जयपुर के रिहायशी इलाके में अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 7 की मौत, कई गंभीर रूप से झुलसे; प्रशासन ने शुरू की जाँच

राजस्थान की राजधानी में दिनदहाड़े हुए इस हादसे ने उठाए अवैध फैक्ट्रियों पर गंभीर सवाल

राजस्थान की राजधानी जयपुर मंगलवार को एक दर्दनाक हादसे से दहल उठी। खो नागोरियान थाना क्षेत्र के आयशा नगर के तलाई इलाके में एक मकान के अंदर अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई।  देखते ही देखते एक के बाद एक जोरदार धमाके हुए और पूरा इलाका दहशत में आ गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य अभी भी अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

कैसे हुआ हादसा?

घटना उस समय हुई जब एक रिहायशी मकान के भीतर बने छोटे से कमरे में अवैध तरीके से पटाखे बनाए जा रहे थे। स्थिति तब और बिगड़ गई जब घर में रखा गैस सिलेंडर भी आग की चपेट में आ गया और उसमें विस्फोट हो गया, जिससे आग और भड़क उठी और लोग अंदर फंस गए।  एडीएम युगांतर शर्मा ने बताया कि घटना के समय मकान में करीब आठ लोग मौजूद थे, जिनमें एक महिला और एक बच्चा भी शामिल था। 

घटना आईटीआई कॉलेज के पास स्थित आयशा नगर तलाई क्षेत्र में सुबह करीब 11 बजे हुई, जिसके बाद दमकल और बचाव दल तत्काल मौके पर पहुँचे और अंदर फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया। 

मृतक और घायल — कौन हैं पीड़ित?

मृतकों में एक की पहचान अब्दुल वाहिद के रूप में हुई है, जबकि अन्य की पहचान की पुष्टि अभी बाकी है। घायलों में नासिर खान (23), समीर खान (30), बिलाल (30) और आदिब (25) शामिल हैं।  गंभीर रूप से झुलसे तीन मरीजों को एसएमएस अस्पताल के बर्न वार्ड में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार, घायल 50 से 70 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं और उनकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है।  अन्य घायलों को जयपुरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मलबे में और भी दब सकते हैं लोग

दमकलकर्मी आग पर पूरी तरह काबू पाने के साथ-साथ मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं और प्रशासन को आशंका है कि मृतकों व घायलों की संख्या और बढ़ सकती है। रात होने के बाद भी बचाव अभियान जारी रहा।

प्रशासन का रुख — जाँच के आदेश

जयपुर कलेक्टर संदेश नायक ने कहा कि घटना एक रिहायशी क्षेत्र में हुई और अधिकारी इस बात की जाँच कर रहे हैं कि मकान के अंदर किस प्रकार का सामान रखा हुआ था। प्रशासन अब इस बात की गहन जाँच कर रहा है कि रिहायशी इलाके के बीचों-बीच इतने बड़े पैमाने पर पटाखा फैक्ट्री कैसे संचालित की जा रही थी और क्या इसके लिए कोई कानूनी अनुमति ली गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन, एडीएम और सिविल डिफेंस की टीमें लगातार मौके पर मौजूद रहीं। 

सिस्टम पर उठ रहे हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब देश के किसी रिहायशी इलाके में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री में ऐसा हादसा हुआ हो। घनी आबादी वाले इस इलाके में जब आग भड़की तो लोगों को डर सता रहा था कि आग पड़ोसी मकानों में न फैल जाए, जिससे भगदड़ मच गई।  स्थानीय निवासी पूछ रहे हैं कि पुलिस और नगर प्रशासन को इतने दिनों तक इस अवैध फैक्ट्री की भनक क्यों नहीं लगी।

पृष्ठभूमि: पटाखा फैक्ट्री हादसों की लंबी फेहरिस्त

यह घटना देश में अवैध पटाखा कारखानों के बढ़ते खतरे को फिर रेखांकित करती है। इससे पहले फरवरी 2026 में आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में एक पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 21 मजदूर मारे गए थे। राजस्थान सरकार से माँग उठ रही है कि राज्यभर में अवैध पटाखा इकाइयों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए।

मुआवजे और राजनीतिक प्रतिक्रिया

मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से मुआवजे की घोषणा की जाने की संभावना है। विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए कहा है कि प्रशासनिक लापरवाही और निगरानी तंत्र की विफलता के कारण निर्दोष जानें गई हैं। यह खबर लगातार अपडेट हो रही है। मृतक और घायलों की संख्या में बदलाव संभव।

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