिपिंग लॉजिस्टिक्स और उत्पाद उपलब्धता को प्रभावित किया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है। हाल के महीनों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी भी हुई है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा है।  पिछले दिनों कुछ राज्यों जैसे केरल में भी स्थानीय स्तर पर पेट्रोल खरीद पर ₹5,000 और डीजल पर 200 लीटर की सीमा लगाई गई थी, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर लागू हो गई है।

आम उपभोक्ताओं पर क्या असर?

व्यक्तिगत वाहन चालक: सामान्य उपभोक्ताओं पर सीधा प्रभाव न्यूनतम होगा। वे अपने वाहन के टैंक भरवा सकेंगे, लेकिन डीजल की खरीद 200 लीटर प्रतिदिन तक सीमित रहेगी।

ट्रकिंग और व्यावसायिक उपयोगकर्ता: उन्हें अब अधिकृत बल्क सप्लाई पॉइंट्स या अपने उपभोक्ता पंपों से ईंधन लेना होगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है, लेकिन रिटेल पंपों पर दबाव कम होगा।

तेल कंपनियां: यह कदम उनकी घाटे की भरपाई और लाभप्रदता में मदद करेगा।

सरकार ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) और रिटेलर्स को निर्देश दिया है कि वे इस आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी उपाय है, जो वैश्विक संकट के दौरान ईंधन प्रबंधन को मजबूत करेगा। यदि स्थिति सामान्य हुई तो इसे पहले भी हटाया जा सकता है। फिलहाल, उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे ईंधन की बर्बादी से बचें और जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें। यह फैसला आम जनता को राहत देते हुए बड़े उपभोक्ताओं के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में सरकार की सक्रियता को दर्शाता है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है और आगे के कदमों की घोषणा समय-समय पर की जाएगी।

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