ग्रेटर नोएडा की रिहायशी सोसायटियों में सोलर प्लांट अनिवार्य करने की तैयारी, हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम

ग्रेटर नोएडा और गौतमबुद्धनगर में रिहायशी सोसायटियों, हाईराइज़ इमारतों और बड़े कॉम्प्लेक्सों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का दबाव बढ़ गया है। ताज़ा जानकारी के मुताबिक प्रशासन पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत सोसायटियों को सोलर अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, जबकि 5,000 वर्गमीटर या उससे बड़े परिसरों के लिए सोलर प्लांट लगाना आवश्यक प्रावधान के दायरे में रखा गया है।

क्या है नया फैसला

प्रशासनिक स्तर पर रिहायशी कल्याण संघों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों, बड़े आवासीय और वाणिज्यिक परिसरों को रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए सक्रिय रूप से कहा जा रहा है। सरकारी रुख यह है कि साझा उपयोग वाले क्षेत्रोंजैसे स्ट्रीट लाइट, पानी की मोटर, सोसायटी ऑफिस और ईवी चार्जिंग पॉइंट—के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाया जाए।

नियम और अनिवार्यता

मौजूदा जानकारी के अनुसार, 5,000 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्र वाले आवासीय, सरकारी, अर्ध-सरकारी, शैक्षणिक और वाणिज्यिक परिसरों के लिए सोलर प्लांट लगाने का प्रावधान लागू/प्रस्तावित है। पहले भी ग्रेटर नोएडा में नई इमारतों के लिए कम-से-कम 10% बिजली जरूरत सोलर से पूरा करने की दिशा में भवन उपविधियों में बदलाव की बात सामने आ चुकी है।

सब्सिडी और लाभ

सोसायटियों को आर्थिक राहत देने के लिए सब्सिडी का भी प्रावधान है। उपलब्ध ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पात्र परियोजनाओं के लिए प्रति किलोवाट ₹18,000 तक की सहायता, अधिकतम ₹90 लाख तक, मिल सकती है; वहीं एनपीसीएल की जानकारी के अनुसार समूह आवासीय सोसायटी में सामान्य सेवाओं के लिए 500 kWp तक के प्रोजेक्ट पर सब्सिडी/सीएफए की अलग व्यवस्था है। इससे लिफ्ट, पंप, लाइटिंग और कॉमन एरिया का बिजली बिल कम होने की उम्मीद है।

पिछली नीति से जुड़ाव

उत्तर प्रदेश की सौर ऊर्जा नीति-2022 में भी सोलर सिटी, रूफटॉप विस्तार और बड़े पैमाने पर सौर क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था। नोएडा को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की नीति पहले से चर्चा में रही है, और अब वही रुख ग्रेटर नोएडा की सोसायटियों तक और सख्ती से पहुंचता दिख रहा है।

स्थानीय असर

ग्रेटर नोएडा में यह कदम सिर्फ बिजली बचत का नहीं, बल्कि शहरी नियोजन और हरित विकास का भी संकेत माना जा रहा है। इससे सोसायटियों की एनर्जी कॉस्ट घट सकती है, बिजली पर निर्भरता कम हो सकती है और लंबे समय में परिसरों की रेटिंग व मूल्य पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

क्यों अहम है

गौतमबुद्धनगर पहले से ही सौर ऊर्जा विस्तार का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है—कहीं घरों के लिए सोलर कनेक्शन बढ़ाए जा रहे हैं, कहीं सोसायटियों में रूफटॉप सिस्टम को प्रोत्साहन मिल रहा है। ऐसे में ग्रेटर नोएडा का यह फैसला आने वाले महीनों में अन्य शहरी क्षेत्रों के लिए भी मानक बन सकता है।

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