टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) पर यौन उत्पीड़न के मामलों को संभालने में लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने एक तीखी रिपोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल की है। रिपोर्ट में टीसीएस पर पोस्को एक्ट (POSH Act) के प्रावधानों का ‘शून्य अनुपालन’ होने का दावा किया गया है, जो कंपनी की आंतरिक शिकायत समिति (IC) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, एनसीडब्ल्यू की यह रिपोर्ट एक पूर्व टीसीएस कर्मचारी की याचिका पर आधारित है, जिसमें कंपनी पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों को दबाने और प्रभावित महिलाओं को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। आयोग ने अपनी जांच में पाया कि टीसीएस की आंतरिक समिति ने शिकायतों की उचित जांच नहीं की, न ही समयबद्ध कार्रवाई की। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कंपनी ने ‘सेक्शुअल हैरासमेंट ऑफ विमेन एट वर्कप्लेस (प्रिवेंशन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेसल) एक्ट, 2013’ के तहत अनिवार्य दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया।
ताजा अपडेट्स के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 मई को इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए टीसीएस को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कंपनी से चार सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है। एनसीडब्ल्यू चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने रिपोर्ट में कहा, “टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी में POSH एक्ट का ऐसा घोर उल्लंघन चिंताजनक है। इससे न केवल पीड़ित महिलाओं का भरोसा टूटता है, बल्कि पूरे कॉर्पोरेट सेक्टर में कार्यस्थल सुरक्षा पर सवाल उठते हैं।” आयोग ने सिफारिश की है कि मामले की स्वतंत्र जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब एक पूर्व महिला कर्मचारी ने 2024 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की, aleging कि उनकी शिकायत के बाद कंपनी ने उन्हें बदनाम किया और नौकरी से निकाल दिया। एनसीडब्ल्यू ने दिसंबर 2025 में जांच शुरू की, जिसमें टीसीएस के 10 से अधिक POSH मामलों की पड़ताल की गई। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अधिकांश मामलों में IC ने आरोपियों को क्लीन चिट दे दी, बिना ठोस सबूतों या सुनवाई के।
टीसीएस ने अभी तक रिपोर्ट पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे और कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करेंगे।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अन्य आईटी कंपनियों के लिए चेतावनी है, जहां POSH अनुपालन अक्सर कागजी रह जाता है। श्रम मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर नजर रखी हुई है और आवश्यकता पड़ने पर हस्तक्षेप की बात कही है।महिला अधिकार संगठनों ने रिपोर्ट का स्वागत किया है। ऑल इंडिया विमेन कॉन्फ्रेंस की ओर से कहा गया, “यह फैसला कॉर्पोरेट जगत में लैंगिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।” मामले की अगली सुनवाई जून में निर्धारित है।

