Major reshuffle in Industrial Development Authorities: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में प्रशासनिक कसावट लाने और कामकाज को गति देने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में यमुना प्राधिकरण, नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कई वरिष्ठ प्रबंधकों और अधिकारियों का ट्रांसफर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) व अन्य क्षेत्रों में कर दिया गया है।माना जा रहा है कि यह फेरबदल शासन स्तर पर चल रही व्यापक तबादला नीति का एक हिस्सा है, जिसके तहत आने वाले दिनों में कुछ और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
इन वरिष्ठ अधिकारियों का हुआ तबादला
जारी आदेशों के मुताबिक, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के महत्वपूर्ण विभागों में तैनात अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं:
बृजपाल सिंह (वरिष्ठ प्रबंधक, विद्युत यांत्रिकी): यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) से हटाकर इन्हें यूपीसीडा (UPSIDA) भेजा गया है।
प्रवीण सलोनिया: इन्हें नोएडा प्राधिकरण से हटाकर खंड-6, अयोध्या यूपीसीडा (UPSIDA) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अयोध्या के बढ़ते औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास के लिहाज से यह तैनाती काफी अहम मानी जा रही है।
राजेंद्र सिंह: नोएडा प्राधिकरण के उद्यान विभाग में तैनात राजेंद्र सिंह को अब यूपीसीडा में ‘वास्तुविद नियोजन’ (Architect Planning) के पद पर भेजा गया है।
सुधीर कुमार: ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वास्तुविद नियोजन विभाग से ट्रांसफर कर इन्हें भी यूपीसीडा में ‘वास्तुविद नियोजन’ के पद पर तैनात किया गया है।
आलोक अग्रवाल (प्रबंधक, सामान्य प्रशासन): इन्हें नोएडा/ग्रेटर नोएडा से स्थानांतरित कर यूपीसीडा में इसी समान पद (प्रबंधक, सामान्य प्रशासन) पर नई जिम्मेदारी दी गई है।
मई के महीने में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट: सूत्रों का दावा
प्राधिकरण के गलियारों और प्रशासनिक सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, यह तो महज शुरुआत है। मई के इस महीने में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण (त्रिपक्षीय प्राधिकरण क्षेत्र) में बड़े पैमाने पर तबादले होने की संभावना है।
क्यों हो रहे हैं ये तबादले? सूत्रों का कहना है कि जो अधिकारी पिछले कई वर्षों से एक ही सीट या एक ही प्राधिकरण में जमे हुए हैं, उन्हें ‘तबादला नीति’ के तहत बदला जा रहा है। इसके अलावा, यूपीसीडा को राज्य भर में औद्योगिक भूखंडों के आवंटन और नए कॉरिडोर विकसित करने के लिए अनुभवी जनशक्ति की जरूरत है, जिसके चलते नोएडा-ग्रेटर नोएडा के अनुभवी अधिकारियों को वहां शिफ्ट किया जा रहा है।
काम पर क्या होगा असर?
इस थोक तबादला सूची से जहां एक तरफ ट्रांसफर पाने वाले अधिकारियों में खलबली मची हुई है, वहीं दूसरी तरफ उम्मीद जताई जा रही है कि नए चेहरों के आने से विकास कार्यों में पारदर्शिता और तेजी आएगी। विशेष रूप से अयोध्या और यूपीसीडा के अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को इन अनुभवी अधिकारियों की प्लानिंग (वास्तुविद नियोजन) और प्रशासनिक क्षमताओं का सीधा लाभ मिलेगा। शासन स्तर पर तैयार हो रही अगली सूची में कई और ‘रसूखदार’ और लंबे समय से टिके इंजीनियरों व प्रबंधकों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जिन पर जल्द ही अंतिम मुहर लग सकती है।

