गौतमबुद्धनगर जिले के जेवर तहसील क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। जेवर तहसील के गांव झुप्पा निवासी एक अनुसूचित जाति (दलित) के किसान ने एक स्थानीय हिस्ट्रीशीटर पर उसकी कृषि भूमि पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है। किसान ने जब इस मामले में न्याय के लिए डीएम गौतमबुद्धनगर मेधा रूपम से शिकायत की, तो उसे इंसाफ मिलने के बजाय स्वयं एसडीएम जेवर दुर्गेश सिंह की धमकियों और अपमानजनक भाषा का सामना करना पड़ा। एसडीएम का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे दलित किसान के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते सुने जा सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
जेवर तहसील क्षेत्र के गांव झुप्पा निवासी अनुसूचित जाति के एक किसान ने हिस्ट्रीशीटर पर कृषि भूमि पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है। पीड़ित किसान के अनुसार, हिस्ट्रीशीटर ने बाहुबल और रसूख के दम पर उसकी जमीन हड़पने की कोशिश की। किसान ने पहले स्थानीय राजस्व अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर वह सीधे डीएम गौतमबुद्धनगर मेधा रूपम के दरबार में पहुंचा। किसान की उम्मीद थी कि जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से उसकी जमीन उसे वापस मिलेगी और दोषी पर कार्रवाई होगी। लेकिन डीएम से शिकायत करना किसान को भारी पड़ गया। सूत्रों के अनुसार, इसके बाद एसडीएम जेवर दुर्गेश सिंह ने किसान को फोन पर या व्यक्तिगत रूप से धमकाया और उसके साथ जाति सूचक व आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। यह पूरी बातचीत रिकॉर्ड हो गई और अब यह ऑडियो वायरल होकर प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा रहा है।
एसडीएम का बयान — “ऑडियो संज्ञान में नहीं”
एसडीएम जेवर दुर्गेश सिंह ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि “यह एआरओ सर्वे का मामला है, मामला मुझसे संबंधित नहीं है और धमकी वाला ऑडियो उनके संज्ञान में नहीं है।” वहीं एआरओ सर्वे अधिकारी चारुल यादव ने कहा कि वे दोपहर 2 बजे तक कलेक्ट्रेट में मौजूद थीं और शिकायतकर्ता उनसे नहीं मिला। उन्होंने मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। एडीएम प्रशासन मंगलेश दुबे ने बताया कि शिकायतकर्ता के अलग-अलग पांच शिकायत पत्र थे और पूर्व में 10 बार मामले को दिखवाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि एआरओ और एसडीएम की शिकायत के संबंध में जांच कराई जाएगी।
नायब तहसीलदार से एसडीएम तक — गौतमबुद्धनगर में ही पूरा करियर
इस पूरे प्रकरण में एसडीएम दुर्गेश सिंह की कार्यशैली और पोस्टिंग इतिहास भी सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार, दुर्गेश सिंह ने नायब तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक का पूरा सफर मुख्यतः गौतमबुद्धनगर जिले में ही तय किया। प्रमोशन के बाद कुछ महीनों के लिए उन्हें पास के एक जनपद में तैनात किया गया, लेकिन जल्द ही वे फिर से गौतमबुद्धनगर में पोस्टिंग हासिल करने में सफल हो गए। यह इलाके में उनकी गहरी पकड़ और प्रभाव को उजागर करता है।
आत्मदाह की चेतावनी — न्याय की आस अब भी बाकी
पीड़ित किसान ने ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा किया है और न्याय न मिलने पर आत्मदाह की चेतावनी दी है। यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि व्यवस्था से निराश एक दलित किसान किस हद तक टूट चुका है। प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब परिणाम शून्य रहा, तो वह डीएम तक पहुंचा और वहां भी उसे न्याय की जगह अपमान मिला।
बड़े सवाल जो उठ रहे हैं
पहला सवाल: एक हिस्ट्रीशीटर को एसडीएम स्तर का संरक्षण क्यों और किस आधार पर मिल रहा है?
दूसरा सवाल: क्या डीएम से शिकायत करना एक दलित किसान का अपराध है, जो उसे एसडीएम की धमकियां झेलनी पड़ें?
तीसरा सवाल: गौतमबुद्धनगर में वर्षों से तैनात रहने वाले एसडीएम के तबादले और जवाबदेही पर प्रशासन कब कार्रवाई करेगा?
सामाजिक संगठनों में रोष, SC/ST एक्ट की मांग
इस वायरल ऑडियो के सामने आने के बाद दलित अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश है। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि एसडीएम दुर्गेश सिंह के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज हो, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए और हिस्ट्रीशीटर की जमीन पर अवैध कब्जे को हटवाया जाए। मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी या विजिलेंस टीम से कराने की भी मांग उठ रही है।
प्रशासन की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल
जब एक पीड़ित दलित किसान अपनी जमीन बचाने के लिए डीएम तक पहुंचता है और उसे एसडीएम की धमकी मिलती है, तो यह महज एक अफसर का दुर्व्यवहार नहीं यह पूरी व्यवस्था की संवेदनहीनता का आईना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “माफिया मुक्त उत्तर प्रदेश” के दावों के बीच जेवर का यह मामला न केवल दलित उत्पीड़न बल्कि प्रशासनिक मिलीभगत की एक गंभीर मिसाल बन चुका है। अब देखना यह होगा कि डीएम मेधा रूपम और शासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं क्या दोषी अधिकारी पर कार्रवाई होगी, या फिर एक बार और एक गरीब दलित की आवाज़ दबा दी जाएगी?

