ट्विशा शर्मा केस: सीबीआई ने संभाली जांच, भोपाल में दर्ज की नई एफआईआर, सुप्रीम सुनवाई जारी 

रिटायर्ड जज की बहू की संदिग्ध मौत ने देश को हिलाया, पुलिस हिरासत में पति का खुलासा, सास को मिली थी अग्रिम जमानत

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर मोड़ ले लिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भोपाल में हुई ट्विशा की कथित दहेज हत्या के मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है। एजेंसी ने भोपाल के कटारा हिल्स थाने में पहले से दर्ज एफआईआर को दोबारा पंजीकृत करते हुए जांच शुरू कर दी है। सीबीआई की स्पेशल क्राइम यूनिट (दिल्ली) ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है और जांच की जिम्मेदारी भी अपने हाथ में ले ली है।

कौन थीं ट्विशा शर्मा?

31 वर्षीय ट्विशा शर्मा नोएडा की रहने वाली थीं। दिसंबर 2025 में शादी डॉट कॉम के जरिए ट्विशा की शादी हुई थी। साल 2012 में ट्विशा ‘मिस पुणे’ का खिताब अपने नाम कर चुकी थीं। मॉडल होने के साथ-साथ ट्विशा एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी थीं।

मामले की पृष्ठभूमि

एफआईआर के मुताबिक, 12 मई की रात करीब 10:20 बजे महिला की मौत की सूचना पुलिस को मिली थी। ट्विशा शर्मा का मामला इसलिए भी बड़ा बन गया क्योंकि आरोपियों का संबंध न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। ट्विशा के पति समर्थ सिंह एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं और उनकी मां गिरिबाला सिंह रिटायर्ड जिला जज हैं। परिवार ने दावा किया है कि ट्विशा की सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ ने ट्विशा को अबॉर्शन कराने के लिए मजबूर किया। इसी वजह से परिवार और कुछ सामाजिक संगठनों ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

दहेज प्रताड़ना के गंभीर आरोप

ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने बेटी की सास पूर्व जज गिरिबाला के संपर्क किए गए मोबाइल नंबरों की कॉल लिस्ट जारी की। उन्होंने दावा किया कि सास ने केस को दबाने के लिए ऊंचे संपर्कों का फायदा उठाने के लिए प्रभावशाली लोगों को कई कॉल किए। एक ऑडियो में भी गिरिबाला सिंह अपनी बहू के लिए बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती सुनाई दी थीं।

सीबीआई जांच की धाराएं और जांच अधिकारी

सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत केस दर्ज किया है। एजेंसी ने एफआईआर के तहत 25 मई 2026 को मामला दर्ज किया। मामले की जांच के लिए सीबीआई ने डीएसपी निशु कुशवाहा को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। एफआईआर में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को नामजद किया गया है।शुरुआती चरण में स्थानीय पुलिस से मिले दस्तावेजों और साक्ष्यों की गहन समीक्षा की जाएगी। इस केस के सीबीआई के हाथ में जाने के बाद अब जांच से जुड़े सभी पहलुओं पर नए सिरे से पड़ताल होने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

इस मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह को उनके इंटरव्यू के लिए कड़ी फटकार लगाई और कहा कि इस मामले को जिस तरह से संभाला गया है, वह ठीक नहीं था। पीठ ने कहा कि हम पीड़िता और आरोपियों के परिवारों से कहना चाहते हैं कि वे मीडिया प्लेटफॉर्म पर बयान देने के बजाय अपनी बात जांच एजेंसी के समक्ष रखें, ताकि चल रही जांच पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

दोबारा पोस्टमार्टम और हाईकोर्ट

ट्विशा के परिवार ने आरोप लगाया कि शुरुआती पोस्टमार्टम में कई जरूरी पहलुओं को नजरअंदाज किया गया। परिवार चाहता था कि फॉरेंसिक, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विशेषज्ञों की टीम पूरे मामले की दोबारा जांच करे। इसी बीच हाई कोर्ट ने दूसरे पोस्टमार्टम के निर्देश भी दिए थे। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि ट्विशा का दूसरा पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार पहले ही हो चुका है।

एक विवादास्पद टिप्पणी

इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दी गई एक टिप्पणी “तलाकशुदा बेटी, मृत बेटी से बेहतर” ने भी सबका ध्यान खींचा और देशभर में बहस छिड़ गई। यह मामला अब सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि न्यायपालिका, दहेज प्रथा और महिला सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल उठा रहा है। सीबीआई की जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में अब देखना होगा कि सच्चाई सामने आती है या नहीं।

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