नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार बने मंत्री, रोहिणी आचार्य का तंज- ‘चोर दरवाजे से शॉर्टकट एंट्री’ 

बिहार की राजनीति में आज एक और नया अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हो गया। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। इस सूची में सबसे चर्चित नाम जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का है, जिन्होंने बिना चुनाव लड़े कैबिनेट में एंट्री पाई है।  समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। बीजेपी कोटे से 15, जदयू से 13 और अन्य सहयोगी दलों के बाकी मंत्री शामिल हुए। निशांत कुमार समेत तीन पूर्व सीएम के बेटे कैबिनेट में जगह बना पाए। समारोह के दौरान निशांत कुमार ने पिता नीतीश कुमार, पीएम मोदी और अमित शाह के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा।

रोहिणी आचार्य का तीखा तंज

शपथ ग्रहण होते ही विपक्षी खेमे से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर निशांत कुमार पर कड़ा तंज कसा। उन्होंने लिखा, “बिना चुनाव लड़े चोर दरवाजे से मंत्रिमंडल में शॉर्टकट एंट्री पाने के लिए भाई निशांत को बधाई- शुभकामनाएं। और एंट्री दिलाने के लिए असलियत में अनैतिकता के शिखर पुरुष, मगर ‘स्वयंभू नैतिक पुरुष’ चाचा जी को भी ढेरों बधाई। 2005 से पहले ये सब भी नहीं होता था चाचा रंगबदलू जी।” रोहिणी का यह ट्वीट तेजी से वायरल हो गया और बिहार की सियासत में परिवारवाद, नैतिकता तथा राजनीतिक नैतिकता पर बहस छेड़ दी।

सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर आम जनता और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं काफी विविध रहीं।

समर्थन वाले स्वर: कई जदयू समर्थक और युवा नेताओं ने निशांत कुमार को बधाई दी। उन्हें “नई पीढ़ी का चेहरा” और “नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाने वाला” बताया गया। कुछ पोस्ट्स में निशांत को “सादगी और विकास कार्यों” से जोड़ा गया। X पर #NishantKumar और #BiharCabinet के साथ सकारात्मक संदेश और शुभकामनाएं देखने को मिलीं।

आलोचना और विपक्षी हमला: परिवारवाद, “चोर दरवाजा” और बिना जनादेश के सत्ता में एंट्री पर काफी आलोचना हुई। रोहिणी के ट्वीट को शेयर करते हुए कई यूजर्स ने लिखा कि यह “डायनेस्टिक पॉलिटिक्स” का उदाहरण है। कुछ ने पूछा- “जनता ने वोट किसे दिया, मंत्री कौन बन गया?” विपक्षी कार्यकर्ताओं ने इसे नीतीश कुमार की “अंतिम राजनीतिक कोशिश” करार दिया।

आम जनता की राय: आम बिहारवासियों में मिश्रित भावना दिखी। एक ओर जहां युवा इसे “परिवार की राजनीतिक स्थिरता” मान रहे हैं, वहीं कई लोग विकास, रोजगार और बाढ़ जैसी समस्याओं पर फोकस की मांग कर रहे हैं। “मंत्री बन गए, अब काम दिखाओ” जैसे कमेंट्स आम थे। जातीय समीकरणों पर भी चर्चा तेज रही, जिसमें EBC, OBC और अन्य वर्गों का प्रतिनिधित्व हाइलाइट किया गया।

अन्य प्रमुख मंत्री और संदर्भ

कैबिनेट में नीतीश मिश्रा की वापसी, श्रेयसी सिंह जैसे नामों ने भी ध्यान खींचा। वहीं मंगल पांडेय जैसे वरिष्ठ नेता इस बार बाहर रह गए, जो अटकलों का विषय बना। निशांत कुमार ने शपथ के बाद कहा, “मैं पिता के सिद्धांतों के अनुसार और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में काम करूंगा।”  विभागों का बंटवारा अभी बाकी है, जिस पर सभी की नजर टिकी हुई है। इस विस्तार को एनडीए की मजबूती और 2025 के बाद की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। बिहार की जनता अब नए मंत्रियों से ठोस काम और विकास की उम्मीद कर रही है, जबकि राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया बहस जारी रहेगी। यह घटना परिवारवाद बनाम योग्यता की बहस को एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर ला खड़ी कर गई है।

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