राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया। यह फैसला देशभर में हड़कंप मचा गया है, क्योंकि इससे 22.7 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का एक साल बर्बाद होने का खतरा है। CBI जांच में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि मेडिकल संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में NTA को बदलने और परीक्षा न्यायिक निगरानी में कराने की मांग की है।
शिक्षक की शिकायत ने शुरू की जांच
घटना की शुरुआत 3 मई की शाम हुई, जब सिकर के एक प्रतिष्ठित कोचिंग सेंटर के शिक्षक को उनके लैंडलॉर्ड ने एक हैंडरिटन ‘गेस पेपर’ भेजा। लैंडलॉर्ड को यह केरल में अपने बेटे से मिला था। शिक्षक ने इसे जांचा तो पाया कि इसमें NEET के कई सवाल मैच कर रहे थे। परीक्षा खत्म होने के बाद 4 मई की सुबह उन्होंने सिकर के उद्योग नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत करने की कोशिश की, लेकिन लिखित शिकायत दिए बिना चले गए। 7 मई को रात 9:30 बजे के बाद उन्होंने NTA को विस्तृत शिकायत भेजी। इसमें उन्होंने लगभग 60 पेज के PDF का जिक्र किया, जिसमें केमिस्ट्री के 90 सवाल और बायोलॉजी के 7-8 पेज शामिल थे। उन्होंने लिखा, “मैं अपना मोबाइल फॉरेंसिक जांच के लिए देने को तैयार हूं। यह मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग करता हूं।” उनकी शिकायत के आधार पर NTA ने केंद्रीय एजेंसियों को सूचित किया, जिससे राजस्थान SOG और फिर CBI की जांच शुरू हुई। शिक्षक को बाद में किसी गलत काम से बरी कर दिया गया।
आरोपी और लीक का नेटवर्क
CBI ने अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है: जयपुर के मंगीलाल बिस्वाल, विकास बिस्वाल, दिनेश बिस्वाल, गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खैरनार। यश यादव गुरुग्राम के खेड़ा खुड़रामपुर गांव का रहने वाला है। उसके स्कूल के बाहर पोस्टर पर उसे “MBBS सिलेक्शन” वाला अचीवर बताया गया था, जबकि वह BAMS का छात्र था। गांव के सरपंच ने उसे औसत छात्र बताया और कहा कि परिवार साधारण है। घर ताला बंद है और परिवार दिल्ली में है। आरोपियों पर पेपर खरीद-बिक्री का आरोप है। CBI के अनुसार, यह नेटवर्क राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र तक फैला हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट में FAIMA की याचिका
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने 13 मई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर NTA को बदलने या पूरी तरह पुनर्गठित करने, न्यायिक निगरानी में परीक्षा कराने और हाई-पावर्ड कमिटी गठन की मांग की है। याचिका में K Radhakrishnan समिति की सिफारिशों को लागू करने, डिजिटल लॉकिंग और CBT मोड पर जोर दिया गया है। FAIMA ने इसे “सिस्टेमिक फेलियर” बताया।
राजस्थान मंत्री का विवादास्पद बयान
राजस्थान के स्कूल शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा, “जांच एजेंसियों को अनियमितताएं मिली होंगी, इसलिए रद्द किया गया। इसमें कोई बड़ी बात नहीं है।” उन्होंने कहा कि दोषी कहीं से भी हों, उन्हें नहीं बख्शा जाएगा। विपक्ष ने आरोपियों के BJP से कथित संबंधों का मुद्दा उठाया है।
छात्रों पर असर और आगे क्या
NTA ने कहा है कि री-एग्जाम शीघ्र होगा, पुराने रजिस्ट्रेशन और फीस मान्य रहेंगी। छात्रों में आक्रोश है, दिल्ली और केरल में प्रदर्शन हुए। कई परिवार आर्थिक रूप से प्रभावित हैं। यह घोटाला 2024 के NEET विवाद की याद दिलाता है और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की मांग कर रहा है। CBI की जांच जारी है, जबकि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से NTA पर दबाव बढ़ गया है। छात्रों की मेहनत बचाने और परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल करने की चुनौती अब सरकार और न्यायपालिका के सामने है।

