नोएडा। नोएडा के सेक्टर-104 और सेक्टर-110 के आसपास स्थित महर्षि महेश योगी आश्रम की बेशकीमती जमीन पर वर्षों से चले आ रहे घोटाले ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है। देश की सबसे महंगी और चर्चित रियल एस्टेट बेल्ट में शामिल नोएडा एक बार फिर अरबों रुपये के भूमि घोटाले को लेकर सुर्खियों में है, जहां कथित रूप से वर्षों से अवैध कब्जे, फर्जी दस्तावेजों, अवैध प्लॉटिंग और बहुमंजिला निर्माण का खेल चलता रहा है। अब यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) तक पहुंच चुका है।
घोटाले की जड़: फर्जी कोषाध्यक्ष और जाली दस्तावेजों का खेल
ED की जांच में सामने आया है कि महर्षि आश्रम की ज्यादातर जमीन ‘स्पिरिचुअल रिजनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट’ के नाम पर है। इसी ट्रस्ट का फर्जी कोषाध्यक्ष बनकर रामचंद्र मोहन नाम के एक व्यक्ति ने इस पूरे घोटाले की नींव डाली। उसने वर्ष 2010 में स्वयं को ट्रस्ट का फर्जी कोषाध्यक्ष बताते हुए एक मिलता-जुलता छद्म नाम तैयार किया और फर्जी पैन कार्ड के जरिए बैंक खाते खोले। इस पूरी साजिश में उसका साथ दिया आकाश मालवीय ने, जिसने खुद को ट्रस्ट का कार्यकारी सदस्य बताया। आरोपियों द्वारा मुख्य रूप से जबलपुर, बिलासपुर, रायपुर और नोएडा में स्थित आश्रमों की जमीनों को निशाना बनाया गया और इन शहरों में स्थित कीमती जमीनों को जाली दस्तावेजों के जरिए बेचा गया।
200 बीघा जमीन पर खड़ा हो गया पूरा ‘अवैध शहर’
जांच में यह सामने आया है कि महर्षि आश्रम की करीब 200 बीघा जमीन फर्जी ट्रस्ट बनाकर बेची गई। जिन लोगों ने यह जमीन खरीदी, उन्होंने वहां मकान, दुकान, फ्लैट और विला तक बना लिए। सेक्टर-110 के पास महर्षि आश्रम के आसपास की जमीन पर कॉलोनाइजरों ने कब्जा कर अवैध निर्माण शुरू कर दिया था और देखते ही देखते यहां फ्लैट, विला और दुकानें बन गईं। 39 खसरा नंबरों की जमीन पर यह पूरा अवैध निर्माण किया गया और बाजार में इस जमीन की कीमत करीब 200 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
ED और SIT का दोहरा शिकंजा, सब रजिस्ट्रार से घंटों पूछताछ
एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) अपनी जांच आगे बढ़ा रही है, तो दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने में जुटा है। निबंधन विभाग की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। महर्षि आश्रम से जुड़ी ट्रस्ट की जमीन फर्जी तरीके से बेचने के मामले में ईडी ने नोएडा के सर्किल तीन की उप निबंधक शैली से तीन घंटे पूछताछ कर बयान दर्ज किए। ईडी ने इस मामले में निबंधन विभाग के दो सब-रजिस्ट्रारों को बुलाकर पूछताछ की है और वर्ष 1992 से अब तक की सभी संबंधित रजिस्ट्रियों का विस्तृत ब्यौरा तलब किया है। आरोप है कि रजिस्ट्रेशन विभाग की साठगांठ से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रियां कराई गईं, जिससे भोले-भाले खरीदारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। SIT ने नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को लखनऊ तलब कर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी ली है और निबंधन विभाग तथा जिला प्रशासन से भी पूरे प्रकरण का ब्यौरा मांगा गया है।
प्राधिकरण के अफसर भी जांच के घेरे में
ED के अधिकारी मान रहे हैं कि नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा भूमि घोटाला नहीं हो सकता, इस कारण ED इस मामले में जल्द ही नोएडा प्राधिकरण का रुख कर सकती है। नोएडा प्राधिकरण ने महर्षि महेश योगी आश्रम से सीलिंग कानून का हवाला देकर कब्जे में ली गई जमीन को अन्य संस्थाओं को बेच दिया। आश्रम से जुड़ी संस्थाओं को दी गई 21.57 हेक्टेयर जमीन में से 7 हेक्टेयर भूमि बेच दी गई, जिस पर निर्माण भी हो चुका है। प्राधिकरण द्वारा यह जानकारी फाइलों में दर्ज नहीं की गई, जिससे मामले की गंभीरता बढ़ गई। सबसे बड़ा सवाल नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर उठ रहा है। अवैध निर्माण रोकने के लिए प्राधिकरण ने सिर्फ धारा-10 का नोटिस जारी किया और फिर कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी।
रिकॉर्ड गायब, सवाल हजारों
इस पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग की भूमिका सबसे रहस्यमयी बनी हुई है। विभाग ने साफ किया है कि उनके पास ऐसा कोई दस्तावेज मौजूद नहीं जिससे यह सिद्ध किया जा सके कि नोएडा प्राधिकरण ने वैध तरीके से इस भूमि को अधिग्रहित किया था या उसे उद्योग विभाग को हस्तांतरित किया गया था। सवाल यह भी है कि अगर जमीन ट्रस्ट की थी तो बिल्डरों को कैसे मिली, और अगर प्राधिकरण ने बेची तो किस आधार पर?
क्या चलेगा बुलडोजर? पुराने बैनामे होंगे रद्द?
एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस तरह दिल्ली में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला है, क्या नोएडा में भी वैसी कार्रवाई होगी। जांच पूरी होने के बाद पुराने बैनामे रद्द किए जा सकते हैं। ED के सूत्र बताते हैं कि न केवल छोटे बिल्डरों पर, बल्कि उन प्राधिकरण अफसरों पर भी कार्रवाई होगी जिनके कार्यकाल में यह अवैध निर्माण हुआ। ED ने 15 मई को नोएडा में छापेमारी कर इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था और जांच एजेंसी अब मनी लॉन्ड्रिंग के तारों को उन तक पहुंचाने में जुटी है, जिन्होंने इस पूरे घोटाले से सीधे या परोक्ष रूप से लाभ उठाया। महर्षि आश्रम जमीन घोटाला नोएडा के अब तक के सबसे बड़े भूमि फर्जीवाड़ों में से एक बन चुका है। फर्जी ट्रस्ट से शुरू हुई यह साजिश निबंधन विभाग, नोएडा प्राधिकरण और छोटे-बड़े बिल्डरों की कथित मिलीभगत से एक विशाल अवैध बस्ती में तब्दील हो गई। अब जब ED, SIT और CBI तीनों एजेंसियां एक साथ सक्रिय हैं, तो उम्मीद की जा रही है कि इस घोटाले के असली कर्ताधर्ता जल्द बेनकाब होंगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
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