‘वर्ल्ड क्लास सिटी’ का काला अध्याय, जनता फ्लैट्स में दरकती दीवारें, गिरती छतें, हजारों परिवारों पर मंडरा रहा मौत का साया

नोएडा को ‘वर्ल्ड क्लास सिटी’ बनाने के दावों के बीच सेक्टर-122 के जनता फ्लैट्स की जर्जर हालत ने विकास मॉडल की पोल खोल दी है। नोएडा सिटीजन फोरम (एनसीएफ) की कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने मंगलवार को फोरम के पदाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। निवासियों की शिकायतों पर एनसीएफ ने प्राधिकरण से तत्काल संरचनात्मक ऑडिट और मरम्मत की मांग की है।

झुग्गीवासियों के लिए 2011-12 में नोएडा प्राधिकरण द्वारा बनाए गए इन 3,458 फ्लैट्स में आज हज़ारों परिवार डर के साए में जीने को मजबूर हैं। सेक्टर 4, 5, 8, 9 और 10 की झुग्गियों से विस्थापित 11,565 पात्र परिवारों के लिए बने ये फ्लैट्स अब खतरे की घंटी बज रहे हैं। बाहरी दीवारों पर गहरी दरारें, उखड़ता प्लास्टर, बाहर झाँकती लोहे की रॉडें और रिसते छतें—यह नजारा किसी पिछड़े इलाके का नहीं, बल्कि देश के सबसे आधुनिक शहरों में शुमार नोएडा का है।

निवासियों का दर्द: ‘झुग्गी छोड़कर आए, अब जान पर बन आई’  

निवासी रामकली देवी ने बताया, “झुग्गी से पक्का घर मिलने की उम्मीद में आए थे, लेकिन यहाँ तो रात को दीवारें चटकने की आवाज़ से नींद उड़ जाती है। बच्चे सोते समय भी डर लगता है कि कहीं छत न गिर पड़े।” एक अन्य निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि बरसात में कई फ्लैट्स की छतें टपकती हैं और कुछ आंशिक रूप से गिर चुकी हैं। एनसीएफ टीम ने दर्जनों फ्लैट्स का दौरा किया, जहाँ सीलन से सने कमरे और खतरनाक संरचना सामने आई।

डेढ़ दशक की लापरवाही: रखरखाव पर सवाल  

विशेषज्ञों के मुताबिक, ये इमारतें 14-15 साल पुरानी हो चुकी हैं। नागरिक इंजीनियर डॉ. अजय वर्मा ने कहा, “10-15 साल पुरानी इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट अनिवार्य है। दरारें और सीमेंट का गिरना बड़े हादसे की चेतावनी है। बिना मरम्मत के रहना आपराधिक लापरवाही है।” 12 मई को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में भी इस मुद्दे को उठाया गया था। प्राधिकरण पर आरोप है कि नियमित रखरखाव, ऑडिट या बजट का कोई इंतजाम नहीं हुआ। इसी तरह सेक्टर-71 के जनता फ्लैट्स में भी पहले ऐसी स्थिति सामने आ चुकी है।

राजनीतिक हलचल तेज, प्राधिकरण का वादा  

मुद्दे ने राजनीति में हंगामा मचा दिया। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्म ने कहा, “प्राधिकरण गरीबों की जान जोखिम में डाल रहा है। तत्काल सर्वे और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था हो।” भाजपा ने भी सरकार पर निशाना साधा। ताजा अपडेट में, नोएडा प्राधिकरण ने आज दोपहर प्रेस रिलीज जारी कर कहा, “जनता फ्लैट्स की शिकायतों पर संज्ञान लिया गया है। अगले 15 दिनों में इंजीनियरिंग टीम निरीक्षण करेगी और मरम्मत के लिए बजट आवंटित किया जाएगा।” हालांकि, निवासियों का कहना है कि पिछले साल भी ऐसे वादे हुए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

झुग्गी से फ्लैट योजना का काला सच  

झुग्गी एसोसिएशन के अध्यक्ष शिव शंकर शाह ने पहले आरोप लगाया था कि आवंटन में राजनीति हुई। कई पात्र परिवार आज भी फ्लैट नसीब नहीं कर पाए। सरकारी आवास योजनाओं में रखरखाव की कमी आम समस्या है—निवासी संघ न बन पाना, धीमा उन्नयन और कमजोर सर्विसेज। एनसीएफ ने प्राधिकरण को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें तुरंत मरम्मत, अस्थायी रहने की व्यवस्था और पारदर्शी ऑडिट की मांग की गई है।

विकास का असली चेहरा?  

नोएडा के चमचमाते एक्सप्रेसवे, कॉर्पोरेट टावरों और स्मार्ट सिटी सपनों के बीच ये फ्लैट्स सवाल खड़े करते हैं—विकास किसके लिए? जब तक गरीबों के सिर पर सुरक्षित छत न हो, ‘वर्ल्ड क्लास सिटी’ का दावा खोखला ही रहेगा। प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर सबकी नज़रें टिकी हैं।

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