यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत? आयोग ने 10% ईंधन अधिभार पर UPPCL से मांगा सात दिन में जवाब

उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए शुक्रवार को राहत भरी खबर आई जब राज्य विद्युत नियामक आयोग ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) से बिजली बिलों में वसूले जा रहे 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार (Fuel Surcharge Adjustment) के न्यायसंगत होने संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण माँगा। आयोग ने प्रारंभिक सुनवाई में इस शुल्क वृद्धि को नियमों के विपरीत करार देते हुए UPPCL को सात दिन के अंदर लिखित जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि में यह है कि UPPCL ने मार्च माह के लिए 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार की वसूली का आदेश जारी किया था और इसे जून के बिजली बिलों में ग्राहकों पर लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस निर्णय का उपभोक्ता संगठन और उपभोक्ता परिषद ने विरोध किया और मामले को विद्युत नियामक आयोग के समक्ष याचिका के रूप में उठाया। उपभोक्ता परिषद ने तर्क दिया कि बिना निर्धारित नियमों और पूर्व अनुमोदन के ऐसा अधिभार लागू करना अनियमित और उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ डालने वाला है। सुनवाई के दौरान आयोग ने स्पष्ट किया कि ईंधन अधिभार लगाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और पारदर्शिता का पालन अनिवार्य है। आयोग ने UPPCL से पूछा है कि किस नियम, सूत्र या लागत-विवरण के आधार पर 10 प्रतिशत की दर तय की गई और क्या इस वृद्धि का पूर्व में अनुमोदन लिया गया था। आयोग ने कहा कि जिस प्रकार की प्रक्रियाएं लागू हैं, उनके बिना इस तरह का अतिरिक्त अधिभार मान्य नहीं माना जा सकता।

UPPCL को निर्देशित किया गया है कि वह सात दिनों के भीतर अधिभार लागू करने के तर्क, संबंधित लागत-आधार, और उपभोक्ताओं को मिलने वाली सूचना/नोटिस का विस्तृत ब्यौरा आयोग को सौंपे। अधिकारियों ने यह भी पूछा कि क्या UPPCL ने विभिन्न उपभोक्ता वर्गों (घरेलू, वाणिज्यिक, औद्योगिक) पर इस अधिभार का प्रभाव अलग-अलग आंका और यदि हाँ तो उसका मूल्यांकन क्या रहा। उपभोक्ता संगठनों ने आयोग के कड़े रुख का स्वागत करते हुए कहा कि आयोग का यह कदम लाखों उपभोक्ताओं के लिए राहत का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। वहीं UPPCL के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी आयोग के निर्देशानुसार आवश्यक दस्तावेज़ जल्द प्रस्तुत करेगी और कहा कि अधिभार का निर्णय प्रणालीगत लागत-समीक्षा के आधार पर लिया गया था। प्रवक्ता ने आश्वासन दिया कि यदि आयोग को कोई प्रक्रियागत त्रुटि दिखती है तो कंपनी सहयोग करेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आयोग UPPCL के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं होता है तो वह उक्त अधिभार को रद्द या संशोधित करने का आदेश दे सकता है, साथ ही उपभोक्ताओं के लिए शुल्क वसूली के अध्यादेश/प्रक्रिया के अनुरूप वापसी या समायोजन के निर्देश भी जारी कर सकता है। इसके अलावा, आयोग आगे की सुनवाई में सार्वजनिक हित और उपभोक्ता सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगा। अब अगले सात दिनों में UPPCL द्वारा प्रस्तुत जवाब और उसके आधार पर आयोग द्वारा लिया जाने वाला निर्णय इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा। उपभोक्ता प्रतिनिधि और राज्य के लाखों बिजली उपभोक्ता आयोग के आगामी आदेश की प्रतीक्षा में हैं।

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