पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलकोट में विरोध प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई और 70 से अधिक घायल हुए। इस घटना को स्थानीय लोग और ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ‘नरसंहार’ करार दे रहे हैं। भारत ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि उम्मीद है अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “POK में पाकिस्तानी बलों द्वारा अपने ही कश्मीरी भाइयों पर अत्याचार और मानवाधिकारों का उल्लंघन भयावह है। पाकिस्तान को इसके लिए जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।” भारत ने बार-बार जोर दिया है कि POK भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान का अवैध कब्जा जारी है।
घटना की पृष्ठभूमि
रावलकोट में JAAC द्वारा बुलाए गए बंद और प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी। JAAC 38 मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा था, जिनमें सस्ता आटा, बिजली सब्सिडी, राजनीतिक अधिकार और शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों को समाप्त करना शामिल है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया और बड़े जमावड़े पर रोक लगाई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रावलकोट में एक फ्यूनरल के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सैन्य अस्पताल के पास हमला किया, जिसमें 4 पुलिसकर्मी और 1 आम नागरिक मारे गए। जवाबी कार्रवाई में 6 प्रदर्शनकारी मारे गए। पुलिस ने 23 जवान और 50 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की पुष्टि की। हालांकि, JAAC नेताओं और स्थानीय लोगों का दावा है कि मौतों की संख्या कहीं ज्यादा (150-200 तक) है और पाकिस्तानी सेना ने बिना भेदभाव के गोलीबारी की। इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जिससे सच्चाई छिपाने का आरोप लग रहा है। JAAC नेता शौकत नवाज मीर ने वीडियो संदेश में कहा, “राज्य हमारे लोगों का नरसंहार कर रहा है।” प्रदर्शन अब मुजफ्फराबाद, डडयाल, नीलेम घाटी और अन्य इलाकों में फैल गए हैं।
भारत का रुख
भारत ने इस घटना को पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों का सबूत बताया है। MEA ने कहा कि पाकिस्तान POK को उपनिवेश की तरह व्यवहार करता है, जहां लोकतंत्र और मानवाधिकार कुचले जा रहे हैं। भारत ने याद दिलाया कि J&K और Ladakh हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और रहेंगे। यह निंदा ऐसे समय में आई है जब POK में लंबे समय से आर्थिक संकट, महंगाई, बिजली संकट और सैन्य दबदबे के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। पाकिस्तान की सेना और सरकार पर स्थानीय संसाधनों की लूट और राजनीतिक दमन का आरोप है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रभाव
अभी तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया नहीं आई है, हालांकि मानवाधिकार संगठन चिंता जता रहे हैं। पाकिस्तान हमेशा भारत में कश्मीर पर मानवाधिकार का राग अलापता रहा है, लेकिन अपने कब्जे वाले क्षेत्र में खुद की बर्बरता पर चुप्पी साध लेता है। स्थानीय रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर वीडियो में धुएं भरी सड़कों, घायलों को उठाते लोग और फायरिंग के दृश्य दिख रहे हैं। पाकिस्तान ने JAAC कार्यालय सील कर दिए और गिरफ्तारियां शुरू कर दी हैं।
विश्लेषण
POK में यह हिंसा पाकिस्तान की आंतरिक कमजोरियों को उजागर करती है। जहां एक तरफ पाकिस्तान भारत पर आरोप लगाता है, वहीं उसके कब्जे वाले क्षेत्र में अपने ही लोगों पर गोली चलाई जा रही है। भारत का सख्त रुख दिखाता है कि वह POK के लोगों के दर्द को समझता है और पाकिस्तान के दोहरे मापदंड को बेनकाब कर रहा है। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। बंद का असर पूरे क्षेत्र में दिख रहा है और आगे और हिंसा की आशंका है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह POK में हो रहे अत्याचारों पर नजर रखे हुए है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा उठाएगा। यह खबर विकासशील है और नई जानकारी के साथ अपडेट की जाएगी। POK के लोगों की आवाज दबाई नहीं जा सकती—यह पाकिस्तान के लिए भी एक चेतावनी है।

