महर्षि आश्रम की ज़मीन क़ब्ज़ा: सपा सरकार में मलाई काटने वाले अफ़सर योगी सरकार में कमा रहे हैं करोड़ों,ज़ीरो टॉलरेंस नीति फ़ेल

नोएडा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति और भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावों को नोएडा में खुलेआम चुनौती दी जा रही है। मामला नोएडा के सेक्टर 104, हाजीपुर और सलारपुर क्षेत्र का है, जहाँ ‘महर्षि आश्रम’ की बेशकीमती ज़मीन पर अवैध रूप से बहुमंजिला फ़्लैट्स (अपार्टमेंट्स) का निर्माण धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय सूत्रों और मिल रही जानकारियों के अनुसार, इस पूरे खेल में नोएडा प्राधिकरण के भ्रष्ट अधिकारियों और समाजवादी पार्टी (सपा) के शासनकाल में मलाईदार पदों पर रहे रसूखदार अफ़सरों की गहरी साठगांठ सामने आ रही है।यदि यहाँ पर निष्पक्ष जाँच हो तो सब कुछ सामने आ सकता है मगर प्राधिकरण के अफ़सरों के यहाँ हित साध रहे हैं इसलिए सब चुप है।

ED की छापेमारी भी बेअसर, बेखौफ जारी है निर्माण

सूत्रों के मुताबिक, महर्षि आश्रम की इस विवादित ज़मीन पर वित्तीय अनियमितताओं और अवैध कब्ज़े को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी पूर्व में छापेमारी की कार्रवाई कर चुका है। केंद्रीय जांच एजेंसी की दस्तक के बाद उम्मीद थी कि इस अवैध साम्राज्य पर ताला लगेगा, लेकिन हकीकत इसके उलट है। ED की जांच के बावजूद साइट पर निर्माण कार्य एक दिन के लिए भी नहीं रुका। कंक्रीट के मिक्सर और मजदूर दिन-रात इमारतें खड़ी करने में जुटे हैं, जो सीधे तौर पर कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाने जैसा है।

भोले-भाले खरीदार बन रहे शिकार, ‘बनाओ और भागो’ की रणनीति

इस अवैध निर्माण के पीछे एक सोची-समझी रणनीति काम कर रही है। रसूखदार लोग अपने चहेतों और बिल्डरों के माध्यम से इन ज़मीनों को घेरकर आनन-फानन में फ़्लैट तैयार कर रहे हैं।

  • सस्ते का लालच: नोएडा के प्राइम लोकेशन (सेक्टर 104) में इन फ़्लैट्स को बाजार दर से काफी कम कीमतों पर ऑफर किया जाता है।
  • कागजी हेरफेर: भोले-भाले और मध्यमवर्गीय परिवारों को झूठे दस्तावेजों के जाल में फंसाकर ये फ़्लैट बेच दिए जाते हैं।
  • हाथ खींचना: जैसे ही फ़्लैट्स बिक जाते हैं और मोटी रकम वसूल हो जाती है, बिल्डर और भू-माफिया वहां से गायब हो जाते हैं। बाद में जब प्राधिकरण या कोर्ट का डंडा चलता है, तो गाज केवल उन मासूम खरीदारों पर गिरती है जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई वहां लगा दी होती है।

सपा काल के ‘मलाईदार’ अफसरों और नोएडा प्राधिकरण की साठगांठ

स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस पूरे घोटाले की जड़ें नोएडा प्राधिकरण के भीतर तक फैली हुई हैं। समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान मलाईदार पदों पर तैनात रहे कुछ अधिकारियों ने अपनी ऊंची राजनीतिक पैठ का इस्तेमाल कर इस ज़मीन पर कब्ज़ा बनाए रखा। वर्तमान में भी नोएडा प्राधिकरण के कुछ निचले और मध्यम स्तर के कर्मचारी व अधिकारी इन भू-माफियाओं को मूक संरक्षण दे रहे हैं। निर्माण स्थल पर समय-समय पर होने वाली ‘दिखावे की कार्रवाई’ के अलावा प्राधिकरण ने कभी कोई सख्त कदम नहीं उठाया।

सबसे बड़ा सवाल: जब पूरे नोएडा में बिना नक्शा पास कराए एक ईंट रखना भी मुमकिन नहीं है, तो सेक्टर 104 जैसे पॉश इलाके में पूरी की पूरी सोसायटियां और फ़्लैट्स कैसे खड़े किए जा रहे हैं? प्राधिकरण के कनिष्ठ अभियंता (JE) और संबंधित क्षेत्र के प्रबंधक इस पर खामोश क्यों हैं?

सीएम योगी को दी जा रही ‘गुमराह करने वाली’ रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले की भनक न लगे, इसके लिए भी बकायदा चक्रव्यूह रचा गया है। सूत्रों का कहना है कि जब भी यह मामला शासन स्तर पर उठता है या मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) संज्ञान लेता है, तो नोएडा प्राधिकरण के संबंधित अधिकारी ज़मीनी हकीकत को छुपाकर एक ‘ऑल इज़ वेल’ वाली फर्जी या आधी-अधूरे तथ्यों वाली रिपोर्ट शासन को भेज देते हैं। मुख्यमंत्री को सही रिपोर्ट न देकर अफसरशाही सीधे तौर पर यूपी सरकार की ईमानदारी और पारदर्शिता की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रही है।

उठते गंभीर सवाल और कार्रवाई की मांग

इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और स्थानीय निवासियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

  1. क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले की विजिलेंस या SIT जांच कराकर नोएडा प्राधिकरण के उन भ्रष्ट अधिकारियों को जेल भेजेंगे जो सरकार की साख को बट्टा लगा रहे हैं?
  2. ED की कार्रवाई के बाद भी निर्माण कार्य जारी रहना क्या केंद्रीय एजेंसियों की अवमानना नहीं है?
  3. क्या प्रशासन इन अवैध फ़्लैटों की बिक्री पर रोक लगाकर आम जनता के पैसे डूबने से बचाएगा?

फिलहाल, सेक्टर 104 की यह ज़मीन एक बड़े विवाद का केंद्र बनी हुई है, और यदि जल्द ही इस पर ठोस एक्शन नहीं लिया गया, तो सैकड़ों आम नागरिक इस भू-माफियाओं के जाल में फंसकर बर्बाद हो सकते हैं।

 

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