जांच के नाम पर दबेगा मामला या मिलेगा न्याय? देशभर के श्रद्धालु स्तब्ध
भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर के दानपात्रों में करोड़ों रुपये की कथित चोरी और गबन का एक सनसनीखेज मामला इन दिनों देशभर में तूफान मचाए हुए है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून 2026 को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर यह गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि “समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए यह एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पाई गई है।” इसके बाद से पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई और मामला सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक जा पहुँचा।
विवाद की जड़: सीसीटीवी में कैद हुई चोरी, चार गिरफ्तार
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दानपात्र की धनराशि में हेराफेरी का यह बड़ा और सनसनीखेज मामला मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी के दौरान सामने आया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारी अविनाश शुक्ल से चोरी के 5 लाख रुपये बरामद किए गए और चार संदिग्धों को गिरफ्तार भी किया गया। पुलिस ने गणना कार्य से जुड़े आरोपी अविनाश शुक्ल के बैंक खाते से 5 लाख रुपये की रकम रिकवर करवाकर वापस ट्रस्ट के खाते में जमा करा दी। ज्ञातव्य है कि अयोध्या राम मंदिर परिसर में करीब 50 दानपात्र रखे गए हैं। इन दानपात्रों से रोजाना चंदा निकालकर उसकी गिनती की जाती है और उसे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के खाते में जमा किया जाता है।
पूर्व लेखाधिकारी का बड़ा खुलासा: रोज 5 लाख की चोरी, CCTV फुटेज हुई डिलीट
इस मामले ने तब और गंभीर मोड़ लिया जब ट्रस्ट के पूर्व लेखाजोखा अधिकारी महिपाल सिंह सामने आए। उनके अनुसार रोज़ाना करीब पाँच लाख रुपये की चोरी हो रही थी और यह एक सुनियोजित सिंडिकेट द्वारा नियमित रूप से अंजाम दिया जा रहा था। महिपाल सिंह का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने इस गड़बड़ी को पकड़ा तो उन्हें पद से मुक्त कर दिया गया और संबंधित अवधि के सीसीटीवी फुटेज भी नष्ट कर दिए गए। उनका दावा है कि मंदिर में चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी जैसी बहुमूल्य धातुओं की भी कोई उचित रसीद नहीं काटी जाती थी और न ही कहीं उनकी विधिवत एंट्री होती थी।
PMO की दखल: नृपेंद्र मिश्रा पहुँचे अयोध्या, ऑडिट के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने ट्रस्ट से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य और मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुँचे और ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ घंटों बैठक कर पूरे प्रकरण की तह तक जानकारी हासिल की। नृपेंद्र मिश्रा ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ यह बंद कमरे की बैठक की, जिसने देशभर में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
ट्रस्ट का पक्ष: “सब सुरक्षित, ऑडिट नियमित”
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन को लेकर श्री राम जन्मभूमि न्यास समिति के महासचिव चंपत राय ने सफाई देते हुए मंदिर के ऑडिट का जिक्र किया और किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया। ट्रस्ट के अनुसार चढ़ावे की गिनती बैंक कर्मचारी ट्रस्ट के लोगों की मौजूदगी में करते हैं, यह काम सीसीटीवी की निगरानी में होता है, दान की रकम को रजिस्टर पर चढ़ाया जाता है और फिर उसे मंदिर परिसर में ही बने लॉकर में रख दिया जाता है। चढ़ावे के ऑडिट का पूरा काम टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की निगरानी में किया जाता है।
विपक्ष का हमला: “कसम खाकर बताएं चंपत राय”
समाजवादी पार्टी ने इस प्रकरण को करोड़ों राम भक्तों की पावन आस्था पर एक बड़ा और क्रूर प्रहार बताया है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि मंदिर के चढ़ावे से करीब 7 करोड़ रुपये गायब हुए हैं और उन्होंने न्यायालय से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी तीखा प्रहार करते हुए कहा, “चंदा चोरों गद्दी छोड़ो। चंपत राय जी, क्या आप प्रभु श्रीराम की मूर्ति पर हाथ रखकर सौगंध खा सकते हैं कि चंदा चोरी नहीं हुई?”
BJP का पलटवार: “विपक्ष कर रहा राजनीति”
विपक्ष के इन आरोपों पर BJP ने पलटवार किया और अखिलेश यादव को “निर्लज्ज” करार दिया। हालाँकि BJP से जुड़े एक नेता दिनेंद्र दास ने माना कि उनके विश्वास के अनुसार ट्रस्ट में ऐसी कोई गलती नहीं हुई है, लेकिन संदेह दूर करने के लिए यदि जांच कराई जाती है तो उसका स्वागत है।
जनता की राय: आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
इस विवाद पर आम श्रद्धालुओं में गहरा आक्रोश है। सोशल मीडिया पर लाखों रामभक्त यह माँग कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो। लोगों का कहना है कि यदि राम के घर में ही चोरी हो रही है तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ धोखा है। कई सामाजिक संगठनों ने CBI जांच की माँग उठाई है।
बड़ा सवाल: जांच होगी या मामला दब जाएगा?
अयोध्या पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी बड़ी गिरफ्तारी की खबरें अभी निराधार हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या यह मामला महज एक कर्मचारी स्तर की छोटी चोरी है, या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क काम कर रहा है? PMO की दखल और नृपेंद्र मिश्रा की गुप्त बैठक से संकेत मिलता है कि मामला गंभीर है, लेकिन पारदर्शी जांच के बिना सच्चाई सामने आना मुश्किल है। देश के करोड़ों राम भक्त आज इस सवाल का जवाब चाहते हैं — क्या प्रभु राम के नाम पर एकत्र पुण्य की धनराशि सुरक्षित है?

