हिमालयी क्षेत्र की भूगर्भीय सक्रियता ने एक बार फिर दक्षिण एशिया को किया सतर्क; राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र और USGS ने की पुष्टि
हिमालय की गोद में बसे छोटे से देश भूटान में एक बार फिर प्रकृति ने अपना रौद्र रूप दिखाया। रिक्टर पैमाने पर 5.6 की तीव्रता वाले इस भूकंप के झटके इतने शक्तिशाली थे कि सिर्फ भूटान ही नहीं, बल्कि भारत, चीन, बांग्लादेश और नेपाल तक धरती थरथरा उठी। यह भूकंप उथली गहराई पर उत्पन्न हुआ, जिसके कारण इसके कंपन आसपास के देशों में बड़े क्षेत्र तक महसूस किए गए। भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) और अमेरिकी भू-सर्वेक्षण संस्था USGS ने इस भूकंप की पुष्टि की। USGS और NCS के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, भूकंप का उद्गम उथली गहराई पर था, जिसने शहरी केंद्रों में अनुभव किए गए कंपन को और तेज कर दिया।
कहाँ-कहाँ महसूस किए गए झटके?
भूकंप का सबसे तीखा असर भूटान और उससे सटे इलाकों में रहा। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार तक , में लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए। भूकंप के तेज झटके पड़ोसी देश नेपाल और भूटान में भी महसूस किए गए तथा भारत में उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में झटके महसूस हुए। बांग्लादेश में भी इस भूकंप का असर देखा गया। बांग्लादेश की राजधानी ढाका और आसपास के उत्तरी जिलों में रहने वाले लोग नींद से जाग उठे, कंपन कुछ सेकंड तक जारी रही। चीन के तिब्बती क्षेत्र तक भी इस भूकंप की आंच पहुँची। यह क्षेत्र पहले से ही भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
जान-माल के नुकसान की खबर नहीं
राहत की बात यह रही कि प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, तत्काल किसी जनहानि या बड़े ढाँचागत नुकसान की सूचना नहीं मिली। हालाँकि, प्रशासनिक एजेंसियाँ सतर्क हैं और सभी प्रभावित इलाकों से जानकारी एकत्र की जा रही है।
भूटान और भूकंप — एक भूगर्भीय वास्तविकता
भूटान हिमालय पर्वतमाला में स्थित है, जो भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा पर बसा है। भारतीय प्लेट उत्तर की दिशा में यूरेशियाई प्लेट की ओर बढ़ रही है, जिससे हिमालय ऊपर की ओर उठता रहता है और इस टकराव के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में बड़े भूकंप आते रहते हैं। पिछले 10 वर्षों में भूटान के 300 किलोमीटर के दायरे में चार या उससे अधिक तीव्रता के 401 भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं। यानी औसतन हर 9 दिन में एक भूकंप इस क्षेत्र को हिलाता है। इससे पहले इसी साल 13 मई 2026 को थिम्पू से 55 किमी दक्षिण-पश्चिम में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जो केवल 2.4 किमी की उथली गहराई पर उत्पन्न हुआ था।
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती भूकंपीय सक्रियता चिंताजनक
भूगर्भ विशेषज्ञों ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चेतावनी जारी की है। मध्यम तीव्रता के झटकों की पुनरावृत्ति ने इस क्षेत्र की भूगर्भीय परतों को लेकर भूवैज्ञानिकों की चिंता को और गहरा कर दिया है। भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कुल भूभाग का लगभग 59 प्रतिशत हिस्सा भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। वैज्ञानिकों ने भारत को जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5 चार भूकंपीय क्षेत्रों में बाँटा है, जिसमें जोन-5 सर्वाधिक खतरनाक है।
प्रशासन सतर्क, राहत दल तैनात
भूकंप की सूचना मिलते ही भूटान, भारत और बांग्लादेश के आपदा प्रबंधन विभाग सतर्क हो गए। हेल्पलाइन नंबर सक्रिय किए गए और राहत दलों को संभावित प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया। NCS की टीमें लगातार आफ्टरशॉक की संभावना पर नजर बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
भूकंप विशेषज्ञों ने पूर्वोत्तर भारत, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के निवासियों को सावधान रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि उथली गहराई पर आए भूकंप के बाद आफ्टरशॉक की संभावना बनी रहती है। लोगों को पुरानी इमारतों से दूर रहने, आपातकालीन किट तैयार रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की हिदायत दी गई है।

