ANI vs OpenAI: नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट कानून से जुड़े सबसे बहुचर्चित मुकदमों में से एक — समाचार एजेंसी एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (ANI) बनाम OpenAI मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। जस्टिस अमित बंसल की अदालत ने ANI की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एजेंसी ने OpenAI के चैटबॉट ChatGPT पर अपनी खबरों का इस्तेमाल बिना अनुमति के AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए करने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने साफ कहा कि इससे कॉपीराइट अधिनियम के तहत कोई उल्लंघन नहीं होता, और इसलिए ANI को कोई अंतरिम निषेधाज्ञा (interim injunction) देने से इनकार कर दिया गया।
क्या था पूरा मामला
यह विवाद नवंबर 2024 में तब शुरू हुआ था, जब ANI ने दिल्ली हाईकोर्ट में OpenAI के खिलाफ एक विस्तृत याचिका दाखिल की थी। ANI का आरोप था कि OpenAI ने बिना लाइसेंस या अनुमति के उसकी खबरों का इस्तेमाल ChatGPT को प्रशिक्षित करने में किया, जिससे एजेंसी के कॉन्टेंट का व्यावसायिक शोषण हुआ। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि ChatGPT कई बार उसके नाम से ऐसी खबरें और बयान गढ़ देता है जो वास्तव में कभी हुए ही नहीं जिसे तकनीकी भाषा में “हैलुसिनेशन” कहा जाता है। ANI के मुताबिक, इससे न सिर्फ उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है बल्कि गलत सूचना फैलने का भी खतरा पैदा हुआ है। दूसरी ओर, OpenAI ने शुरू से ही इन आरोपों को खारिज किया। कंपनी का कहना था कि वह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डेटा का इस्तेमाल करती है, जो “फेयर यूज़” यानी उचित उपयोग के सिद्धांत के तहत संरक्षित है। कंपनी ने यह भी दलील दी कि उसने सितंबर 2024 से ही ANI की वेबसाइट को अपनी आंतरिक ब्लॉक-लिस्ट में डाल दिया था, ताकि भविष्य में मॉडल प्रशिक्षण के लिए उसका कॉन्टेंट इस्तेमाल न हो। भारत में यह अपनी तरह का पहला मामला था, जिसमें किसी भारतीय मीडिया संस्थान ने AI कंपनी के खिलाफ कॉपीराइट को लेकर अदालत का रुख किया था।
कोर्ट ने क्या कहा
शुक्रवार को सुनाए गए अपने आदेश में जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि OpenAI द्वारा ANI की सामग्री को ChatGPT को प्रशिक्षित करने के लिए संग्रहीत (स्टोर) करना कॉपीराइट अधिनियम की धारा 52(1)(a) के तहत आने वाले “फेयर डीलिंग” प्रावधान के दायरे में आता है, इसलिए यह धारा 51 के तहत उल्लंघन नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ChatGPT जिस रिट्रीवल-ऑगमेंटेड जनरेशन (RAG) तकनीक का इस्तेमाल कर जवाब तैयार करता है, उससे उत्पन्न आउटपुट ANI के मूल कॉन्टेंट से “काफी हद तक मिलता-जुलता” नहीं पाया गया, इसलिए इसे भी कॉपीराइट उल्लंघन नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ANI यह साबित करने में विफल रही कि ChatGPT के जवाबों में उसकी सामग्री की कोई “मेमोराइजेशन” या “रीगर्जिटेशन” (हूबहू दोहराव) हुई है। इसी आधार पर अदालत ने माना कि ANI अंतरिम निषेधाज्ञा के लिए ज़रूरी प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला बनाने में असफल रही। अदालत ने यह भी कहा कि अगर इस स्तर पर कोई अंतरिम रोक लगाई जाती, तो इससे न सिर्फ OpenAI बल्कि आम जनता को भी अपूरणीय क्षति (irreparable injury) पहुंच सकती थी। गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान OpenAI ने शुरू में यह भी तर्क दिया था कि चूंकि उसके सर्वर भारत में स्थित नहीं हैं और कंपनी भारत में सीधे परिचालन नहीं करती, इसलिए भारतीय अदालत को इस मामले में क्षेत्राधिकार (jurisdiction) ही नहीं है। हालांकि कोर्ट ने नवंबर 2024 में ही OpenAI को समन जारी करते हुए मामले की सुनवाई जारी रखी थी।
क्यों अहम है यह फैसला
यह मामला भारत में जेनरेटिव AI और कॉपीराइट कानून के टकराव का पहला बड़ा न्यायिक परीक्षण माना जा रहा था। भारत का कॉपीराइट अधिनियम, 1957 दशकों पुराना है और इसमें मशीन लर्निंग या AI प्रशिक्षण के लिए डेटा इस्तेमाल को लेकर कोई सीधा प्रावधान नहीं है — अमेरिका और यूरोपीय संघ के विपरीत, जहां AI ट्रेनिंग को लेकर कुछ स्पष्ट अपवाद (exceptions) मौजूद हैं। ऐसे में अदालत को पुराने कानून को नई तकनीक पर लागू करने की चुनौती का सामना करना पड़ा। यह फैसला दुनियाभर में चल रहे उन दर्जनों मुकदमों की कड़ी में भी अहम माना जा रहा है, जिनमें द न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य मीडिया संस्थानों ने OpenAI तथा अन्य AI कंपनियों पर कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। भारत जैसे बड़े डिजिटल बाजार में यह फैसला आने वाले समय में अन्य भारतीय प्रकाशकों और मीडिया हाउसों द्वारा AI कंपनियों के खिलाफ दायर किए जाने वाले मुकदमों के लिए एक अहम नज़ीर (precedent) बन सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि यह सिर्फ एक अंतरिम आदेश है और मुख्य मुकदमे पर सुनवाई अभी जारी रहेगी, फिर भी इसमें अदालत का रुख AI कंपनियों के पक्ष में झुका हुआ नजर आता है। साथ ही, कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत को AI प्रशिक्षण डेटा और कॉपीराइट अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए एक स्पष्ट और अद्यतन कानूनी ढांचे की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सके।
आगे क्या
फिलहाल यह आदेश केवल अंतरिम राहत याचिका पर आया है, यानी ANI का मूल कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा दिल्ली हाईकोर्ट में आगे भी चलता रहेगा। विस्तृत आदेश की प्रति का अभी इंतजार है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ANI इस अंतरिम फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देती है या नहीं, और मुख्य सुनवाई में अंतिम फैसला किस दिशा में जाता है।

