यूपी-नोएडा में भी चली तबादला एक्सप्रेस, 206 पीपीएस अधिकारियों के तबादले, कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार का कदम 

उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) के 206 अधिकारियों (मुख्य रूप से पुलिस उपाधीक्षक/क्षेत्राधिकारी स्तर) के तबादले कर दिए गए। गृह विभाग के आदेश पर जारी इस सूची में कई महत्वपूर्ण जिलों, पुलिस कमिश्नरेटों, पीएसी वाहिनियों और विशेष इकाइयों में नई तैनातियां की गई हैं। यह तबादला योगी आदित्यनाथ सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें एक ही जगह पर लंबे समय तक तैनात अधिकारियों को नियमित रूप से घुमाकर प्रशासनिक दक्षता बढ़ाई जाती है और स्थानीय दबावों से मुक्ति दिलाई जाती है।

तबादले का दायरा

तबादला सूची में लखनऊ, कानपुर नगर, वाराणसी, आगरा, गाजियाबाद, प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ, अयोध्या, झांसी, बरेली, नोएडा (गौतमबुद्धनगर) समेत राज्य के करीब 65 जिलों के अधिकारी शामिल हैं। कई जिला पुलिस से कमिश्नरेट प्रणाली में और कुछ को पीएसी, सीआईडी, रेलवे पुलिस, एलआईयू तथा मुख्यमंत्री सुरक्षा जैसे संवेदनशील पदों पर भेजा गया है। 

कुछ प्रमुख तबादले:

सीएम सुरक्षा में तैनात जितेंद्र कुमार-II को शाहजहांपुर भेजा गया। कानपुर कमिश्नरेट के कई सहायक पुलिस आयुक्तों को बदला गया। विभिन्न पीएसी वाहिनियों में सहायक सेनानायकों की अदला-बदली। लखनऊ, आगरा, गोरखपुर जैसे बड़े केंद्रों में मंडलाधिकारियों और क्षेत्राधिकारियों की नई पोस्टिंग।

सरकार का मकसद

पुलिस महानिदेशालय सूत्रों के अनुसार, यह फेरबदल कानून-व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त बनाने, अपराध नियंत्रण, चुनावी तैयारियों (यदि कोई स्थानीय चुनाव आ रहे हों) और विशेष अभियानों के लिए अधिकारियों को तरोताजा करने के उद्देश्य से किया गया है। योगी सरकार लगातार आईएएस, आईपीएस और अब पीपीएस स्तर पर ऐसे बड़े पैमाने के तबादले कर रही है, ताकि प्रशासन में नई ऊर्जा का संचार हो। पिछले कुछ महीनों में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादलों के बाद यह पीपीएस स्तर का सबसे बड़ा फेरबदल है। अधिकारियों को नई जगहों पर तुरंत ज्वाइन करने के निर्देश दिए गए हैं। पूर्ण सूची गृह विभाग और डीजीपी कार्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है। प्रभावित अधिकारियों को राहत पैकेज और यात्रा भत्ता भी प्रदान किया जाएगा। यह बदलाव यूपी पुलिस को और अधिक पेशेवर और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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