DPS समेत 10 नामी स्कूलों को नोटिस, जिला प्रशासन ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

1400 से अधिक गरीब बच्चों को तीन महीने बाद भी नहीं मिला प्रवेश, डीएम कार्यालय में हुई सख्त समीक्षा बैठक,शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश न दिए जाने की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। आरटीई कानून के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को 25 प्रतिशत सीटों पर निशुल्क दाखिला दिया जाना अनिवार्य है, लेकिन जिले के दर्जनों स्कूल इस कानूनी बाध्यता की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं। जिले में करीब 1400 ऐसे बच्चे हैं जिन्हें तीन महीने पहले स्कूल आवंटित हो चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें दाखिला नहीं दिया गया है। आवंटन पत्र हाथ में होने के बावजूद स्कूलों के बंद दरवाजे इन बच्चों और उनके अभिभावकों की पीड़ा को बयां करते हैं।

डीएम कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक, 40 में से 10 स्कूल रहे गैरहाजिर

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी कार्यालय में एक अहम समीक्षा बैठक बुलाई गई, जिसमें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने आरटीई दाखिलों में हो रही देरी और उल्लंघनों की विस्तृत पड़ताल की। बैठक में 40 निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था, किंतु इनमें से 10 स्कूलों से कोई भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। प्रशासन की ओर से अनुपस्थित रहने वाले स्कूलों में कई बड़े और नामी स्कूल भी शामिल हैं।

इन 10 स्कूलों को जारी हुआ नोटिस , जिला प्रशासन ने बैठक में अनुपस्थित रहे निम्नलिखित स्कूलों को नोटिस जारी किया है —

1.    दरबारी लाल फाउंडेशन स्कूल, ग्रेटर नोएडा

2.    दिल्ली पब्लिक स्कूल, सेक्टर-122, नोएडा

3.    रामाज्ञा स्कूल, सेक्टर-150, नोएडा

4.    शांति इंटरनेशनल स्कूल, नोएडा

5.    स्टेप बाय स्टेप स्कूल, नोएडा

6.    बीजीएस विजय नाथम स्कूल, ग्रेनो वेस्ट

7.    रामज्ञा स्कूल, डेल्टा-2

8.    सेंट मेरी स्कूल, नॉलेज पार्क-5

9.    एपीजे स्कूल, नोएडा

10.   बिरला बॉन्ग स्कूल, नोएडा

इन सभी स्कूलों को अगली सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

जानबूझकर लटकाई जा रही है प्रक्रिया — प्रशासन

बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि कई स्कूल जानबूझकर दाखिले की प्रक्रिया को लंबा खींच रहे हैं, जिससे गरीब परिवारों के अभिभावकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों ने दो-टूक चेतावनी दी कि यदि किसी स्कूल ने नियमों का उल्लंघन जारी रखा तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने कहा कि इस मामले में अब नियमित निगरानी रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

बैठक में मौजूद स्कूलों को भी कड़ी चेतावनी

केवल अनुपस्थित स्कूल ही नहीं, बैठक में उपस्थित स्कूल प्रतिनिधियों को भी स्पष्ट संदेश दिया गया कि आरटीई के तहत चयनित किसी भी बच्चे के प्रवेश में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि जिन बच्चों का चयन हो चुका है, उनका दाखिला अविलंब सुनिश्चित किया जाए।

क्या है आरटीई कानून का प्रावधान?

वर्ष 2009 में लागू हुए ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ के तहत देश के सभी गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में कक्षा एक से प्रवेश स्तर तक 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है। इन बच्चों की फीस का वहन राज्य सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति के रूप में किया जाता है। इस कानून का मूल उद्देश्य है कि गरीब से गरीब परिवार का बच्चा भी उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से वंचित न रहे।

क्या होगा आगे?

जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि नोटिस मिलने के बाद भी संबंधित स्कूलों ने सहयोग नहीं किया, तो उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग अब इस पूरी प्रक्रिया की सप्ताहवार समीक्षा करेगा। अधिकारियों का यह भी कहना है कि किसी भी पात्र बच्चे का प्रवेश यदि रोका गया तो संबंधित स्कूल की मान्यता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

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