प्राधिकरण की बड़ी कार्रवाई: किसानों के नाम पर ‘दुकान’ चलाने वाले कथित नेताओं की सूची तैयार, शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट

नोएडा: किसान हितों की आड़ में निजी स्वार्थ सिद्ध करने वाले और सरकारी संपत्तियों पर कब्जा करने वाले कथित किसान नेताओं पर अब प्रशासन का चाबुक चलने वाला है। प्राधिकरण ने ऐसे चेहरों को चिह्नित कर लिया है जो किसानों की समस्याओं का बहाना बनाकर अपनी तिजोरियाँ भर रहे हैं। प्राधिकरण के पास मौजूद पुख्ता जानकारी के अनुसार, इन नेताओं की एक विस्तृत सूची तैयार की गई है, जिसे जल्द ही राज्य शासन को भेजा जाएगा। इस कदम का उद्देश्य आंदोलनों के नाम पर हो रहे अवैध कब्जों और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है।

आंदोलन की आड़ में अवैध साम्राज्य

जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ तथाकथित किसान नेता प्राधिकरण की बेशकीमती जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं। ये लोग भोले-भाले किसानों को आगे कर प्रदर्शन आयोजित करते हैं और पर्दे के पीछे प्राधिकरण के अधिकारियों या बिल्डरों पर दबाव बनाकर अवैध वित्तीय लाभ प्राप्त करते हैं।

  • जमीन पर कब्जा: प्राधिकरण की अधिग्रहित भूमि पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण।
  • ब्लैकमेलिंग: विकास कार्यों को रुकवाकर समझौते के नाम पर भारी रकम की वसूली।
  • दोहरा चेहरा: एक तरफ किसानों के हक की बात, दूसरी तरफ निजी संपत्तियों का विस्तार।

प्राधिकरण का सख्त रुख

प्राधिकरण के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विभाग के पास ऐसे कई नाम और साक्ष्य हैं, जिनसे यह साबित होता है कि इन नेताओं का मकसद किसान कल्याण नहीं, बल्कि व्यक्तिगत लाभ है।

“हमने उन सभी व्यक्तियों की कुंडली तैयार कर ली है जो किसान आंदोलन की आड़ में प्राधिकरण की जमीन दबाए बैठे हैं। यह सूची शासन को इसलिए भेजी जा रही है ताकि उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई और गैंगस्टर एक्ट जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सके।”

शासन स्तर पर होगी जांच

सूची शासन को भेजे जाने के बाद, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और राजस्व विभाग की टीमें इन नेताओं की संपत्तियों की जांच कर सकती हैं। यदि उनकी आय के स्रोत और उनकी वर्तमान संपत्ति के बीच बड़ा अंतर पाया जाता है, तो उनकी अवैध संपत्तियों को कुर्क (Seize) करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

असली किसानों को नुकसान

प्रशासन का मानना है कि इन चंद स्वार्थी तत्वों के कारण उन वास्तविक किसानों की आवाज दब जाती है जो अपनी जायज मांगों (जैसे मुआवजा या लीज बैक) के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष कर रहे हैं। इन “बिचौलियों” पर शिकंजा कसने से वास्तविक किसानों और सरकार के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सकेगा।

मुख्य बिंदु:

  • सूची तैयार: प्राधिकरण ने संदिग्ध नेताओं के नाम और उनके द्वारा किए गए अवैध कब्जों का ब्यौरा जुटाया।
  • गंभीर आरोप: अवैध वसूली, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और धन शोधन (Money Laundering)।
  • अगला कदम: शासन के निर्देश मिलते ही बुलडोजर कार्रवाई और कानूनी मुकदमे दर्ज होंगे।

इस कार्रवाई से क्षेत्र के उन भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है जो लंबे समय से किसान राजनीति का चोला पहनकर भ्रष्टाचार के खेल में शामिल थे।

 

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