बंगाल की ज़मीन नहीं बेची तो दिल्ली में कर दी हत्या, किरायेदार दंपति ने डीयू प्रोफेसर को मौत के घाट उतारा, तीन दिनों में पुलिस ने सुलझाई गुत्थी

राजधानी दिल्ली के पूर्वी इलाके वसुंधरा एन्क्लेव से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित शिवाजी कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देबोस्मिता पॉल का शव 4 जून को वसुंधरा एन्क्लेव स्थित सत्यम अपार्टमेंट के उनके फ्लैट में मिला था, हालांकि जांच में सामने आया कि हत्या एक दिन पहले यानी 3 जून को ही हो गई थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड को दिल्ली पुलिस ने महज तीन दिनों के भीतर सुलझा लिया है। पुलिस ने पश्चिम बंगाल के पूर्बा बर्धमान जिले से एक पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि यह जोड़ा चार राज्यों में फैली व्यापक तलाश के बाद पकड़ा गया। 

कैसे खुला रहस्य — बहन की चीख से शुरू हुई जांच

प्रोफेसर देबोस्मिता अपनी बहन के फ्लैट में अकेली रह रही थीं। वे 2022 से अपने पति से अलग थीं और उनके पति बेंगलुरु में रहते हैं। मामला तब उजागर हुआ जब उनकी बड़ी बहन देवरती पॉल ने बार-बार फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब देवरती अपार्टमेंट पहुंचीं तो दरवाज़ा बाहर से बंद था। अंदर घुसने पर उन्हें बहन का शव खून के बीच पड़ा मिला, जिसके बाद उन्होंने फ़ौरन पुलिस को सूचना दी। पुलिस को मृतका के शरीर और हाथों पर कट के निशान मिले, जिससे स्पष्ट हुआ कि मौत से पहले प्रोफेसर ने हमलावरों से बचने के लिए जमकर संघर्ष किया था। जांच में सामने आया कि पीड़िता के सिर पर किसी भारी वस्तु से वार किया गया था। 

CCTV ने पकड़ाया सुराग — मास्क पहन, बच्चे को साथ लेकर आए थे हत्यारे

पुलिस ने CCTV फुटेज खंगाली तो पता चला कि घटना के दिन दो नकाबपोश व्यक्ति अपार्टमेंट परिसर में दाखिल हुए और करीब 30 मिनट तक अंदर रहे। फुटेज में दिखा कि एक कैब अपार्टमेंट परिसर में घुसी, दो लोग उतरे और लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों से ऊपर गए। करीब आधे घंटे बाद वे वापस उसी कैब से चले गए। पुलिस के अनुसार आरोपी दंपति ने शक से बचने के लिए सोसायटी में बेहद सामान्य तरीके से प्रवेश किया और साथ में अपने बच्चे को भी लेकर आए थे। उनके पास पहले से हथियार मौजूद था, जिससे उन्होंने प्रोफेसर की हत्या की। 

हत्या की वजह — नाना की विरासत, जो छोड़ने को तैयार नहीं थी देबोस्मिता

पूर्वी दिल्ली के डीसीपी राजीव कुमार के मुताबिक, गिरफ्तार दंपति कोलकाता स्थित प्रोफेसर की पुश्तैनी संपत्ति में किरायेदार के रूप में रह रहे थे। यह संपत्ति देबोस्मिता के नाना की थी और वे लंबे समय से वहां किराये पर थे तथा कई वर्षों से उसे खरीदना चाहते थे। आरोपी उस संपत्ति पर कब्ज़ा जमाना चाहते थे और प्रोफेसर को अपनी राह में सबसे बड़ी रुकावट मानते थे। पुलिस के मुताबिक प्रोफेसर संपत्ति से जुड़े मामलों को लेकर उन पर दबाव बना रही थीं, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा था। पुलिस को पूरी तरह यकीन है कि हत्या के पीछे बंगाल में स्थित पुश्तैनी मकान का विवाद ही मुख्य कारण था। आरोपी दंपति प्रोफेसर से मिलने के बहाने दिल्ली आए और यह वारदात को अंजाम दिया। 

लूटपाट नहीं, सिर्फ हत्या — इरादा पहले से था पक्का

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि फ्लैट में रखे गहने और नकदी को हाथ तक नहीं लगाया गया, जिससे स्पष्ट हो गया कि यह लूट की नीयत से नहीं बल्कि पूर्वनियोजित हत्या थी। आरोपी पहले से प्रोफेसर के परिचित थे, इसलिए उन्हें सोसायटी में आसानी से प्रवेश मिल गया। 

1,400 किलोमीटर का सफर, फिर वापसी — पर पकड़ में आ गए

आरोपी दंपति पश्चिम बंगाल के बर्धमान ज़िले के रहने वाले हैं। वे करीब 1,400 किलोमीटर का सफर तय कर दिल्ली आए, हत्या की और वापस लौट गए।  लेकिन दिल्ली पुलिस की पूर्वी ज़िला क्राइम टीम और चार राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान ने उन्हें आखिरकार धर दबोचा। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार दंपति प्रोफेसर के दूर के रिश्तेदार भी हैं। वे कोलकाता से दिल्ली आए, हत्या की और वापस लौट गए। अब दोनों को दिल्ली लाया जा रहा है जहाँ उनसे विस्तृत पूछताछ की जाएगी।

कौन थीं देबोस्मिता पॉल?

देबोस्मिता पॉल दिल्ली विश्वविद्यालय के शिवाजी कॉलेज में अंग्रेज़ी साहित्य पढ़ाती थीं। वे एक अकादमिक रूप से सक्रिय और मेधावी शिक्षक मानी जाती थीं। पति से अलगाव के बाद वे अपनी बहन के फ्लैट में अकेले रह रही थीं। उनकी निर्मम हत्या ने दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर और शिक्षक बिरादरी में गहरा शोक पैदा किया है। यह मामला एक बार फिर बताता है कि संपत्ति विवाद किस हद तक इंसान को हत्यारा बना सकते हैं,  और कैसे पूर्वनियोजित साजिश के तहत की गई वारदातें भी आधुनिक तकनीक और मुस्तैद पुलिस की नज़रों से नहीं बच पातीं।

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