सत्ता बदलते ही भाजपा सरकार ने कसी नकेल, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का ऐलान, पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नई भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। एक तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुजीत बोस को नगरपालिका भर्ती घोटाले में गिरफ्तार कर लिया है, तो दूसरी तरफ टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की ‘Z+’ सुरक्षा पूरी तरह वापस ले ली गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास से भी अतिरिक्त सुरक्षा घटाई गई है। राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है।
ED का बड़ा वार — सुजीत बोस गिरफ्तार
कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय ने नगर निगम भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुजीत बोस को गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार को करीब 10 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद ED ने यह कार्रवाई की। ईडी के मुताबिक, सुजीत बोस ने साउथ दमदम नगरपालिका में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए कथित तौर पर 150 उम्मीदवारों की अवैध सिफारिश की थी और इसके बदले आर्थिक लाभ लिया था। जांच एजेंसी का दावा है कि भर्ती में मदद करने के बदले सुजीत बोस ने कई फ्लैट हासिल किए, जिन्हें ईडी ने अपराध से अर्जित संपत्ति के रूप में चिन्हित किया है। बता दें कि सुजीत बोस 11 मई 2026 को कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में ईडी के समक्ष पेश हुए थे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें कई बार ईडी नोटिस भेज चुकी थी, जिनमें से एक नोटिस 6 अप्रैल को उनके नामांकन पत्र दाखिल करने के दिन भी जारी किया गया था। इससे पहले स्कूल भर्ती घोटाले में भी कई नेता और अधिकारी गिरफ्तार हो चुके हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि नगरपालिकाओं में भी पैसे लेकर नौकरी देने का खेल चला, जिससे कई योग्य उम्मीदवारों का हक छिन गया।
अभिषेक बनर्जी की Z+ सुरक्षा वापस — 10 साल का रुतबा खत्म
पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने अभिषेक बनर्जी की ‘जेड प्लस’ सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया है। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को अब दी गई अतिरिक्त सुरक्षा और विशेष पायलट कार की सुविधा नहीं मिलेगी। पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से अभिषेक बनर्जी को जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई थी। भाजपा की 207 सीटों पर जीत और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यभार संभालने के बाद व्यापक सुरक्षा समीक्षा की गई, जिसके तहत कई वीआईपी सुरक्षा प्रबंधों में बदलाव किया गया। कोलकाता पुलिस ने उनके हरीश मुखर्जी रोड स्थित आवास ‘शांतिनिकेतन’ और कैमाक स्ट्रीट ऑफिस के बाहर तैनात अतिरिक्त सुरक्षा बल को भी तुरंत हटा दिया। इसी तरह, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर भी सुरक्षा व्यवस्था में कटौती की गई। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक सांसदों को आमतौर पर Z+ श्रेणी की सुरक्षा नहीं दी जाती, इसलिए मौजूदा सुरक्षा स्तर का पुनर्मूल्यांकन किया गया। समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि अभिषेक बनर्जी के लिए अब उच्चतम श्रेणी की सुरक्षा की जरूरत नहीं है।
राजनीतिक हलचल — TMC बोली ‘प्रतिशोध’, BJP बोली ‘सामान्य प्रक्रिया’
ED की कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। भाजपा नेताओं ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बताया है, जबकि TMC लगातार केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाती रही है। इस फैसले के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है। कई टीएमसी नेताओं का कहना है कि यह कदम राजनीतिक प्रतिशोध जैसा लगता है, जबकि भाजपा समर्थक इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहे हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 294 विधानसभा सीटों में से 207 सीटें हासिल कीं, जबकि टीएमसी को मात्र 80 सीटों से संतोष करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्ता परिवर्तन का प्रतीकात्मक संदेश भी है — बंगाल में नई सरकार, नए नियम। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह बदलाव का दौर है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों और कार्रवाइयों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

