गंगानगर थाना क्षेत्र में तैनात दो सिपाही अमित यादव और तेजबहादुर को 16 मई को IIMT यूनिवर्सिटी के बीसीए छात्र अभिषेक की कथित रूप से बिना वजह पिटाई करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। घटना में छात्र के एक कान का पर्दा फट गया, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन प्रारंभिक दिनों में कोई कार्रवाई नहीं होने पर मामला गरमा गया।
जानकारी के अनुसार, 16 मई को अभिषेक को गंगानगर थाने के पास कथित तौर पर दोनों सिपाहियों ने हाथ-पैर बांधकर और लाठी-डंडों से पीटा। अभिषेक का कहना है कि उन्हें कोई कारण बताकर नहीं रोका गया और न ही किसी प्रकार की शिकायत या प्रोवोकेशन था। पिटाई के परिणामस्वरूप छात्र के एक कान का पर्दा फट गया, जिसकी पुष्टि अस्पताल में इलाज के दौरान हुई। घायल छात्र और परिजनों ने थाने में तहरीर दे दी, लेकिन उनके मुताबिक शुरुआती दिनों में किसी प्रकार की सक्रिय कार्रवाई नहीं हुई।
मामला तब सार्वजनिक हुआ जब भाकियू के राष्ट्रीय नेता राकेश टिकैत और उनके समर्थक कल गंगानगर थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। धरने के दौरान ग्रामीण संगठन ने पुलिस द्वारा परिवादी की शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया और तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। धरने के बाद मौके पर पहुंचे एसपी क्राइम ने स्थिति का जायजा लिया और मामले की तफ्तीश का आदेश दिया। उनके हस्तक्षेप के बाद जिला पुलिस ने दोनों सिपाहियों अमित यादव और तेजबहादुर को निलंबित कर दिया है और संबंधित पर व्यापक जांच शुरू कर दी गई है।
एसपी क्राइम ने मीडिया को बताया कि प्राथमिक जांच में पीड़ित छात्र के बयान और चिकित्सा रिपोर्ट को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा, “जिस भी पुलिसकर्मी के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिलेंगे उसके विरुद्ध विभागीय तथा आपराधिक कार्रवाई होगी। फिलहाल दोनों सिपाहियों को सस्पेंड कर कराना, उनके मोबाइल और ड्यूटी संबंधित रिकॉर्ड जब्त कर लिए गए हैं।” एसपी ने यह भी कहा कि घटना के वीडियो या अन्य प्रमाण मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। परिवार के वकील ने बताया कि पीड़ित छात्र की ओर से थाने में तहरीर भी दी जा चुकी है और वे न्याय की मांग करते हैं। वकील ने कहा कि चिकित्सा रिपोर्ट एवं साक्ष्यों केन्द्रीय धारा के तहत दर्ज कराए जाने की मांग की जा रही है। छात्र का इलाज वर्तमान में स्थानीय अस्पताल में चल रहा है और डॉक्टरों ने उसकी स्वास्थ्य स्थिति को मॉनिटर करने की सलाह दी है।
स्थानीय निवासियों तथा छात्रों ने इस घटना की निन्दा की है और पुलिस प्रशासन से पारदर्शिता तथा निष्पक्ष जांच की अपील की है। कुछ छात्रों ने कहा कि अगर पुलिस के अंदर इस तरह की खामियां रह जाती हैं तो सामान्य नागरिकों का भरोसा कम होगा। वहीं कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि पीड़ित पक्ष के साथ निष्पक्षता बरती जानी चाहिए और यदि दोष साबित होता है तो सख्त सज़ा दी जानी चाहिए।
विधानसभा और जिला प्रशासन ने भी मामले पर नजर रखने का संकेत दिया है। पुलिस उप महाप्रबंधक (जोनल) को मामले की पूर्ण जांच रिपोर्ट एक सप्ताह में देने के निर्देश जारी किए गए हैं। अगर आवश्यक हुआ तो मामले की उच्च स्तरीय जांच भी कराई जाएगी। मामले की आगे की जांच जारी है; पुलिस ने धरने-प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने का निर्देश दिया है और मुकदमों से जुड़े कानूनी पहलुओं का पालन करते हुए तफ़्तीश आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है। जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवार को कानूनी सहायता और आवश्यक चिकित्सा खर्च के लिए प्राथमिक मदद का आश्वासन भी दिया है।

