सिद्धारमैया के डेढ़ वर्ष बाद सत्ता हस्तांतरण, कांग्रेस का ‘पावर शेयरिंग फॉर्मूला’ हुआ साकार
कर्नाटक की राजनीति में बुधवार को एक ऐतिहासिक पल आया जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और वोक्कालिगा समुदाय के प्रमुख नेता डी.के. शिवकुमार ने राज्य के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। उन्होंने शपथ लेते समय अपने हाथ में संविधान की एक प्रति थामी हुई थी। यह क्षण न केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक संघर्ष का परिणाम था, बल्कि कांग्रेस की उस अंदरूनी सत्ता-साझेदारी व्यवस्था का भी अंजाम था, जो 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद से ही चर्चा का विषय बनी हुई थी।
लोक भवन में हुआ समारोह, खड़गे-राहुल रहे मौजूद
राज्यपाल थावरचंद गेहलोत ने शाम 4 बजकर 5 मिनट पर बेंगलुरु स्थित लोक भवन के ग्लास हाउस में शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण से पहले शिवकुमार ने झुककर मंच का स्पर्श किया और संत गंगाधर अज्जय्या के नाम पर शपथ ली। इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया उपस्थित रहे। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान वंदे मातरम् का पूरा संस्करण बजाया गया, जिसके बाद राष्ट्रगान और राज्य गान भी गाए गए।
13 मंत्रियों ने भी ली शपथ
64 वर्षीय शिवकुमार के साथ 13 विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें से अधिकांश सिद्धारमैया की पिछली कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं। नई कांग्रेस सरकार में सिद्धारमैया के बेटे यथींद्र भी शामिल हैं, जो एमएलसी हैं। समारोह जानबूझकर सादा रखा गया। यातायात अवरोध की आशंका के कारण इसे भव्य विधान सौध की सीढ़ियों के बजाय लोक भवन में आयोजित किया गया, जहाँ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ न उमड़े।
सोनिया गांधी ने फोन पर दी बधाई
शिवकुमार ने बताया कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने उन्हें फोन पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “सोनिया गांधी ने मुझसे फोन पर बात की। शुरू से उन्हें मुझ पर बहुत भरोसा है। उन्होंने ही मुझे प्रदेश अध्यक्ष बनाया। उन्होंने सबको साथ लेकर चलने को कहा।”
लंबे सत्ता-संघर्ष का अंत
यह शपथ ग्रहण कर्नाटक की राजनीति में कई महीनों से चले आ रहे नेतृत्व परिवर्तन के घमासान का परिणाम है। 2023 में कांग्रेस की जीत के बाद से ही यह अटकलें थीं कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच एक अनौपचारिक ढाई साल की सत्ता-साझेदारी व्यवस्था है। 28 मई, 2026 को एक नाटकीय राजनीतिक घटनाक्रम में सिद्धारमैया ने नाश्ते की बैठक में अपने कैबिनेट सहयोगियों को बताया कि वे दोपहर 3 बजे इस्तीफा देंगे और शिवकुमार को शुभकामनाएं दीं। भावनात्मक क्षण तब आया जब शिवकुमार सिद्धारमैया के पैर छूते दिखे, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 30 मई को कांग्रेस विधायक दल ने सर्वसम्मति से शिवकुमार को अपना नेता चुना और उन्होंने राज्यपाल थावरचंद गेहलोत से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया।
8 बार के विधायक, ‘डीके शी’ की लंबी राह
आठ बार के विधायक शिवकुमार, जिन्हें लोकप्रिय रूप से ‘डीके शी’ कहा जाता है, अपने इस दीर्घकालीन सपने को पूरा करने में सफल रहे। उन्हें दक्षिण भारत में कांग्रेस का ‘संकटमोचक’ माना जाता है और 2019 में जेल जाने के बावजूद उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत बनाए रखा। सिद्धारमैया ने पिछले हफ्ते कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर इस्तीफा दिया, जिससे शिवकुमार के लिए सत्ता का रास्ता साफ हुआ।
आगे की राह: चुनौतियाँ और उम्मीदें
कांग्रेस विधायक प्रदीप ईश्वर ने कहा, “आज डीके शिवकुमार कर्नाटक के मुख्यमंत्री का पदभार संभाल रहे हैं। कर्नाटक को उनसे बहुत उम्मीदें हैं।” शिवकुमार के सामने अब मेकेदातु जलाशय, जाति जनगणना, गारंटी योजनाओं की निरंतरता और 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी जैसी बड़ी चुनौतियाँ हैं। संविधान हाथ में थामकर शपथ लेने के इस प्रतीकात्मक संदेश से शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय को केंद्र में रखकर चलेगी।

