सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, WFI की अड़ंगेबाजी नाकाम विनेश फोगाट एशियन गेम्स ट्रायल के मैट पर उतरीं

मातृत्व अवकाश, वज़न विवाद और कानूनी पेचीदगियों को पार कर ओलंपियन ने साबित किया — हौसलों को कोई रोक नहीं सकता

भारतीय कुश्ती की सबसे चर्चित पहलवान विनेश फोगाट ने शनिवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में कदम रखा और यह महज एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि एक लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई की जीत थी।कोर्ट ने विनेश को 30 और 31 मई को होने वाले एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति दी, जिसके बाद वे स्टेडियम पहुंचीं और वज़न जांच में सफलतापूर्वक पास हुईं।

वज़न जांच में पास — बड़ी बाधा पार

विनेश फोगाट ने इंदिरा गांधी स्टेडियम, नई दिल्ली में महिलाओं की 53 किलोग्राम वर्ग की वज़न जांच में सफलतापूर्वक भाग लिया। अधिकारियों के अनुसार विनेश सभी पात्र पहलवानों के साथ निर्धारित वज़न जांच में शामिल हुईं और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं, जिससे वे चयन ट्रायल में भाग लेने के योग्य हो गईं। उल्लेखनीय है कि WFI ने पहले यह दावा किया था कि विनेश फोगाट को 50 किलोग्राम वर्ग में जिसमें उन्होंने पेरिस ओलंपिक खेला था ट्रायल देना होगा।  लेकिन अंततः उन्हें 53 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति मिली।

सुप्रीम कोर्ट ने WFI की याचिका ठुकराई, विनेश को दी राहत

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अनुभवी पहलवान और ओलंपियन विनेश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी, साथ ही खेल प्रशासन में न्यायिक हस्तक्षेप को लेकर भी चिंता जताई। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यह आदेश भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा “अगर कोई और होता, तो बात अलग होती। उन्होंने देश को गर्वित किया है।” कोर्ट ने यह भी कहा  “आप एक उत्कृष्ट खिलाड़ी रही हैं। लेकिन देश पहले।” जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने कुश्ती संघ की दलीलों को दरकिनार करते हुए उनकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

विवाद की जड़ — WFI की भेदभावपूर्ण चयन नीति

विनेश ने WFI की 25 फरवरी 2026 की एशियन गेम्स चयन नीति और 6 मई 2026 के उस परिपत्र को चुनौती दी थी, जिसमें 2025 और 2026 में आयोजित निर्दिष्ट घरेलू टूर्नामेंट के पदक विजेताओं तक ही ट्रायल की पात्रता सीमित कर दी गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 मई को आदेश दिया था कि विनेश फोगाट को चयन ट्रायल में हिस्सा लेने दिया जाए। हाईकोर्ट ने माना था कि WFI की चयन नीति मातृत्व अवकाश लेने वाली महिला खिलाड़ियों के प्रति भेदभावपूर्ण प्रतीत होती है और मातृत्व किसी खिलाड़ी को अवसरों से वंचित करने का आधार नहीं बन सकता।

मातृत्व और वापसी — एक प्रेरणादायक यात्रा

विनेश ने दिसंबर 2024 में अंतर्राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (ITA) को सूचित किया था कि वे गर्भावस्था के कारण अस्थायी विराम ले रही हैं और बाद में प्रतिस्पर्धा में लौटने का इरादा रखती हैं। उन्होंने जुलाई 2025 में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया और उसके बाद प्रशिक्षण फिर से शुरू किया। ITA ने बाद में पुष्टि की कि वे 1 जनवरी 2026 से प्रतिस्पर्धा के लिए पात्र होंगी। पेरिस ओलंपिक 2024 में 50 किलोग्राम वर्ग के फाइनल से ठीक पहले मात्र 100 ग्राम वज़न अधिक होने के कारण विनेश को अयोग्य ठहराया गया था, जिसके बाद 8 अगस्त 2024 को उन्होंने संन्यास ले लिया था। लेकिन 12 दिसंबर 2025 को उन्होंने संन्यास से वापसी करते हुए 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक को अपना लक्ष्य घोषित किया।

आगे की राह — एशियन गेम्स जापान में

30 और 31 मई को दिल्ली में होने वाले ये ट्रायल बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसी के आधार पर सितंबर में जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम चुनी जाएगी। विनेश ने 48 किलोग्राम से शुरुआत की थी, फिर 51 किलोग्राम और इसके बाद 53 किलोग्राम वर्ग में आईं, जिसमें उन्होंने दो विश्व चैंपियनशिप पदक और टोक्यो ओलंपिक में भी पदक जीता।

हाईकोर्ट की टिप्पणी — WFI पर सख्त रुख

दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने WFI के शो-कॉज़ नोटिस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कदम “प्रतिशोधपूर्ण और पूर्वनियोजित” प्रतीत होता है। विनेश फोगाट की यह यात्रा सिर्फ एक पहलवान की वापसी नहीं है — यह मातृत्व, संघर्ष, न्याय और जुनून की कहानी है। मैट पर उतरने से पहले ही उन्होंने एक बड़ी जंग जीत ली है।

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