इजरायल-ईरान के बीच फिर शुरू हुए हमलों का सिलसिला, सीजफायर टूटने का खतरा, ट्रंप बोले- ‘मैं सब शॉट्स कॉल करता हूं’

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अप्रैल 2026 में अमेरिका की मध्यस्थता से लागू हुए नाजुक सीजफायर के दो महीने बाद ही इजरायल और ईरान के बीच प्रत्यक्ष हमलों का आदान-प्रदान शुरू हो गया है। ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं, जबकि इजरायल ने तेहरान समेत ईरानी शहरों में हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे “सभी शॉट्स कॉल करते हैं”। ईरानी राज्य मीडिया के अनुसार, रविवार रात इजरायली हमलों के जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इजरायल के उत्तरी शहर हाइफा में पेट्रोकेमिकल सुविधाओं पर मिसाइल हमला किया। ईरान ने इसे “सिविलियन टारगेट्स और ऑयल फैसिलिटीज पर हमले का खतरनाक खेल” बताया। IRGC ने चेतावनी दी कि यदि इजरायल ने आगे बढ़ाया तो पूरे क्षेत्र की ऊर्जा अवसंरचना खतरे में पड़ जाएगी। इसके जवाब में सोमवार सुबह इजरायली सेना (IDF) ने ईरान के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में “विस्तृत” हमले किए। तेहरान में बड़े विस्फोटों की खबरें आईं, जहां राज्य टीवी ने दक्षिण, पूर्व और पश्चिमी इलाकों में इजरायली हमलों की पुष्टि की। ईरानी एयर डिफेंस ने ड्रोन को निशाना बनाया। शिराज, केरमानशाह और मशहद जैसे शहरों के एयरपोर्ट्स ने उड़ानें रद्द या स्थगित कर दीं। 

ट्रंप की अपील और दावा:

ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से आग्रह किया था कि वे जवाबी कार्रवाई न करें, लेकिन इजरायल ने फिर भी हमले किए। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “मैं सब शॉट्स कॉल करता हूं।” उन्होंने ईरान से अपील की कि “तुमने मिसाइलें दाग लीं, बस काफी है” और शांति वार्ता की ओर लौटने पर जोर दिया। ट्रंप का मानना है कि ये हमले शांति समझौते को प्रभावित नहीं करेंगे, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति वार्ताओं को जटिल बना सकती है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघई ने अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “इस क्षेत्र में कोई नहीं मानता कि तेल अवीव की कोई कार्रवाई अमेरिका के समन्वय के बिना होती है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लेबनान में सीजफायर का उल्लंघन जारी रहा तो कूटनीतिक प्रक्रिया रुक जाएगी।

पृष्ठभूमि:

यह तनाव फरवरी 2026 में शुरू हुए बड़े संघर्ष का हिस्सा है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य, सरकारी और परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। अप्रैल में सीजफायर हुआ, लेकिन लेबनान में इजरायली हमलों (खासकर बेरूत के दक्षिणी इलाकों में) ने ईरान और हिजबुल्लाह को भड़का दिया। हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल पर हमले का दावा किया और लाल सागर में इजरायली शिपिंग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव:

विश्लेषकों का मानना है कि यह आदान-प्रदान पूर्ण युद्ध की ओर ले जा सकता है, जो होर्मुज की खाड़ी (तेल निर्यात का महत्वपूर्ण मार्ग) को प्रभावित कर वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला सकता है। बाजारों में पहले से ही अस्थिरता है। भारत जैसे देश, जो क्षेत्र से तेल आयात करते हैं, सतर्क हैं। दोनों पक्षों ने अब तक बड़े पैमाने पर हताहतों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन स्थिति अत्यधिक तनावपूर्ण बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति अपील कर रहा है, जबकि ट्रंप प्रशासन अप्रत्यक्ष वार्ताओं के जरिए समझौते की कोशिश कर रहा है।

निष्कर्ष:

मध्य पूर्व की यह नई जंग न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती है। आगे की घटनाएं निर्भर करेंगी कि ट्रंप की कूटनीति कितनी सफल होती है और दोनों पक्ष कितना संयम बरतते हैं। फिलहाल, आकाश में सायरन बज रहे हैं और दुनिया निगाहें टिकाए हुए है।

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