दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक 40 साल पुराने सनसनीखेज हत्याकांड को सुलझाने में बड़ी सफलता हासिल की है। शकरपुर इलाके में 1986 में हुई इस क्रूर हत्या के आरोपी चंद्रशेखर प्रसाद को पुलिस ने गुप्तचर तरीके से सेंसर अधिकारी बनकर गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, चंद्रशेखर प्रसाद, जो मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले का निवासी है, ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी और उसके बाद 40 वर्षों तक नंगली पूना क्षेत्र के एक फैक्टरी स्टोररूम में झूठी पहचान के साथ छिपा रहा। 82 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए क्राइम ब्रांच की टीम ने लंबे समय तक निगरानी और गुप्त अभियान चलाया। विशेष रूप से, पुलिसकर्मियों ने खुद को जनगणना (सेंसर) अधिकारी के रूप में प्रच्छन्न कर आरोपी तक पहुंच बनाई, जिससे उसकी पहचान और लोकेशन की पुष्टि हुई।
लंबे समय की मशक्कत से खुला राज
क्राइम ब्रांच के डीसीपी ने बताया कि यह मामला 1986 से कोल्ड केस की फाइल में दबा हुआ था। हाल ही में टीम ने पुराने रिकॉर्ड्स की फिर से छानबीन शुरू की, जिसमें आरोपी के परिजनों और संभावित ठिकानों पर नजर रखी गई। सेंसर सर्वे के बहाने स्थानीय स्तर पर पूछताछ कर पुलिस ने आरोपी को फ्लैश आउट किया। गिरफ्तारी के समय आरोपी ने अपना अपराध कबूल कर लिया। यह दिल्ली पुलिस की लगातार दूसरी बड़ी कामयाबी है, क्योंकि हाल ही में ही 1991 के एक अन्य हत्याकांड को भी 35 साल बाद सुलझाया गया था।
पुलिस की रणनीति ने फिर किया कमाल
दिल्ली पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में कई पुराने मामलों को हल करने के लिए अंडरकवर ऑपरेशन का सहारा लिया है। 25 साल पुराने किशन लाल हत्याकांड में इंश्योरेंस एजेंट बनकर और 31 साल पुराने मामले में कैटरर व बिल्डर के रूप में पुलिस ने आरोपी पकड़े थे। इस बार सेंसर अधिकारी का जतन कारगर साबित हुआ। अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय खुफिया तंत्र ने इन कोल्ड केसेज को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब आरोपी को कोर्ट में पेश किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई तेजी से चलाई जा रही है। यह घटना पुलिस की दृढ़ता और नवाचारी तरीकों का जीता-जागता उदाहरण है, जो अपराधियों को संदेश देती है कि समय के साथ कानून कभी थकता नहीं।

